डेंगू में नारियल पानी कितना फायदेमंद? प्लेटलेट्स बढ़ाने के दावे की जानें सच्चाई

डेंगू में नारियल पानी और फलों का जूस कितना फायदेमंद है? जानें प्लेटलेट्स पर इनका असर, डायबिटीज में सावधानी और गंभीर लक्षणों में कब अस्पताल जाना चाहिए।

डेंगू में नारियल पानी कितना फायदेमंद? प्लेटलेट्स बढ़ाने के दावे की जानें सच्चाई

➤ डेंगू में नारियल पानी और ताजा जूस शरीर में तरल पदार्थों की कमी दूर करने में कर सकते हैं मदद

➤ नारियल पानी पीने से प्लेटलेट्स बढ़ने का ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं, इसे डेंगू का इलाज समझने की न करें भूल

➤ पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी या खून आने जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल जाएं

डेंगू होने पर तेज बुखार, कमजोरी और शरीर में पानी की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में मरीज को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ देना जरूरी होता है। यही वजह है कि डेंगू के दौरान अक्सर नारियल पानी और फलों का जूस पीने की सलाह दी जाती है। ये पेय शरीर को तरल पदार्थ और कुछ पोषक तत्व उपलब्ध करा सकते हैं। हालांकि, एक सवाल अक्सर लोगों के मन में रहता है कि क्या नारियल पानी पीने से डेंगू में कम हुए प्लेटलेट्स भी बढ़ सकते हैं?

नारियल पानी और फलों का जूस शरीर में पानी की कमी दूर करने में मददगार हो सकते हैं, लेकिन इन्हें डेंगू का इलाज या प्लेटलेट्स बढ़ाने का प्रमाणित उपाय नहीं मानना चाहिए। डेंगू के मरीज की स्थिति पर नजर रखना, डॉक्टर की सलाह का पालन करना और पर्याप्त आराम करना बेहद जरूरी है।

डेंगू में नारियल पानी पीना कितना फायदेमंद?

डेंगू के दौरान बुखार और कम तरल पदार्थ लेने के कारण शरीर में पानी की कमी होने का खतरा रहता है। ऐसे में नारियल पानी शरीर को तरल पदार्थ के साथ पोटैशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स भी उपलब्ध कराता है। इस कारण इसे डेंगू के मरीज के लिए उपयोगी पेय माना जाता है।

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि गंभीर डिहाइड्रेशन की स्थिति में केवल नारियल पानी पर्याप्त नहीं होता। मरीज को उसकी स्थिति के अनुसार उचित तरल पदार्थ और चिकित्सकीय देखभाल की जरूरत हो सकती है।

नारियल पानी को लेकर एक आम धारणा यह भी है कि इसे पीने से डेंगू में घटने वाले प्लेटलेट्स तेजी से बढ़ते हैं। लेकिन ऐसा साबित करने वाला मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है कि नारियल पानी सीधे प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाता है।

डेंगू में प्लेटलेट्स कम होने की मुख्य वजह वायरस का संक्रमण होता है। संक्रमण से उबरने के साथ ही बोन मैरो यानी अस्थि मज्जा प्राकृतिक रूप से प्लेटलेट्स का निर्माण फिर से शुरू कर देता है। इसलिए प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए केवल नारियल पानी पर निर्भर रहना सही नहीं है।

डेंगू में फलों का जूस देना सही है या नहीं?

डेंगू के मरीज को साफ-सफाई से तैयार किया गया ताजा फलों का जूस सीमित मात्रा में दिया जा सकता है। संतरे और मौसमी का जूस शरीर को तरल पदार्थ और कुछ पोषक तत्व उपलब्ध कराता है। हालांकि, जूस के बजाय साबुत फल खाने से फाइबर भी मिलता है, इसलिए जहां संभव हो, मरीज की स्थिति और सहनशीलता के अनुसार साबुत फलों को प्राथमिकता दी जा सकती है।

जूस तैयार करते समय साफ पानी और स्वच्छ बर्तनों का इस्तेमाल करना जरूरी है। दूषित पानी या अस्वच्छ तरीके से तैयार पेय संक्रमण का खतरा बढ़ा सकते हैं। मरीज को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ देना जरूरी है, लेकिन उसकी जरूरत उम्र, बीमारी की गंभीरता और शरीर में पानी की कमी के स्तर पर निर्भर करती है।

डायबिटीज के मरीजों को फलों का जूस पीते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। जूस में प्राकृतिक शुगर की मात्रा अधिक हो सकती है, जिससे ब्लड शुगर का स्तर बढ़ सकता है। इसलिए जूस की मात्रा का ध्यान रखें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही इसका सेवन करें। पैक्ड जूस से बचना बेहतर है, क्योंकि उसमें अतिरिक्त शुगर भी हो सकती है।

डेंगू में इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

डेंगू में केवल बुखार और प्लेटलेट्स की संख्या पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। मरीज की पूरी स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। खास बात यह है कि बुखार उतरने के बाद भी खतरा बना रह सकता है। इसलिए मरीज की हालत में किसी भी तरह का गंभीर बदलाव होने पर लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

निम्न लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अस्पताल जाएं:

  • पेट में तेज दर्द होना

  • लगातार उल्टी होना

  • नाक या मसूड़ों से खून आना

  • काला मल आना

  • अत्यधिक सुस्ती या बेचैनी होना

  • सांस लेने में परेशानी होना

डेंगू में बुखार के लिए पैरासिटामोल डॉक्टर की सलाह से ली जा सकती है। एस्पिरिन और आइबुप्रोफेन जैसी दवाओं से बचना चाहिए, क्योंकि इनसे रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है।

नारियल पानी डेंगू का इलाज नहीं, डॉक्टर की सलाह जरूरी

डेंगू एक वायरल संक्रमण है, इसलिए इसके लक्षणों और मरीज की स्थिति पर लगातार ध्यान देना जरूरी है। नारियल पानी शरीर में तरल पदार्थों की कमी दूर करने में मदद कर सकता है, लेकिन यह डेंगू का इलाज नहीं है और न ही प्लेटलेट्स बढ़ाने का प्रमाणित विकल्प है।

मरीज को पर्याप्त आराम, उचित मात्रा में तरल पदार्थ और डॉक्टर की सलाह के अनुसार देखभाल की जरूरत होती है। गंभीर लक्षण दिखाई देने पर घरेलू उपायों के भरोसे रहने के बजाय तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।