सीजनल फ्लू में क्या खाएं? जल्दी रिकवरी के लिए जानें सही डाइट

सीजनल फ्लू में क्या खाएं और किन चीजों से बचें? जानें सूप, खिचड़ी, फल, प्रोटीन और पानी के फायदे तथा रिकवरी के जरूरी टिप्स।

सीजनल फ्लू में सूप, खिचड़ी, दाल और फल खाने से शरीर को ऊर्जा व जरूरी पोषक तत्व मिल सकते हैं

➤ बुखार और पसीने से पानी की कमी का खतरा, नियमित पानी और उपयुक्त तरल पदार्थ लेना जरूरी

➤ तला-भुना, ज्यादा मसालेदार खाना और शराब से परहेज करें, बिना डॉक्टर की सलाह एंटीबायोटिक न लें

मौसम बदलते ही सर्दी, खांसी, गले में खराश, बुखार और बदन दर्द जैसी परेशानियां बढ़ने लगती हैं। कई बार लोग इन्हें सामान्य मौसमी बदलाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि ये लक्षण सीजनल फ्लू यानी मौसमी इन्फ्लूएंजा के कारण भी हो सकते हैं। फ्लू होने पर शरीर में कमजोरी महसूस हो सकती है और भूख भी कम लग सकती है। ऐसे समय में दवाओं और पर्याप्त आराम के साथ सही खानपान का ध्यान रखना जरूरी है। पौष्टिक भोजन और पर्याप्त तरल पदार्थ शरीर को बीमारी से उबरने में मदद कर सकते हैं।

फ्लू के दौरान शरीर को पानी, ऊर्जा, प्रोटीन, विटामिन और अन्य जरूरी पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। हालांकि, कोई विशेष भोजन या घरेलू नुस्खा फ्लू को तुरंत ठीक नहीं कर सकता। सही डाइट का उद्देश्य शरीर में पोषण और पानी की कमी से बचाना तथा रिकवरी के दौरान जरूरी ऊर्जा उपलब्ध कराना है। इस दौरान सूप, खिचड़ी, दलिया, दाल-चावल, फल, पकी हुई सब्जियां और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ उपयोगी विकल्प हो सकते हैं। वहीं, बहुत तला-भुना भोजन, ज्यादा मसालेदार चीजें और शराब से बचना बेहतर है।

सीजनल फ्लू क्या है और मौसम बदलने पर किन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए?

सीजनल फ्लू एक वायरल संक्रमण है, जो इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होता है। इसके लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश, बदन दर्द और कमजोरी जैसी परेशानियां शामिल हो सकती हैं।

मौसम बदलने के दौरान इस तरह के लक्षण सामने आने पर लोग अक्सर खानपान पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाते।

बुखार और पसीने के कारण शरीर से पानी की कमी हो सकती है। वहीं, गले में दर्द और भूख कम लगने के कारण नियमित भोजन करना भी मुश्किल हो सकता है।

ऐसे में ऐसा भोजन चुनना उपयोगी है, जो आसानी से खाया जा सके और शरीर को जरूरी पोषक तत्व प्रदान करे।

सही डाइट फ्लू का इलाज नहीं है, लेकिन पर्याप्त पोषण, तरल पदार्थ और आराम बीमारी के दौरान शरीर को सहारा दे सकते हैं।

सीजनल फ्लू में क्या खाना चाहिए? सूप और गर्म तरल पदार्थ हो सकते हैं उपयोगी

फ्लू के दौरान सूप और गुनगुने तरल पदार्थ लेना आरामदायक हो सकता है।

चिकन सूप, वेजिटेबल सूप और गुनगुना पानी गले को राहत देने और शरीर में तरल पदार्थों की कमी से बचने में मदद कर सकते हैं।

यदि गले में खराश है या भोजन निगलने में परेशानी हो रही है, तो सूप एक हल्का विकल्प हो सकता है।

फ्लू के दौरान कई लोगों की भूख कम हो जाती है। ऐसे में भारी भोजन की जगह हल्का सूप लेना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।

सूप के जरिए शरीर को कुछ ऊर्जा और पोषक तत्व भी मिल सकते हैं।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि सूप पीने से फ्लू वायरस खत्म नहीं होता। इसका फायदा मुख्य रूप से शरीर को तरल पदार्थ और पोषण उपलब्ध कराने में है।

खिचड़ी, दलिया और दाल-चावल से मिलेगी ऊर्जा, गले में दर्द होने पर चुनें नरम भोजन

सीजनल फ्लू के दौरान ऐसा भोजन चुनना बेहतर है, जिसे आसानी से खाया और पचाया जा सके।

मूंग दाल की खिचड़ी, दलिया और दाल-चावल इस दौरान अच्छे विकल्प हो सकते हैं।

इन खाद्य पदार्थों से शरीर को ऊर्जा और कुछ जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं।

यदि गले में दर्द या खराश है, तो नरम भोजन खाना अधिक आरामदायक हो सकता है।

बहुत ज्यादा मसालेदार भोजन के बजाय हल्का और कम मसाले वाला खाना चुनना बेहतर रहेगा।

भूख कम होने पर एक बार में अधिक भोजन करने की जरूरत नहीं है। अपनी सहनशीलता के अनुसार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में भोजन किया जा सकता है।

इससे नियमित रूप से पोषण लेना आसान हो सकता है।

संतरा, अमरूद और पपीता जैसे फल डाइट में करें शामिल, विटामिन और पोषक तत्व मिलेंगे

फ्लू के दौरान शरीर को पर्याप्त पोषण देने के लिए फल और सब्जियों को भी डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है।

संतरा, अमरूद, पपीता और अन्य मौसमी फल विटामिन तथा दूसरे जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराते हैं।

इनके साथ पकी हुई सब्जियां भी भोजन में शामिल की जा सकती हैं।

हालांकि, गले में खराश होने पर कुछ लोगों को बहुत खट्टे फल खाने से जलन या परेशानी बढ़ सकती है।

ऐसी स्थिति में उन फलों से बचना बेहतर है, जिनसे गले में असहजता महसूस होती है।

फल और सब्जियां शरीर को पोषण देने में मदद करते हैं, लेकिन केवल इन्हें खाने से फ्लू तुरंत ठीक होने का दावा सही नहीं है।

इसलिए संतुलित भोजन और पर्याप्त आराम को प्राथमिकता देना जरूरी है।

बुखार और पसीने से हो सकती है पानी की कमी, फ्लू में पर्याप्त तरल पदार्थ लेना जरूरी

सीजनल फ्लू के दौरान पर्याप्त पानी पीना सबसे जरूरी खानपान संबंधी सावधानियों में शामिल है।

बुखार और पसीने के कारण शरीर से पानी की कमी हो सकती है।

ऐसे में दिनभर नियमित अंतराल पर पानी पीना उपयोगी है।

पानी के अलावा सूप और अन्य उपयुक्त तरल पदार्थ भी लिए जा सकते हैं।

यदि व्यक्ति को उल्टी या दस्त की समस्या हो रही है, तो शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी का खतरा बढ़ सकता है।

ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह से ORS लिया जा सकता है।

यदि पानी भी नहीं रुक रहा, पेशाब बहुत कम हो रहा है या चक्कर और अत्यधिक कमजोरी महसूस हो रही है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

पर्याप्त तरल पदार्थ लेने का उद्देश्य शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाना है।

फ्लू में प्रोटीन क्यों जरूरी? दाल, अंडे, दूध और पनीर को डाइट में दे सकते हैं जगह

बीमारी के दौरान शरीर को ऊर्जा के साथ प्रोटीन की भी जरूरत होती है।

ऐसे में दाल, अंडे, दूध, दही, पनीर और अन्य प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ अपनी पसंद और सहनशीलता के अनुसार खाए जा सकते हैं।

ये खाद्य पदार्थ शरीर को जरूरी पोषण उपलब्ध कराते हैं।

हालांकि, फ्लू के दौरान भूख कम होने पर नियमित मात्रा में भोजन करना मुश्किल हो सकता है।

ऐसी स्थिति में एक बार में अधिक खाने के बजाय थोड़ी-थोड़ी मात्रा में कई बार भोजन करना उपयोगी हो सकता है।

इससे शरीर को दिनभर कुछ न कुछ पोषण मिलता रहता है।

यदि किसी खाद्य पदार्थ को खाने से पेट में परेशानी होती है, तो उसे जबरदस्ती खाने की जरूरत नहीं है।

सीजनल फ्लू में किन चीजों से परहेज करें? बहुत तला-भुना खाना बढ़ा सकता है परेशानी

फ्लू के दौरान कुछ खाद्य पदार्थ असहजता बढ़ा सकते हैं।

विशेष रूप से जिन लोगों को मतली या पेट में परेशानी हो रही है, उन्हें बहुत तला-भुना और तैलीय भोजन कम करना चाहिए।

इस तरह के भोजन से कुछ लोगों को पेट में भारीपन या असुविधा महसूस हो सकती है।

बीमारी के दौरान हल्का और अपनी सहनशीलता के अनुसार भोजन चुनना बेहतर रहता है।

हालांकि, हर व्यक्ति को सभी तैलीय खाद्य पदार्थों से पूरी तरह परहेज करने की जरूरत नहीं होती। यह इस बात पर निर्भर करता है कि उन्हें खाने के बाद कैसी परेशानी महसूस हो रही है।

ज्यादा मसालेदार खाना गले की खराश बढ़ाए तो उससे बचें

सीजनल फ्लू के दौरान गले में दर्द या खराश होना आम लक्षणों में शामिल है।

ऐसे में बहुत मसालेदार भोजन कुछ लोगों के गले में जलन बढ़ा सकता है।

यदि मसालेदार भोजन खाने से गले या पेट में परेशानी बढ़ रही है, तो उससे बचना बेहतर है।

इस दौरान नरम और कम मसाले वाला भोजन अधिक आरामदायक हो सकता है।

खिचड़ी, दलिया और हल्का दाल-चावल ऐसे विकल्प हैं, जिन्हें गले में परेशानी होने पर आसानी से खाया जा सकता है।

खानपान का चुनाव करते समय शरीर की सहनशीलता का ध्यान रखना जरूरी है।

फ्लू में शराब से क्यों बचना चाहिए? पानी और पौष्टिक तरल पदार्थों को दें प्राथमिकता

बीमारी के दौरान शराब से परहेज करना बेहतर है।

फ्लू में शरीर को पर्याप्त आराम और तरल पदार्थों की जरूरत होती है।

ऐसे समय में पानी, सूप और दूसरे उपयुक्त पेय पदार्थों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

शराब बीमारी के दौरान स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ा सकती है और कुछ दवाओं के साथ भी समस्या पैदा कर सकती है।

इसलिए फ्लू से उबरने के दौरान शराब से बचना समझदारी है।

बहुत मीठे पेय पदार्थों की जगह पानी और सूप को दें महत्व

सीजनल फ्लू के दौरान तरल पदार्थ लेना जरूरी है, लेकिन हर तरह का पेय समान रूप से उपयोगी नहीं होता।

बहुत मीठे पेय पदार्थों की जगह पानी और पौष्टिक तरल पदार्थों को प्राथमिकता देना बेहतर है।

नियमित रूप से पानी पीने से शरीर में तरल पदार्थों की कमी से बचने में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा सूप भी उपयोगी विकल्प हो सकता है।

यदि भूख कम लग रही है, तो ऐसे तरल पदार्थ चुनना बेहतर है, जो कुछ पोषण भी उपलब्ध कराएं।

बिना डॉक्टर की सलाह एंटीबायोटिक न लें, फ्लू वायरस के कारण होता है

सीजनल फ्लू से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बात यह है कि यह इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होता है।

इसलिए सामान्य फ्लू के इलाज के लिए एंटीबायोटिक दवाएं प्रभावी नहीं होतीं।

एंटीबायोटिक दवाएं बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमणों के इलाज में इस्तेमाल की जाती हैं।

फ्लू होने पर बिना डॉक्टर की सलाह एंटीबायोटिक लेना उचित नहीं है।

यदि किसी मरीज में फ्लू के साथ बैक्टीरियल संक्रमण भी हो, तो डॉक्टर जांच के आधार पर अलग उपचार निर्धारित कर सकते हैं।

फ्लू के कुछ मरीजों में चिकित्सक एंटीवायरल दवाएं भी दे सकते हैं, विशेष रूप से गंभीर बीमारी या जटिलताओं के अधिक जोखिम की स्थिति में। इन दवाओं का लाभ आमतौर पर शुरुआती उपचार से अधिक हो सकता है।

इसलिए दवाओं का चुनाव खुद करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

सीजनल फ्लू में आराम भी जरूरी, केवल खानपान से तुरंत ठीक नहीं होती बीमारी

फ्लू के दौरान केवल भोजन बदलना पर्याप्त नहीं है।

शरीर को बीमारी से उबरने के लिए पर्याप्त आराम, नियमित तरल पदार्थ और पोषण की जरूरत होती है।

यदि भूख कम है, तो हल्का भोजन और छोटी मात्रा में कई बार खाना उपयोगी हो सकता है।

गले में खराश होने पर गुनगुना पानी या सूप राहत दे सकता है।

बुखार और पसीने के दौरान पानी की कमी से बचना जरूरी है।

साथ ही यह समझना चाहिए कि कोई विशेष फल, सूप या घरेलू नुस्खा फ्लू को तुरंत ठीक नहीं करता।

यदि सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, भ्रम, गंभीर कमजोरी या लगातार बिगड़ते लक्षण हों, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर पुरानी बीमारियों वाले लोगों में फ्लू की जटिलताओं का खतरा अधिक हो सकता है।

सीजनल फ्लू में क्या खाएं और क्या न खाएं? एक नजर में समझें पूरी डाइट

क्या खाएं या पिएं

क्या फायदा हो सकता है

चिकन या वेजिटेबल सूप

तरल पदार्थ और कुछ पोषण उपलब्ध कराता है

गुनगुना पानी

गले को आराम और हाइड्रेशन में मदद

मूंग दाल की खिचड़ी

ऊर्जा और जरूरी पोषक तत्व

दलिया और दाल-चावल

हल्का और आसानी से खाया जाने वाला भोजन

संतरा, अमरूद, पपीता

विटामिन और अन्य पोषक तत्व

पकी हुई सब्जियां

संतुलित भोजन में पोषण बढ़ाने का विकल्प

दाल, अंडे, दूध, दही, पनीर

प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व

जरूरत पड़ने पर ORS

उल्टी या दस्त में पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी पूरी करने में मदद

किन चीजों से बचें

कारण

बहुत तला-भुना भोजन

मतली या पेट की परेशानी बढ़ सकती है

बहुत मसालेदार भोजन

गले की जलन या पेट की असहजता बढ़ सकती है

शराब

बीमारी और दवाओं के दौरान नुकसानदायक हो सकती है

बहुत मीठे पेय

पानी और पौष्टिक तरल पदार्थ बेहतर विकल्प हैं

बिना सलाह एंटीबायोटिक

सामान्य वायरल फ्लू का इलाज नहीं

निष्कर्ष: सीजनल फ्लू के दौरान हल्का और पौष्टिक भोजन, पर्याप्त पानी तथा आराम शरीर को रिकवरी में मदद कर सकते हैं। सूप, खिचड़ी, दाल, फल, सब्जियां और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ अपनी सहनशीलता के अनुसार लें। बहुत तला-भुना, मसालेदार भोजन और शराब से बचें। लक्षण गंभीर हों या लगातार बढ़ रहे हों, तो डॉक्टर से सलाह लें।