प्रोजेक्ट के विरोध में हिंसा, NHPC ऑफिस और पुलिस थाने में आग; BJP अध्यक्ष के घर में तोड़फोड़

अरुणाचल में 11,200 मेगावाट सियांग प्रोजेक्ट के विरोध में हिंसा हुई। NHPC कार्यालय और पुलिस थाने में आगजनी के बीच स्थानीय संगठनों ने चार मांगें रखीं।

प्रोजेक्ट के विरोध में हिंसा, NHPC ऑफिस और पुलिस थाने में आग; BJP अध्यक्ष के घर में तोड़फोड़

➤ 11,200 मेगावाट के प्रस्तावित सियांग प्रोजेक्ट के विरोध में पासीघाट और आसपास के इलाकों में हिंसा
➤ NHPC ऑफिस, पुलिस स्टेशन और कई वाहनों में आगजनी, पथराव में DSP समेत कई पुलिसकर्मी घायल
➤ स्थानीय संगठनों की चार मांगें, चीन के बांध से जुड़ी चिंताओं के बीच परियोजना के सर्वे का विरोध


ईटानगर। अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित 11,200 मेगावाट के सियांग प्रोजेक्ट को लेकर शुक्रवार रात विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। सियांग, अपर सियांग और पूर्वी सियांग जिलों में बंद के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई जगह टकराव हुआ। पासीघाट में भीड़ ने NHPC कार्यालय और पुलिस स्टेशन में आग लगा दी, जबकि कई पुलिस वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया। प्रदर्शनकारियों के पथराव में DSP समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। प्रदर्शनकारियों ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष कलिंग मोयोंग और कुछ विधायकों के घरों में भी तोड़फोड़ की।

प्रस्तावित सियांग प्रोजेक्ट को लेकर स्थानीय संगठनों और ग्रामीणों में लंबे समय से विरोध है। सियांग नदी तिब्बत से निकलती है और अरुणाचल प्रदेश में इसे सियांग, जबकि असम में यही नदी ब्रह्मपुत्र कहलाती है। भारत में प्रस्तावित यह परियोजना चीन की ओर से तिब्बत में इसी नदी पर बड़े बांध की योजना के बीच रणनीतिक और जल प्रबंधन की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

12 घंटे के बंद के दौरान बिगड़े हालात

सियांग, अपर सियांग और पूर्वी सियांग जिलों में शुक्रवार को 12 घंटे का बंद बुलाया गया था। अधिकारियों के मुताबिक, सियांग जिले में करीब 150 से 200 प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की और बैरिकेड हटाने की कोशिश की।

प्रदर्शनकारियों के पास कथित तौर पर दाओ, लाठियां और गुलेल थीं। पुलिस के अनुसार पथराव किए जाने के बाद सुरक्षाबलों ने आंसू गैस के गोले छोड़े। मेबो में रनाघाट ब्रिज के पास भी पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई।

हिंसा के दौरान कई स्थानों पर सरकारी और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा। पुलिस अब नुकसान का आकलन करने के साथ घटना में शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

पुलिस स्टेशन और NHPC कार्यालय को बनाया निशाना

पासीघाट में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस स्टेशन में तोड़फोड़ के बाद आग लगा दी। पुलिस स्टेशन के बाहर खड़े कई वाहनों को भी आग के हवाले किए जाने की बात सामने आई है।

प्रदर्शनकारियों ने NHPC कार्यालय को भी निशाना बनाया। इसके अलावा आदि समुदाय के प्रमुख संगठन आदि बाने केबांग के कार्यालय में भी तोड़फोड़ की गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

विधायक निनोंग एरिंग के मुताबिक, रात करीब 2 बजे 300 से 400 युवा उनके घर पहुंचे। उन्होंने वहां तोड़फोड़ की और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।

प्रोजेक्ट के विरोध में चार प्रमुख मांगें

बंद का आह्वान चार संगठनों ने मिलकर किया था। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में गिरफ्तार किए गए 10 कार्यकर्ताओं की रिहाई, निलंबित गांव के मुखियाओं की बहाली, परियोजना से जुड़े शुरुआती सर्वे बंद करना और इलाके में तैनात अर्धसैनिक एवं केंद्रीय सुरक्षा बलों को हटाना शामिल है।

स्थानीय संगठनों का कहना है कि परियोजना को लेकर आगे बढ़ने से पहले प्रभावित लोगों की चिंताओं और उनके अधिकारों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

चीन के बड़े बांध के बीच भारत की परियोजना

अरुणाचल प्रदेश के अपर सियांग जिले में सियांग नदी पर 11,200 मेगावाट क्षमता का बांध बनाने की योजना है। दूसरी ओर चीन तिब्बत में इसी नदी पर करीब 60,000 मेगावाट क्षमता के बांध का निर्माण कर रहा है।

भारत की चिंता है कि चीन की परियोजना से नदी के प्राकृतिक बहाव पर असर पड़ सकता है। अचानक बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने की स्थिति में निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ने की आशंका भी जताई जाती रही है।

इसी पृष्ठभूमि में सियांग परियोजना को पानी के भंडारण और नियमन, बाढ़ के जोखिम को कम करने तथा देश की जल और ऊर्जा सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है।

पहले से चल रहा है परियोजना का विरोध

अप्रैल 2022 में जल शक्ति मंत्रालय ने NHPC को परियोजना की शुरुआती व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा था। इसका उद्देश्य यह आकलन करना था कि प्रस्तावित परियोजना को आगे बढ़ाना तकनीकी और अन्य दृष्टि से कितना संभव है।

वर्ष 2025 में परियोजना से संबंधित तकनीकी जांच शुरू करने की कोशिशों के दौरान स्थानीय स्तर पर विरोध सामने आया। अब सर्वेक्षण और परियोजना को लेकर विरोध ने हिंसक रूप ले लिया है।

ग्रामीणों को गांव डूबने की चिंता

आदि समुदाय के लिए सियांग नदी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी है। सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम का दावा है कि परियोजना से 27 गांव डूब सकते हैं, जबकि दर्जनों अन्य गांव भी प्रभावित हो सकते हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनकी सहमति के बिना सर्वेक्षण आगे बढ़ाया जा रहा है। उनका कहना है कि परियोजना से जमीन, गांवों, आजीविका और सांस्कृतिक विरासत पर असर पड़ सकता है।

वहीं, राज्य सरकार का कहना है कि फिलहाल परियोजना की व्यवहार्यता का आकलन करने के लिए तकनीकी और पर्यावरणीय सर्वेक्षण किए जा रहे हैं। सरकार के अनुसार परियोजना का उद्देश्य पानी का भंडारण और नियमन करना, सियांग-ब्रह्मपुत्र बेसिन में मौसमी बाढ़ का खतरा कम करना तथा देश की जल और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है।

कांग्रेस ने हिंसा की निंदा की

अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने हिंसा की निंदा की है। कांग्रेस ने बंद के दौरान आंसू गैस के इस्तेमाल की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

वहीं, राज्य सरकार ने लोगों से परियोजना को लेकर अपुष्ट अफवाहों, भ्रामक दावों और फर्जी खबरों से बचने की अपील की है। सरकार ने कहा है कि परियोजना के आकलन के दौरान स्थानीय समुदायों और प्रभावित परिवारों के अधिकारों, जमीन की सुरक्षा तथा सांस्कृतिक विरासत को ध्यान में रखा जाएगा।

फिलहाल सियांग प्रोजेक्ट को लेकर स्थानीय विरोध और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। एक ओर सरकार इसे जल प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजना बता रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय संगठन जमीन, गांवों और समुदाय की सहमति को लेकर सवाल उठा रहे हैं।