पॉपकॉर्न से बढ़ सकता है BP,ज्यादा नमक-मक्खन से बढ़ सकता है वजन

पॉपकॉर्न साबुत अनाज और फाइबर वाला स्नैक है, लेकिन ज्यादा नमक, मक्खन, तेल और फ्लेवरिंग से सोडियम, कैलोरी, वसा और शुगर बढ़ सकती है।

पॉपकॉर्न से बढ़ सकता है BP,ज्यादा नमक-मक्खन से बढ़ सकता है वजन

पॉपकॉर्न साबुत अनाज और फाइबर वाला स्नैक, लेकिन तैयारी का तरीका बनाता है फर्क
ज्यादा नमक, मक्खन, तेल और फ्लेवरिंग से बढ़ सकता है सोडियम, कैलोरी, वसा और शुगर
हाई BP और वजन बढ़ने के जोखिम से बचने के लिए कम मात्रा और सीमित टॉपिंग जरूरी

मूवी देखने जाएं और हाथ में गरमागर्म, कुरकुरा और मक्खन की खुशबू से महकता पॉपकॉर्न हो, तो फिल्म देखने का मजा दोगुना हो जाता है। इसकी खुशबू और स्वाद ऐसा होता है कि फिल्म देखते-देखते कब पूरा पैकेट खत्म हो जाता है, इसका पता ही नहीं चलता। लेकिन क्या आपका पसंदीदा मूवी स्नैक वाकई उतना ही सुरक्षित है, जितना आप इसे मानते हैं?

दरअसल, पॉपकॉर्न एक साबुत अनाज है और इसे फाइबर वाला स्नैक भी कहा जाता है। इसमें मौजूद फाइबर पेट को भरा हुआ महसूस कराने में मदद करता है। परेशानी तब शुरू होती है, जब इसमें जरूरत से ज्यादा मक्खन, नमक, चीनी या फ्लेवरिंग मिला दी जाती है। इन चीजों की अधिक मात्रा पॉपकॉर्न की पौष्टिकता पर असर डाल सकती है और इसे अनहेल्दी बना सकती है।

इसलिए पॉपकॉर्न को पूरी तरह अनहेल्दी कहना सही नहीं है। यह समझना ज्यादा जरूरी है कि पॉपकॉर्न किस तरह तैयार किया गया है और उसमें कौन-कौन से इंग्रेडिएंट मिलाए गए हैं।

सादा एयर-पॉप्ड पॉपकॉर्न क्यों माना जाता है हल्का स्नैक

सादा एयर-पॉप्ड पॉपकॉर्न हल्का स्नैक है, क्योंकि इसमें साबुत मक्का इस्तेमाल होता है। इसमें फाइबर भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो पेट भरा हुआ महसूस कराने में मदद करता है।

वहीं, मूवी थिएटर या बाजार में मिलने वाले पॉपकॉर्न में अतिरिक्त तेल, मक्खन, नमक और फ्लेवरिंग की मात्रा काफी हो सकती है। यही चीजें इसके पोषण को प्रभावित करती हैं। ऐसे में पॉपकॉर्न खाते समय सिर्फ उसके स्वाद पर ध्यान देने के बजाय उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री और उसकी मात्रा पर भी ध्यान देना जरूरी है।

ज्यादा नमक का मतलब शरीर में ज्यादा सोडियम

पॉपकॉर्न का स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें नमक का खूब इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन ज्यादा सोडियम का सेवन लंबे समय में हाई ब्लड प्रेशर के जोखिम से जुड़ा है। खासकर उन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए, जिन्हें डॉक्टर ने सोडियम सीमित करने की सलाह दी है।

ऐसे लोगों को नमकीन स्नैक्स की मात्रा पर विशेष ध्यान देना चाहिए। आहार विशेषज्ञों के अनुसार स्वाद के लिए हर बार अतिरिक्त नमक डालने के बजाय हल्का नमकीन पॉपकॉर्न चुनना बेहतर विकल्प हो सकता है।

इसलिए अगर पॉपकॉर्न खाते समय नमक की मात्रा ज्यादा है, तो इसे नजरअंदाज करना सही नहीं होगा। स्वाद के साथ-साथ इसमें मौजूद सोडियम की मात्रा का भी ध्यान रखना जरूरी है।

मक्खन, चीज और कैरेमल फ्लेवर से बढ़ सकती हैं कैलोरी

मक्खन वाला पॉपकॉर्न, चीज फ्लेवर, कैरेमल या अन्य टॉपिंग स्वाद में भले ही ज्यादा अच्छे लगते हों, लेकिन इनके साथ पॉपकॉर्न में कैलोरी, वसा और कभी-कभी अतिरिक्त चीनी भी बढ़ जाती है।

खासकर तब परेशानी बढ़ सकती है, जब इसका लगातार सेवन किया जाए। जानकारों के अनुसार समस्या सिर्फ एक बार पॉपकॉर्न खाने से नहीं, बल्कि बड़ी सर्विंग और बार-बार सेवन से भी पैदा हो सकती है।

इसलिए आहार विशेषज्ञ पॉपकॉर्न की टॉपिंग कम रखने और इसे सीमित मात्रा में खाने की सलाह देते हैं। स्वाद के लिए ज्यादा मक्खन, चीज या मीठी फ्लेवरिंग डालने के बजाय इसकी मात्रा पर नियंत्रण रखना बेहतर है।

ज्यादा पॉपकॉर्न और अतिरिक्त फ्लेवरिंग से बढ़ सकता है BP और वजन

पॉपकॉर्न अपने आप में नुकसानदायक नहीं है, लेकिन इसमें अतिरिक्त फ्लेवरिंग और अन्य सामग्री मिलाने से कई स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं। ज्यादा नमक लेने से शरीर में सोडियम बढ़ सकता है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर का जोखिम बढ़ता है।

इसी तरह ज्यादा मक्खन और तेल लेने से पॉपकॉर्न में कैलोरी और वसा की मात्रा बढ़ जाती है। इसका ज्यादा सेवन वजन बढ़ने की समस्या से जुड़ सकता है। वहीं, कैरेमल जैसे मीठे फ्लेवर पॉपकॉर्न में शुगर की मात्रा बढ़ा सकते हैं।

इसके अलावा बार-बार ज्यादा मात्रा में पॉपकॉर्न खाने से संतुलित आहार भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि परेशानी सिर्फ पॉपकॉर्न से नहीं, बल्कि उसकी मात्रा, टॉपिंग और तैयार करने के तरीके से भी जुड़ी होती है।

पॉपकॉर्न छोड़ने की जरूरत नहीं, बस खाने का तरीका बदलें

अगर आपको पॉपकॉर्न काफी पसंद है, तो इसे पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है। इसे ज्यादा सेहतमंद तरीके से खाने के लिए घर पर कम तेल में या एयर-पॉप्ड तरीके से तैयार किया जा सकता है।

पॉपकॉर्न में नमक सीमित रखें और मक्खन या फ्लेवरिंग का इस्तेमाल कम से कम करें। इसके साथ सबसे महत्वपूर्ण बात इसकी मात्रा है। कम मात्रा में पॉपकॉर्न खाने से आप इसके स्वाद का आनंद ले सकते हैं और जरूरत से ज्यादा खाने से भी बच सकते हैं।

मूवी देखते समय बड़े डिब्बे के बजाय छोटी मात्रा लेना भी एक आसान तरीका है। इससे बिना जरूरत से ज्यादा खाए पॉपकॉर्न का स्वाद लिया जा सकता है।

इसलिए अगली बार पॉपकॉर्न खाते समय सिर्फ यह न देखें कि वह कितना स्वादिष्ट है। यह भी ध्यान रखें कि उसमें कितना नमक, मक्खन, तेल, चीनी और फ्लेवरिंग डाली गई है। सही मात्रा और सीमित टॉपिंग के साथ पॉपकॉर्न को बेहतर स्नैक विकल्प बनाया जा सकता है।