फल खाना बेहतर या जूस? जानिए किससे मिलता है ज्यादा फायदा

साबुत फल खाने और जूस पीने के फायदे जानें। फाइबर, चीनी, पैक्ड जूस, दांतों की सड़न और बच्चों की सेहत से जुड़ी जरूरी बातें समझें।

फल खाना बेहतर या जूस? जानिए किससे मिलता है ज्यादा फायदा

साबुत फल खाने से शरीर को फाइबर और पोषक तत्व ज्यादा मिलते हैं, जूस में फाइबर की मात्रा घट सकती है

➤ 100 प्रतिशत रियल जूस में भी प्राकृतिक चीनी होती है, जबकि पैक्ड फ्रूट ड्रिंक में अतिरिक्त चीनी और प्रिजर्वेटिव्स हो सकते हैं

➤ ज्यादा जूस पीने से कैलोरी बढ़ने और दांतों में सड़न का खतरा, बच्चों को जूस देने में बरतें सावधानी

जब भी स्वस्थ खान-पान की बात होती है, तो डाइट में फल और सब्जियां शामिल करने की सलाह दी जाती है। फल शरीर को जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने के साथ सेहत को बेहतर बनाए रखने में भी मदद करते हैं। लेकिन अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि रोजाना फल खाना ज्यादा फायदेमंद है या उनका जूस पीना। खासकर व्यस्त दिनचर्या में कई लोग फल खाने के बजाय जूस पीना आसान विकल्प मानते हैं। हालांकि, आहार विशेषज्ञों के अनुसार अधिकतम लाभ पाने के लिए फलों का जूस पीने के बजाय उन्हें साबुत खाना बेहतर विकल्प है।

साबुत फल और जूस में अंतर केवल उनके सेवन के तरीके का नहीं है। फल को साबुत खाने से शरीर को फाइबर मिलता है, जिसे पाचन और पेट भरा महसूस करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं, जूस बनाने की प्रक्रिया में फाइबर की मात्रा काफी कम हो सकती है। इसके अलावा, बाजार में मिलने वाले पैक्ड जूस और फ्रूट ड्रिंक में चीनी तथा दूसरे पदार्थ भी मिलाए जा सकते हैं। इसलिए यह समझना जरूरी है कि हर तरह का जूस साबुत फल का समान विकल्प नहीं होता।

साबुत फल खाने से क्यों मिलता है ज्यादा फायदा?

संतरा, सेब, अमरूद और दूसरे फलों को साबुत खाने से उनमें मौजूद फाइबर का लाभ मिलता है। जब इन्हीं फलों का जूस निकाला जाता है, तो उसकी प्रक्रिया के दौरान फाइबर की काफी मात्रा अलग हो सकती है। यही कारण है कि विशेषज्ञ साबुत फल खाने को प्राथमिकता देते हैं।

फाइबर से भरपूर साबुत फल खाने में ज्यादा समय लगता है और इससे पेट भरा हुआ महसूस करने में भी मदद मिल सकती है। इसके मुकाबले जूस कम समय में पी लिया जाता है। ऐसे में जूस पीने के बाद भी कुछ लोगों को भूख लग सकती है और वे अतिरिक्त भोजन का सेवन कर सकते हैं।

फलों को साबुत खाने का एक अन्य फायदा यह है कि इससे उनकी प्राकृतिक संरचना काफी हद तक बनी रहती है। इसलिए रोजाना की डाइट में अलग-अलग तरह के साबुत फल शामिल करना बेहतर विकल्प माना जाता है। अगर आप फल खाने के बजाय नियमित रूप से जूस पीते हैं, तो आपको फाइबर से मिलने वाले फायदे कम मिल सकते हैं।

क्या 100 प्रतिशत रियल फ्रूट जूस भी नुकसान पहुंचा सकता है?

बाजार में कई उत्पाद 100 प्रतिशत रियल या ताजे फलों के जूस के नाम से बेचे जाते हैं। ऐसे में लोगों को लगता है कि इनका सेवन पूरी तरह सुरक्षित है और ये साबुत फल जितने ही फायदेमंद होंगे। लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है।

100 प्रतिशत फलों के जूस में भी प्राकृतिक चीनी मौजूद होती है। इसलिए केवल 100 प्रतिशत रियल लिखे होने से यह नहीं माना जा सकता कि जूस साबुत फल के बराबर फाइबर देगा या इसे बिना किसी सीमा के पिया जा सकता है।

इसके अलावा, बाजार में मिलने वाला हर फ्रूट जूस 100 प्रतिशत जूस नहीं होता। कई पैक्ड फ्रूट ड्रिंक में अतिरिक्त चीनी और मिठास मिलाई जा सकती है। उत्पाद को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए कुछ पेय पदार्थों में प्रिजर्वेटिव्स भी इस्तेमाल किए जाते हैं।

इसलिए पैक्ड जूस खरीदते समय उसके पैकेट पर लिखी पोषण संबंधी जानकारी और सामग्री की सूची ध्यान से पढ़नी चाहिए। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि उत्पाद में कितनी चीनी है और उसमें कौन-कौन सी सामग्री शामिल की गई है।

बच्चों को साबुत फल खिलाने की सलाह क्यों देते हैं विशेषज्ञ?

बच्चों के खान-पान को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के विशेषज्ञ बच्चों को फलों का जूस देने के बजाय साबुत फल खिलाने की सलाह देते हैं। इसका एक प्रमुख कारण साबुत फलों में मौजूद फाइबर और उनकी प्राकृतिक संरचना है।

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के मुताबिक, एक से तीन साल के बच्चों को पैक्ड फलों का जूस बिल्कुल नहीं देना चाहिए। बच्चों की डाइट में फलों को शामिल करते समय साबुत फल को प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है।

माता-पिता को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि पैकेट पर फलों के जूस का उल्लेख होने का मतलब यह नहीं है कि उसमें केवल फलों से प्राप्त सामग्री ही मौजूद है। कुछ उत्पादों में अतिरिक्त चीनी और दूसरे पदार्थ शामिल हो सकते हैं। इसलिए बच्चों के लिए कोई भी पैक्ड पेय खरीदने से पहले उसकी सामग्री और पोषण लेबल की जांच करना जरूरी है।

ज्यादा जूस पीने से दांतों को क्या नुकसान हो सकता है?

फलों के जूस का अधिक सेवन केवल फाइबर की कमी तक सीमित नहीं है। मीठे पेय और पैक्ड जूस को लंबे समय तक थोड़ा-थोड़ा करके पीते रहने से दांतों का चीनी के संपर्क में रहने का समय बढ़ सकता है। इससे दांतों में सड़न का खतरा बढ़ने की आशंका रहती है।

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुसार, जूस को लगातार घूंट-घूंट करके पीने से दांतों में सड़न का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए जूस पीने की आदत और उसकी मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है।

खासकर बच्चों को लंबे समय तक बोतल या कप से मीठे पेय पीते रहने की आदत से बचाना चाहिए। जूस को दिनभर थोड़ा-थोड़ा पीने के बजाय उसके सेवन के तरीके पर ध्यान देना और नियमित रूप से दांतों की सफाई करना महत्वपूर्ण है।

जूस में मौजूद चीनी से बढ़ सकती हैं कैलोरी

जूस में मौजूद चीनी की मात्रा भी सेहत के लिहाज से महत्वपूर्ण है। फलों के जूस के जरिए शरीर में कैलोरी पहुंचती है। यदि कोई व्यक्ति साबुत फल खाने के बजाय अधिक मात्रा में जूस पीता है, तो उसके कुल कैलोरी सेवन में बढ़ोतरी हो सकती है।

लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा कैलोरी का सेवन वजन बढ़ने का कारण बन सकता है। मोटापा और डायबिटीज के जोखिम को ध्यान में रखते हुए मीठे पेय पदार्थों का सेवन सीमित रखना जरूरी है। खासकर पैक्ड फ्रूट ड्रिंक खरीदते समय उनमें मौजूद अतिरिक्त चीनी पर ध्यान देना चाहिए।

यह भी समझना जरूरी है कि हर तरह के जूस की पोषण संबंधी संरचना एक जैसी नहीं होती। ताजे फल से निकाले गए जूस और अतिरिक्त चीनी वाले पैक्ड फ्रूट ड्रिंक में अंतर हो सकता है। इसलिए किसी भी पेय को चुनते समय उसकी सामग्री, चीनी की मात्रा और सेवन की आदतों को ध्यान में रखना चाहिए।

फल खाएं या जूस पिएं, क्या है बेहतर विकल्प?

अगर आप अपनी डाइट को स्वस्थ बनाना चाहते हैं, तो फलों का चुनाव करते समय साबुत फल को प्राथमिकता दें। संतरा, सेब, अमरूद और दूसरे मौसमी फल साबुत खाने से फाइबर का लाभ मिल सकता है। इसके मुकाबले जूस में फाइबर की मात्रा कम हो सकती है और उसे पीने से पेट भरा महसूस होने का असर भी अलग हो सकता है।

पैक्ड जूस खरीदते समय केवल उसके आकर्षक पैकेट या 100 प्रतिशत रियल जैसे दावों पर भरोसा न करें। पोषण लेबल और सामग्री की सूची जरूर देखें। अतिरिक्त चीनी वाले पेय पदार्थों का अधिक सेवन करने से बचें और बच्चों के लिए पैक्ड जूस के बजाय साबुत फल को प्राथमिकता दें।

कुल मिलाकर, साबुत फल आमतौर पर जूस से बेहतर विकल्प हैं, क्योंकि उनसे फाइबर मिलता है और वे पेट भरा महसूस करने में मदद कर सकते हैं। जूस पीना हो तो उसकी मात्रा और उसमें मौजूद चीनी का ध्यान रखना चाहिए। स्वस्थ खान-पान के लिए साबुत फल, संतुलित आहार और सही खान-पान की आदतों को महत्व देना जरूरी है।