अच्छी सेहत का राज है रंगीन थाली,सेहत के लिए क्या खाना है जरूरी?

रंगीन थाली में फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज शामिल करें। जानिए WHO की सलाह, फाइबर के फायदे और संतुलित डाइट के चार जरूरी नियम।

अच्छी सेहत का राज है रंगीन थाली,सेहत के लिए क्या खाना है जरूरी?

रंगीन थाली में फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज शामिल करने से शरीर को मिलते हैं अलग-अलग पोषक तत्व

➤ WHO के अनुसार 10 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को रोज कम से कम 400 ग्राम फल और सब्जियां खानी चाहिए

➤ संतुलित डाइट के चार जरूरी सिद्धांत हैं पर्याप्तता, संतुलन, संयम और विविधता

नई दिल्ली। अच्छी सेहत के लिए खान-पान का सही होना बेहद जरूरी है। लेकिन स्वस्थ भोजन का मतलब सिर्फ कम खाना या पेट भरना नहीं है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए नियमित रूप से अलग-अलग पोषक तत्वों की जरूरत होती है। रोज एक ही तरह का भोजन करने से शरीर की सभी पोषण संबंधी जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि आहार विशेषज्ञ डाइट में विविधता लाने और थाली को रंगीन बनाने पर जोर देते हैं।

रंगीन थाली का मतलब केवल खाने को देखने में आकर्षक बनाना नहीं, बल्कि उसमें अलग-अलग तरह के फल, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज, मेवे और प्रोटीन के दूसरे स्रोत शामिल करना है। अलग-अलग रंगों वाले फल और सब्जियों में विभिन्न प्रकार के विटामिन, खनिज और प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं। इन खाद्य पदार्थों को नियमित भोजन का हिस्सा बनाने से शरीर को अलग-अलग पोषक तत्व मिल सकते हैं।

हार्वर्ड हेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक, स्वस्थ आहार के चार प्रमुख आधार हैं- पर्याप्तता, संतुलन, संयम और विविधता। इसका मतलब है कि अच्छी डाइट किसी एक खास सब्जी या सुपरफूड पर निर्भर नहीं करती, बल्कि पूरे भोजन में पोषक तत्वों के सही मेल पर आधारित होती है।

रंगीन थाली से शरीर को मिलता है बेहतर पोषण

हरी पत्तेदार सब्जियों से लेकर लाल, पीले, नारंगी और बैंगनी रंग के फल-सब्जियों तक, अलग-अलग पौधों में विभिन्न प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं। इसलिए हर दिन एक ही तरह की सब्जी खाने के बजाय भोजन में अलग-अलग विकल्प शामिल करना बेहतर माना जाता है।

हरी सब्जियां कई जरूरी विटामिन और खनिज प्रदान करती हैं। वहीं, लाल, पीले, नारंगी और बैंगनी रंग के फल-सब्जियों में अलग-अलग तरह के एंटीऑक्सीडेंट यौगिक पाए जाते हैं। भोजन में इनकी विविधता रखने से शरीर को अलग-अलग पोषक तत्व प्राप्त करने में मदद मिलती है।

विशेषज्ञों की सलाह है कि मौसम के अनुसार फल और सब्जियों के विकल्प बदलते रहें। इससे रोजाना के भोजन में विविधता बनी रहती है और किसी एक ही खाद्य पदार्थ पर निर्भरता कम होती है।

हर रंग के फल और सब्जियों के हैं अलग फायदे

थाली में कई रंगों के खाद्य पदार्थ शामिल करने का मुख्य उद्देश्य शरीर को अलग-अलग पोषक तत्व उपलब्ध कराना है। केवल एक तरह की सब्जी या फल खाने के बजाय अलग-अलग विकल्प चुनने से डाइट अधिक विविध बन सकती है।

  • हरी सब्जियां: इनमें कई जरूरी विटामिन और खनिज पाए जाते हैं।

  • लाल रंग के फल-सब्जियां: ये विभिन्न प्राकृतिक यौगिकों के स्रोत होते हैं।

  • पीले और नारंगी फल-सब्जियां: इनमें भी अलग-अलग प्रकार के पोषक तत्व और प्राकृतिक यौगिक मिलते हैं।

  • बैंगनी रंग के फल-सब्जियां: इनमें विभिन्न एंटीऑक्सीडेंट यौगिक पाए जाते हैं।

इसलिए जरूरी है कि हर दिन खाने में एक ही विकल्प को दोहराने के बजाय उपलब्ध मौसमी फल और सब्जियों को शामिल किया जाए। इस आदत से भोजन में विविधता बढ़ाने और पोषण की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।

सिर्फ फल और सब्जियां खाना ही काफी नहीं

स्वस्थ आहार के लिए फल और सब्जियां जरूरी हैं, लेकिन केवल इन्हीं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। भोजन में साबुत अनाज, दालें और प्रोटीन के दूसरे स्रोत भी शामिल होने चाहिए। ये शरीर को जरूरी पोषक तत्व देने के साथ संतुलित डाइट का हिस्सा बनते हैं।

साबुत अनाज, दालों और सब्जियों में फाइबर पाया जाता है। पर्याप्त फाइबर लेने से पाचन को ठीक रखने में मदद मिलती है। यह ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और वजन को नियंत्रित रखने में भी सहायक हो सकता है।

इसलिए रोज के भोजन में अनाज के साथ दालें, सब्जियां और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करना चाहिए। भोजन में संतुलन बनाए रखने के लिए किसी एक खाद्य समूह पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग तरह के पौष्टिक विकल्प चुनना बेहतर है।

WHO की सलाह: रोज खाएं कम से कम 400 ग्राम फल और सब्जियां

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, 10 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को प्रतिदिन कम से कम 400 ग्राम फल और सब्जियां खानी चाहिए। यह सलाह रोजाना के भोजन में फल और सब्जियों की पर्याप्त मात्रा शामिल करने के महत्व को बताती है।

फल और सब्जियों के साथ साबुत अनाज, दालें और फाइबर वाले दूसरे खाद्य पदार्थों को शामिल करना भी जरूरी है। इससे डाइट में पोषक तत्वों और फाइबर की मात्रा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, स्वस्थ भोजन का मतलब केवल किसी एक तय मात्रा या खाद्य पदार्थ पर ध्यान देना नहीं है। शरीर की जरूरतों के अनुसार विविधता, संतुलन और संयम बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।

अच्छी सेहत के लिए याद रखें डाइट के चार नियम

स्वस्थ खान-पान की आदत विकसित करने के लिए चार बातों पर ध्यान देना जरूरी है।

1. पर्याप्तता: शरीर की जरूरतों के अनुसार पर्याप्त पोषक तत्व लेने पर ध्यान दें।

2. संतुलन: भोजन में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और प्रोटीन के अलग-अलग स्रोत शामिल करें।

3. संयम: खाने की मात्रा और खाद्य पदार्थों के चुनाव में संतुलन बनाए रखें।

4. विविधता: रोज एक ही तरह का भोजन करने के बजाय अलग-अलग फल, सब्जियां और पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाएं।

कुल मिलाकर, अच्छी सेहत के लिए किसी एक खास खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहने के बजाय पूरी डाइट पर ध्यान देना जरूरी है। रंगीन और संतुलित थाली, मौसमी फल-सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और पर्याप्त फाइबर स्वस्थ खान-पान की अच्छी शुरुआत हो सकते हैं।