1,900 पेड़ों को बचाने की तैयारी! जीरकपुर-पंचकूला बाईपास की लागत ₹65 करोड़ बढ़ेगी

जीरकपुर-पंचकूला बाईपास में 1,900 से अधिक पेड़ बचाने की तैयारी। पिलर घग्गर की ओर शिफ्ट करने से ₹65 करोड़ लागत बढ़ने का अनुमान।

1,900 पेड़ों को बचाने की तैयारी! जीरकपुर-पंचकूला बाईपास की लागत ₹65 करोड़ बढ़ेगी

जीरकपुर-पंचकूला के 19 किमी ग्रीनफील्ड बाईपास का री-सर्वे, 1,900 से अधिक पेड़ बचाने की तैयारी

➤ एलिवेटेड हाईवे के पिलर घग्गर नदी की ओर 20 से 40 मीटर शिफ्ट करने का प्रस्ताव, ₹65 करोड़ बढ़ेगी लागत

➤ 28 अक्टूबर को हाईकोर्ट में पेश होंगे बैठक के मिनट्स, 250 किमी दूर पौधरोपण पर याचिकाकर्ता ने जताई आपत्ति

जीरकपुर-पंचकूला के 19 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड बाईपास प्रोजेक्ट को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद अब 1,900 से अधिक पेड़ों को कटने से बचाने की संभावना बनी है। हाईकोर्ट के आदेश पर परियोजना का दोबारा सर्वे कराया जा रहा है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच हुई बैठक में नया प्रस्ताव सामने आया है। इसके अनुसार, एलिवेटेड हाईवे के पिलर घग्गर नदी की ओर 20 से 40 मीटर शिफ्ट कर दिए जाएं तो पीर मुछल्ला क्षेत्र का लगभग पूरा जंगल सुरक्षित रखा जा सकता है। हालांकि, इस बदलाव से परियोजना की लागत में करीब ₹65 करोड़ की बढ़ोतरी होगी और निर्माण कार्य पूरा होने में भी अधिक समय लगेगा।

परियोजना का मूल बजट करीब ₹1,800 करोड़ बताया गया है। नए अलाइनमेंट के कारण निर्माण लागत बढ़ने का अनुमान है। दूसरी ओर, 17 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ₹1,878 करोड़ की इस परियोजना का शिलान्यास प्रस्तावित था, लेकिन अंतिम समय पर कार्यक्रम टाल दिया गया था। अब पेड़ों की कटाई रोकने और वैकल्पिक अलाइनमेंट पर विचार के बीच परियोजना की अगली दिशा तय होनी है। NHAI अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों और याचिकाकर्ताओं के वकीलों की बैठक के मिनट्स 28 अक्टूबर को हाईकोर्ट में पेश किए जाएंगे।

हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद बाईपास का दोबारा सर्वे, पेड़ों को बचाने का विकल्प तलाशा

जीरकपुर-पंचकूला ग्रीनफील्ड बाईपास के निर्माण के लिए प्रस्तावित पेड़ों की कटाई को लेकर मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में पहुंचा था।

अदालत के कड़े रुख के बाद अब परियोजना के अलाइनमेंट पर दोबारा विचार किया जा रहा है।

हाईकोर्ट के आदेश पर री-सर्वे की प्रक्रिया शुरू की गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सड़क निर्माण के दौरान अधिक से अधिक पेड़ों को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है।

इसी प्रक्रिया के तहत NHAI अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों और याचिकाकर्ताओं के वकीलों के बीच बैठक हुई।

बैठक में एलिवेटेड हाईवे के पिलर की स्थिति में बदलाव का विकल्प सामने आया।

विशेषज्ञों के अनुसार, पिलर को घग्गर नदी की तरफ स्थानांतरित करने से पीर मुछल्ला क्षेत्र में बड़ी संख्या में पेड़ों को कटने से बचाया जा सकता है।

हालांकि, इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय से पहले अदालत के समक्ष संबंधित जानकारी रखी जानी है।

घग्गर नदी की ओर 20 से 40 मीटर शिफ्ट हो सकते हैं पिलर, पीर मुछल्ला का जंगल बचाने की कोशिश

नए प्रस्ताव के अनुसार, एलिवेटेड हाईवे के पिलर को मौजूदा प्रस्तावित स्थान से 20 से 40 मीटर घग्गर नदी की ओर शिफ्ट किया जा सकता है।

इस बदलाव से सड़क का अलाइनमेंट कुछ हद तक बदल जाएगा।

तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा करने से पीर मुछल्ला क्षेत्र का लगभग पूरा जंगल सुरक्षित रहने की संभावना है।

पहले के प्रस्तावित अलाइनमेंट के कारण बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की आशंका थी।

अब री-सर्वे में यह विकल्प सामने आया है कि हाईवे के निर्माण के साथ पर्यावरणीय नुकसान को कम किया जा सकता है।

हालांकि, पिलर शिफ्ट करने के प्रस्ताव को अभी अंतिम मंजूरी मिलने की जानकारी सामने नहीं आई है।

अदालत के सामने बैठक की रिपोर्ट पेश होने के बाद इस दिशा में आगे की प्रक्रिया स्पष्ट होगी।

अलाइनमेंट में बदलाव से 1,900 से ज्यादा पेड़ कटने से बचेंगे, लेकिन बढ़ेगी निर्माण लागत

री-सर्वे और तकनीकी चर्चा के दौरान सामने आया कि एलिवेटेड हाईवे के अलाइनमेंट में बदलाव से 1,900 से अधिक पेड़ों को बचाया जा सकता है।

यह संख्या परियोजना से प्रभावित होने वाले पेड़ों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

विशेषज्ञों के प्रस्ताव के अनुसार, पिलर घग्गर नदी की ओर शिफ्ट करने से पीर मुछल्ला के जंगल पर निर्माण का असर कम हो सकता है।

लेकिन इस बदलाव के साथ आर्थिक और तकनीकी चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं।

नए अलाइनमेंट को अपनाने पर परियोजना की लागत में करीब ₹65 करोड़ का अतिरिक्त खर्च आने का अनुमान है।

इसके अलावा निर्माण अवधि भी बढ़ सकती है।

इसलिए अब परियोजना के सामने दो महत्वपूर्ण पहलू हैं। एक ओर सड़क निर्माण की जरूरत है, जबकि दूसरी ओर बड़ी संख्या में पेड़ों और स्थानीय पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखने का सवाल है।

₹1,800 करोड़ की मूल परियोजना पर ₹65 करोड़ अतिरिक्त खर्च का अनुमान

जीरकपुर-पंचकूला ग्रीनफील्ड बाईपास की मूल लागत करीब ₹1,800 करोड़ बताई गई है।

तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, प्रस्तावित री-अलाइनमेंट के कारण इसमें करीब ₹65 करोड़ का इजाफा हो सकता है।

इस अनुमान के आधार पर मूल लागत में प्रस्तावित बढ़ोतरी जोड़ने पर खर्च करीब ₹1,865 करोड़ बैठता है।

हालांकि, परियोजना के शिलान्यास से संबंधित विवरण में इसकी लागत ₹1,878 करोड़ बताई गई थी।

ये दोनों आंकड़े उपलब्ध जानकारी में अलग-अलग संदर्भों में दिए गए हैं। परियोजना की अंतिम संशोधित लागत को लेकर कोई नया आधिकारिक आंकड़ा नहीं बताया गया है।

अलाइनमेंट में बदलाव से निर्माण कार्य की समयसीमा भी प्रभावित होने की संभावना है।

250 किलोमीटर दूर फिरोजपुर में पौधे लगाने पर आपत्ति, याचिकाकर्ता ने उठाया स्थानीय पर्यावरण का मुद्दा

इस मामले में पेड़ों की कटाई के बदले किए जाने वाले पौधरोपण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

याचिकाकर्ता के वकील करन गाबा ने पंजाब के फिरोजपुर में प्रस्तावित क्षतिपूरक वनीकरण का विरोध किया है।

उनका तर्क है कि निर्माण स्थल से करीब 250 किलोमीटर दूर पौधे लगाने से स्थानीय स्तर पर होने वाले पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई नहीं हो सकती।

करन गाबा के अनुसार, पेड़ों की कटाई से केवल हरियाली कम होने का मामला नहीं है, बल्कि इससे स्थानीय पारिस्थितिकी और वन्यजीव भी प्रभावित हो सकते हैं।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दूर किसी दूसरे स्थान पर पौधे लगाने से पीर मुछल्ला क्षेत्र के जंगल और वहां के पर्यावरण को होने वाले नुकसान की वास्तविक भरपाई नहीं होगी।

इसी कारण याचिकाकर्ता की ओर से पेड़ों को उनके मौजूदा स्थान पर बचाने के विकल्प को महत्व दिया जा रहा है।

जीरकपुर-अंबाला हाईवे को NH-5 से जोड़ेगा छह लेन बाईपास, ट्रैफिक जाम से राहत की उम्मीद

19 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड बाईपास क्षेत्र की यातायात व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है।

यह 6-लेन बाईपास जीरकपुर-अंबाला हाईवे NH-7 पर स्थित छत लाइट पॉइंट को NH-5 पर पुराने पंचकूला लाइट पॉइंट से जोड़ेगा।

इस मार्ग के बनने से जीरकपुर में लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम से राहत मिलने की उम्मीद है।

विशेष रूप से शिमला, सोलन और पंचकूला की ओर जाने वाले वाहनों को इसका लाभ मिल सकता है।

अभी इन दिशाओं में जाने वाले वाहनों को जीरकपुर के व्यस्त यातायात से होकर गुजरना पड़ता है।

प्रस्तावित बाईपास बनने के बाद वाहनों के लिए एक वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा।

इससे जीरकपुर के मुख्य यातायात मार्गों पर वाहनों का दबाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।

शिमला, सोलन और पंचकूला जाने वाले वाहनों को मिलेगा नया रास्ता

ग्रीनफील्ड बाईपास का मुख्य उद्देश्य जीरकपुर के ट्रैफिक दबाव को कम करना है।

यह परियोजना NH-7 और NH-5 के बीच संपर्क उपलब्ध कराएगी।

इसके बनने से शिमला, सोलन और पंचकूला जाने वाले वाहनों को जीरकपुर के भीड़भाड़ वाले मार्गों से राहत मिलने की संभावना है।

बाईपास के जरिए वाहनों को वैकल्पिक रास्ता मिलेगा, जिससे मुख्य मार्ग पर लगने वाले जाम की समस्या कम हो सकती है।

हालांकि, परियोजना के निर्माण से पहले पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों का समाधान भी जरूरी हो गया है।

इसी वजह से हाईकोर्ट के निर्देश पर सड़क के अलाइनमेंट की दोबारा समीक्षा की जा रही है।

1 अप्रैल को हाईकोर्ट ने हरियाणा में पेड़ काटने पर लगाई थी रोक

इस परियोजना से जुड़ा पर्यावरण संरक्षण का मामला पहले भी हाईकोर्ट के सामने आया था।

1 अप्रैल को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा में पेड़ों की कटाई को लेकर महत्वपूर्ण आदेश दिया था।

अदालत ने कोर्ट की अनुमति के बिना किसी भी उम्र या प्रजाति के पेड़ काटने पर रोक लगा दी थी।

इस आदेश के दायरे में जीरकपुर-पंचकूला बाईपास के लिए प्रस्तावित पेड़ भी शामिल थे।

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद परियोजना के निर्माण के दौरान पेड़ों की कटाई का मामला और महत्वपूर्ण हो गया।

अब अदालत के निर्देश पर री-सर्वे के जरिए ऐसे विकल्प तलाशे जा रहे हैं, जिनसे निर्माण कार्य के साथ पेड़ों को भी सुरक्षित रखा जा सके।

17 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी के हाथों होना था शिलान्यास, अंतिम समय पर टला कार्यक्रम

जीरकपुर-पंचकूला ग्रीनफील्ड बाईपास का शिलान्यास 17 जुलाई को प्रस्तावित था।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ₹1,878 करोड़ की इस परियोजना का नींव पत्थर रखा जाना था।

हालांकि, अंतिम समय पर शिलान्यास कार्यक्रम टाल दिया गया था।

इससे पहले 1 अप्रैल को हाईकोर्ट ने पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने का आदेश दिया था।

अब परियोजना के अलाइनमेंट में बदलाव की संभावना पर विचार किया जा रहा है।

नए प्रस्ताव के अनुसार, पिलर को घग्गर नदी की ओर स्थानांतरित करने से 1,900 से अधिक पेड़ों को बचाया जा सकता है।

लेकिन इससे निर्माण लागत और अवधि दोनों बढ़ने का अनुमान है।

28 अक्टूबर को हाईकोर्ट में पेश होंगे बैठक के मिनट्स, आगे की प्रक्रिया पर रहेगी नजर

NHAI अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों और याचिकाकर्ताओं के वकीलों के बीच हुई बैठक के मिनट्स 28 अक्टूबर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में पेश किए जाएंगे।

इनमें परियोजना के री-सर्वे और पिलर शिफ्ट करने के प्रस्ताव से जुड़ी जानकारी शामिल होगी।

नए विकल्प के अनुसार, पिलर को घग्गर नदी की ओर 20 से 40 मीटर शिफ्ट करने से पीर मुछल्ला का लगभग पूरा जंगल सुरक्षित रह सकता है।

इससे 1,900 से अधिक पेड़ कटने से बचने की संभावना है।

हालांकि, इसके लिए परियोजना पर करीब ₹65 करोड़ का अतिरिक्त खर्च आने और निर्माण अवधि बढ़ने का अनुमान है।

अब अदालत के सामने सड़क निर्माण, अतिरिक्त लागत और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े पहलुओं पर जानकारी रखी जाएगी।

फिलहाल री-अलाइनमेंट का प्रस्ताव विचाराधीन है और आगे की प्रक्रिया हाईकोर्ट में पेश होने वाली रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी।