स्मार्टवॉच से हार्टबीट नापना कितना सही? खरीदने से पहले जान लें, कब रीडिंग दे सकती है धोखा

स्मार्टवॉच से हार्ट रेट कितनी सही मापी जाती है, जानें PPG तकनीक, एक्सरसाइज, पसीने, कलाई की हलचल और घड़ी पहनने के तरीके का रीडिंग पर असर।

स्मार्टवॉच से हार्टबीट नापना कितना सही? खरीदने से पहले जान लें, कब रीडिंग दे सकती है धोखा

➤ स्मार्टवॉच हार्ट रेट की निगरानी में उपयोगी, लेकिन डॉक्टर की जांच का विकल्प नहीं

➤ एक्सरसाइज, पसीना और कलाई की हलचल से रीडिंग में आ सकता है अंतर

➤ सही रीडिंग के लिए घड़ी का त्वचा से उचित संपर्क होना जरूरी


आजकल अपने दिल की धड़कन पर नजर रखने के लिए बड़ी संख्या में लोग कलाई में स्मार्टवॉच पहनते हैं। ये घड़ियां कुछ ही सेकंड में स्क्रीन पर हार्ट रेट यानी प्रति मिनट दिल की धड़कन की जानकारी दिखा देती हैं। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि स्मार्टवॉच पर दिखाई देने वाली हार्ट रेट की संख्या आखिर कितनी सही होती है। अगर घड़ी पर 80 बीट प्रति मिनट दिखाई दे रहा है, तो क्या वास्तव में दिल भी उसी गति से धड़क रहा होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, स्मार्टवॉच हार्ट रेट की निगरानी के लिए उपयोगी हो सकती है, लेकिन इसकी रीडिंग कई परिस्थितियों से प्रभावित हो सकती है। घड़ी कलाई पर सही तरीके से पहनी गई है या नहीं, व्यक्ति आराम की स्थिति में है या व्यायाम कर रहा है, सेंसर का त्वचा से संपर्क कैसा है और डिवाइस की तकनीक कितनी बेहतर है, इन सभी बातों का असर रीडिंग पर पड़ सकता है। इसलिए स्मार्टवॉच को फिटनेस मॉनिटर के तौर पर देखना चाहिए, न कि डॉक्टर की जांच के विकल्प के रूप में।

स्मार्टवॉच हार्टबीट कैसे मापती है?

ज्यादातर स्मार्टवॉच प्रकाश आधारित सेंसर यानी PPG तकनीक का इस्तेमाल करती हैं। घड़ी में लगा सेंसर त्वचा पर रोशनी डालता है और रक्त के प्रवाह में होने वाले बदलावों को पहचानता है। इन बदलावों का विश्लेषण करके घड़ी दिल की धड़कन यानी प्रति मिनट होने वाली धड़कनों का अनुमान लगाती है।

यही वजह है कि स्मार्टवॉच की हार्ट रेट रीडिंग सीधे दिल के इलेक्ट्रिकल सिग्नल को मापने पर आधारित नहीं होती। यह रक्त प्रवाह में होने वाले बदलावों के आधार पर हार्ट रेट का अनुमान लगाती है। इसलिए घड़ी पर दिखाई देने वाली संख्या को उसकी तकनीक और इस्तेमाल की परिस्थितियों के संदर्भ में समझना जरूरी है।

आराम की स्थिति में कितनी सही हो सकती है रीडिंग?

जब व्यक्ति आराम की स्थिति में बैठा या लेटा होता है और स्मार्टवॉच कलाई पर ठीक तरह से लगी होती है, तब हार्ट रेट की रीडिंग आम तौर पर ज्यादा स्थिर हो सकती है। हालांकि, अलग-अलग डिवाइस और परिस्थितियों में इसकी सटीकता अलग हो सकती है।

इसलिए कभी-कभार एक-दो बीट का अंतर देखकर घबराने के बजाय लगातार दिखाई देने वाले पैटर्न पर ध्यान देना ज्यादा उपयोगी हो सकता है। एक अकेली रीडिंग के बजाय समय के साथ मिलने वाले आंकड़ों को समझना हार्ट रेट की निगरानी में अधिक उपयोगी हो सकता है।

एक्सरसाइज के दौरान क्यों बदल सकती है सटीकता?

वर्कआउट के दौरान शरीर और कलाई में लगातार हलचल होती रहती है। इसके अलावा पसीना आने और घड़ी की स्थिति में थोड़ा बदलाव होने से सेंसर के लिए रक्त प्रवाह से संबंधित संकेतों को पहचानना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

खासकर तेज और अनियमित गतिविधियों के दौरान स्मार्टवॉच से मिलने वाली रीडिंग और वास्तविक हार्ट रेट के बीच अंतर हो सकता है। ऐसे में एक्सरसाइज के दौरान दिखाई देने वाले आंकड़ों को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि गतिविधि और कलाई की हलचल सेंसर की रीडिंग को प्रभावित कर सकती है।

घड़ी पहनने का तरीका भी है महत्वपूर्ण

स्मार्टवॉच की रीडिंग में घड़ी पहनने का तरीका भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर घड़ी कलाई पर बहुत ढीली है तो सेंसर और त्वचा के बीच उचित संपर्क नहीं बन पाएगा। दूसरी ओर, इसे बहुत ज्यादा कसकर पहनने पर असुविधा हो सकती है।

हार्ट रेट की निगरानी करते समय सेंसर का त्वचा से उचित संपर्क होना जरूरी है, ताकि डिवाइस बेहतर रीडिंग देने की कोशिश कर सके। इसलिए स्मार्टवॉच को इस्तेमाल करते समय निर्माता के निर्देशों के अनुसार पहनना महत्वपूर्ण है।

कुल मिलाकर, स्मार्टवॉच रोजमर्रा की हार्ट रेट मॉनिटरिंग और फिटनेस पर नजर रखने में उपयोगी उपकरण हो सकती है, लेकिन इसकी रीडिंग को अंतिम चिकित्सकीय निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। रीडिंग पर व्यक्ति की गतिविधि, पसीना, कलाई की हलचल और घड़ी के त्वचा से संपर्क जैसी परिस्थितियों का असर पड़ सकता है।