‘थारा फूफा है जिंदा’ के नायक दादा दुलीचंद का निधन, 102 की उम्र में पेंशन के लिए दूल्हा बनकर निकाली थी बारात
‘थारा फूफा है जिंदा’ अभियान के चर्चित दादा दुलीचंद का 106 साल की उम्र में निधन हुआ। 2022 में पेंशन के विरोध में वे दूल्हा बने थे।
➤ 106 साल के दादा दुलीचंद का निधन, पैतृक गांव गांधरा में हुआ अंतिम संस्कार
➤ 2022 में बुढ़ापा पेंशन कटने के विरोध में दूल्हा बनकर निकली थी उनकी बारात
➤ खुद दुलीचंद की भी काट दी गई थी पेंशन, प्रदर्शन के बाद दोबारा शुरू हुई थी
रोहतक। हरियाणा में बुढ़ापा पेंशन को लेकर चले चर्चित ‘थारा फूफा है जिंदा’ अभियान के जरिए अपनी अलग पहचान बनाने वाले 106 वर्षीय दादा दुलीचंद का निधन हो गया। चार साल पहले वर्ष 2022 में जब जीवित बुजुर्गों की पेंशन काटे जाने के विरोध में अनोखा प्रदर्शन किया गया था, तब 102 साल के दुलीचंद को दूल्हे के रूप में सजाकर बारात निकाली गई थी। उनकी अपनी पेंशन भी उस दौरान काट दी गई थी, जिसे प्रदर्शन के बाद दोबारा शुरू कर दिया गया था। रविवार को उनके पैतृक गांव गांधरा में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
दादा दुलीचंद सांपला खंड के सबसे अधिक उम्र वाले बुजुर्गों में शामिल थे। उनके निधन की खबर के बाद परिवार और गांव में शोक का माहौल है। वर्ष 2022 में उनका नाम उस समय पूरे प्रदेश में चर्चा में आया था, जब बुढ़ापा पेंशन में गड़बड़ी के खिलाफ चलाए गए अभियान में उन्हें दूल्हा बनाकर बाकायदा बारात निकाली गई थी।
पेंशन कटने के विरोध में बने थे अभियान का चेहरा
वर्ष 2022 में बुढ़ापा पेंशन की जांच के दौरान कई बुजुर्गों की पेंशन काट दी गई थी। इस कार्रवाई में ऐसे बुजुर्गों की पेंशन भी बंद होने की बात सामने आई थी, जो वास्तव में जीवित थे।
इसी मुद्दे को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता नवीन जयहिंद की ओर से अभियान चलाया गया था। अभियान के दौरान यह बताने के लिए कि संबंधित बुजुर्ग जीवित हैं, अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया गया। इसी प्रदर्शन में दादा दुलीचंद को दूल्हा बनाकर बारात निकाली गई।
उनके हाथ में बुढ़ापे की लाठी थी और प्रदर्शन का संदेश साफ था कि जिन बुजुर्गों को सरकारी रिकॉर्ड में मृत मानकर पेंशन से वंचित किया गया है, वे वास्तव में जिंदा हैं।
खुद दुलीचंद की भी बंद हो गई थी पेंशन
इस पूरे मामले से दादा दुलीचंद का जुड़ाव सिर्फ प्रदर्शन तक सीमित नहीं था। उनकी खुद की बुढ़ापा पेंशन भी काट दी गई थी। इसके बाद उन्होंने अभियान में हिस्सा लिया और प्रदर्शन का प्रमुख चेहरा बन गए।
प्रदर्शन के बाद उनकी पेंशन दोबारा शुरू कर दी गई थी। यही वजह रही कि दादा दुलीचंद की तस्वीर और उनका नाम ‘थारा फूफा है जिंदा’ अभियान के साथ लंबे समय तक लोगों की जुबान पर रहा।
70 सदस्यों का बड़ा परिवार
दादा दुलीचंद का परिवार भी काफी बड़ा था। उनके छह बेटे और चार बेटियां हैं। परिवार में करीब 70 सदस्य बताए गए हैं, जिनमें लगभग 40 पोते-पोतियां और नाती-नातिन शामिल हैं।
इतनी बड़ी उम्र तक जीवन जीने वाले दादा दुलीचंद ने अपने जीवन के अंतिम वर्षों में एक ऐसे सामाजिक मुद्दे को लेकर आवाज उठाई, जिसने सरकारी रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर को लेकर सवाल खड़े किए थे।
रविवार को पैतृक गांव में अंतिम संस्कार
दादा दुलीचंद के निधन के बाद रविवार को उनके पैतृक गांव गांधरा में अंतिम संस्कार किया गया। परिवार और ग्रामीणों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।
चार साल पहले बुढ़ापा पेंशन के मुद्दे पर दूल्हे के रूप में निकली उनकी वह बारात लोगों को लंबे समय तक याद रही। उस प्रदर्शन में उनकी तस्वीर और उनका अंदाज पूरे अभियान की पहचान बन गया था। अब उनके निधन के साथ ‘थारा फूफा है जिंदा’ अभियान के उस चर्चित चेहरे की कहानी का एक अध्याय समाप्त हो गया।
Akhil Mahajan