हरियाणा में 300 से ज्यादा MBBS डॉक्टरों के दस्तावेज अटके, NEET-PG पास करने के बाद भी काउंसलिंग पर संकट
हरियाणा में 300 से अधिक MBBS डॉक्टर NEET-PG 2026 पास करने के बावजूद मूल दस्तावेजों के लिए परेशान हैं। डॉक्टरों ने कानूनी कार्रवाई की तैयारी की।
हरियाणा में 300 से अधिक MBBS डॉक्टरों के मूल दस्तावेज আটके, आठ महीने बाद भी नहीं मिली नौकरी
➤ NEET-PG 2026 पास करने के बावजूद काउंसलिंग में शामिल होने पर संकट, दस्तावेजों के बिना आगे की पढ़ाई मुश्किल
➤ 2020 की बॉन्ड पॉलिसी को लेकर डॉक्टरों ने DMER और रोहतक विश्वविद्यालय को लीगल नोटिस भेजने की तैयारी की
हरियाणा में वर्ष 2020 में लागू की गई और 2022 में संशोधित बॉन्ड पॉलिसी के तहत MBBS करने वाले 300 से अधिक डॉक्टरों का भविष्य अधर में लटक गया है। फरवरी 2026 में पासआउट हुए इस बैच के डॉक्टरों को आठ महीने बाद भी न तो बॉन्ड के तहत नौकरी मिली है और न ही उनके मूल शैक्षणिक दस्तावेज वापस किए गए हैं। अब ये डॉक्टर सरकार के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
मामला इसलिए भी गंभीर हो गया है, क्योंकि इन डॉक्टरों में से 300 से अधिक NEET-PG 2026 की परीक्षा पास कर चुके हैं। पोस्ट ग्रेजुएट (PG) पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए काउंसलिंग के दौरान मूल दस्तावेज दिखाना अनिवार्य होता है। ऐसे में दस्तावेज अपने पास नहीं होने के कारण इन डॉक्टरों के लिए काउंसलिंग में शामिल होना मुश्किल हो रहा है। यदि समय पर दस्तावेज नहीं मिले, तो उनकी एक साल की मेहनत और परीक्षा में हासिल की गई मेरिट बेकार जाने का खतरा है।
पीड़ित डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि वे जल्द ही चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय (DMER) हरियाणा और पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, रोहतक को लीगल नोटिस भेजेंगे। इसके बाद वे पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का रुख करने की तैयारी में हैं।
बॉन्ड में डिग्री रोकने का प्रावधान, फिर दूसरे दस्तावेज क्यों रोके?
MBBS डॉक्टरों का कहना है कि बॉन्ड पॉलिसी के नियमों के तहत केवल डिग्री रोके जाने का प्रावधान था। इसके बावजूद मेडिकल कॉलेजों और सरकार ने उनके अन्य सभी मूल शैक्षणिक दस्तावेज भी अपने पास जमा कर रखे हैं। डॉक्टरों का सवाल है कि जब पॉलिसी में डिग्री रोकने की बात थी, तो उनके बाकी मूल दस्तावेज क्यों नहीं लौटाए जा रहे हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, दस्तावेजों की अनुपलब्धता का सीधा असर उनकी आगे की पढ़ाई पर पड़ रहा है। NEET-PG 2026 पास करने के बाद भी वे काउंसलिंग की प्रक्रिया में शामिल होने को लेकर परेशान हैं। इससे उनके सामने करियर और उच्च शिक्षा दोनों को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है।
600 में से 300 से अधिक डॉक्टरों ने पास की NEET-PG परीक्षा
इस बैच में कुल 600 ग्रेजुएट डॉक्टर हैं। इनमें से 300 से अधिक डॉक्टरों ने NEET-PG 2026 की परीक्षा पास की है। परीक्षा पास करने के बाद अब उनके सामने काउंसलिंग में शामिल होने की चुनौती खड़ी हो गई है। काउंसलिंग के दौरान मूल दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है, लेकिन दस्तावेज नहीं मिलने के कारण डॉक्टरों की आगे की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है।
डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए मेहनत की और परीक्षा पास की, लेकिन अब दस्तावेजों के अभाव में उनके सामने मुश्किल स्थिति बन गई है। यदि समय रहते मूल दस्तावेज नहीं लौटाए गए, तो उनकी एक साल की मेहनत और हासिल की गई मेरिट का लाभ नहीं मिल पाएगा।
न नौकरी मिली और न उच्च शिक्षा के लिए लौटाए दस्तावेज
डॉक्टरों के मुताबिक, बॉन्ड पॉलिसी लागू करते समय सरकार की ओर से कहा गया था कि छात्रों की उच्च शिक्षा में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी। इसके बावजूद वर्तमान स्थिति में न तो उन्हें बॉन्ड के तहत सर्विस या नौकरी मिल रही है और न ही आगे की पढ़ाई के लिए उनके मूल दस्तावेज वापस किए जा रहे हैं।
फरवरी 2026 में MBBS की पढ़ाई पूरी करने वाले डॉक्टरों को आठ महीने बाद भी नौकरी नहीं मिली है। ऐसे में उनके सामने दोहरी परेशानी है। एक तरफ वे बॉन्ड पॉलिसी के तहत नौकरी मिलने का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ NEET-PG 2026 पास करने के बाद भी आगे की पढ़ाई के लिए जरूरी दस्तावेज हासिल नहीं कर पा रहे हैं।
ईमेल भेजे, डीन और निदेशकों से मिले, फिर भी नहीं मिला जवाब
पीड़ित डॉक्टरों का कहना है कि वे अपनी समस्या के समाधान के लिए चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय (DMER), संबंधित मेडिकल कॉलेजों के डीन और निदेशकों से कई बार संपर्क कर चुके हैं। वे अधिकारियों के चक्कर काटकर थक चुके हैं और इस संबंध में दर्जनों ईमेल भी भेजे जा चुके हैं।
इसके बावजूद उन्हें अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। डॉक्टरों का कहना है कि लगातार प्रयास करने के बाद भी समाधान नहीं निकलने के कारण उन्हें कानूनी रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
अब कानूनी लड़ाई की तैयारी में डॉक्टर
मूल दस्तावेज वापस नहीं मिलने और नौकरी नहीं दिए जाने से परेशान 300 से अधिक डॉक्टर अब सरकार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने DMER हरियाणा और पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, रोहतक को लीगल नोटिस भेजने की चेतावनी दी है। इसके बाद वे पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का रुख करेंगे।
डॉक्टरों की मांग है कि उनके मूल शैक्षणिक दस्तावेज वापस किए जाएं, ताकि वे PG काउंसलिंग में भाग लेकर आगे की पढ़ाई कर सकें। फिलहाल, 2020 की बॉन्ड पॉलिसी और 2022 में हुए संशोधन के तहत MBBS करने वाले इस बैच के डॉक्टर अपने दस्तावेजों की वापसी और नौकरी को लेकर असमंजस में हैं।
Akhil Mahajan