हिमाचल की 68 सीटों पर BJP का सर्वे,31 अक्टूबर तक रिपोर्ट,टिकट के दावेदारों की होगी परख
हिमाचल प्रदेश में भाजपा ने 68 विधानसभा सीटों पर संभावित प्रत्याशियों का सर्वे शुरू किया है। 31 अक्टूबर तक रिपोर्ट और 10 नवंबर के बाद दूसरे चरण की तैयारी है।
हिमाचल की सभी 68 विधानसभा सीटों पर BJP का सर्वे, संभावित प्रत्याशियों की जीतने की क्षमता का आकलन
➤ दिल्ली की एजेंसी को 31 अक्टूबर तक सर्वे पूरा करने की डेडलाइन, 10 नवंबर के बाद शुरू होगा दूसरा चरण
➤ कुछ सीटों पर 10 से 15 दावेदार, मौजूदा विधायकों के साथ नए चेहरों की भी परखी जा रही है विनेबिलिटी
हिमाचल प्रदेश में दिसंबर 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी प्रदेश की सभी 68 विधानसभा सीटों पर संभावित प्रत्याशियों की जीतने की क्षमता (विनेबिलिटी) का आकलन करा रही है। इसके लिए दिल्ली की एक एजेंसी को सर्वे की जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर यह सर्वे कराया जा रहा है।
एजेंसी के प्रतिनिधि हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में जाकर संभावित उम्मीदवारों की स्थिति का आकलन कर रहे हैं। सर्वे में यह जानने की कोशिश की जा रही है कि किस विधानसभा क्षेत्र में टिकट के कितने दावेदार हैं, किस नेता की स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ है और जनता के बीच किसकी स्वीकार्यता अधिक है। साथ ही, संभावित उम्मीदवारों के चुनाव जीतने की संभावनाओं को लेकर भी फीडबैक जुटाया जा रहा है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यह एजेंसी करीब दो महीने से सर्वे कर रही है और अब तक 48 से ज्यादा विधानसभा क्षेत्रों में सर्वे पूरा कर चुकी है। इस पूरी कवायद को बेहद गोपनीय रखा गया है, ताकि पार्टी का कोई नेता अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके सर्वे के नतीजों को प्रभावित न कर सके। यही वजह है कि अभी तक इस सर्वे को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि, प्रदेश भाजपा के ज्यादातर नेता सर्वे चलने की बात स्वीकार कर रहे हैं।
टॉप सीक्रेट तरीके से जुटाया जा रहा फीडबैक, नेताओं की पकड़ पर नजर
भाजपा ने सर्वे की प्रक्रिया को गोपनीय रखने पर विशेष जोर दिया है। एजेंसी के प्रतिनिधि स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटा रहे हैं, लेकिन इसकी गतिविधियों को लेकर पार्टी के नेताओं को भी पूरी जानकारी नहीं दी जा रही है। इसका उद्देश्य संभावित प्रत्याशियों की वास्तविक स्थिति का आकलन करना है, ताकि किसी नेता के प्रभाव या दबाव का सर्वे पर असर न पड़े।
इस प्रक्रिया में हर विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक परिस्थितियों को समझने की कोशिश की जा रही है। पार्टी यह जानना चाहती है कि किन नेताओं की जनता के बीच अच्छी छवि है, किसकी स्थानीय पकड़ मजबूत है और कौन चुनाव में पार्टी के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।
प्रदेश भाजपा नेताओं से इस बारे में बातचीत किए जाने पर ज्यादातर नेताओं ने सर्वे होने की बात मानी है। हालांकि, सर्वे के निष्कर्षों और संभावित प्रत्याशियों को लेकर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।
पत्रकारों और आम जनता से पूछे जा रहे संभावित उम्मीदवारों के बारे में सवाल
सर्वे के लिए हिमाचल पहुंची केंद्रीय टीम पत्रकारों के साथ-साथ आम लोगों से भी बातचीत कर रही है। अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में संभावित प्रत्याशियों को लेकर जनता की राय जानने की कोशिश की जा रही है। इसके तहत यह पता लगाया जा रहा है कि क्षेत्र में किस नेता का प्रभाव ज्यादा है, किसकी स्वीकार्यता मजबूत है और किस उम्मीदवार को चुनाव में बेहतर समर्थन मिल सकता है।
फिलहाल सर्वे में दो प्रमुख सवालों पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। पहला, संबंधित विधानसभा क्षेत्र में टिकट के कितने दावेदार हैं। दूसरा, इन दावेदारों में चुनाव जीतने की क्षमता के लिहाज से कौन आगे है।
पार्टी के लिए यह जानकारी इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि विधानसभा चुनाव में टिकट के कई दावेदार होने की स्थिति में ऐसे उम्मीदवार का चयन करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जिसकी स्थानीय स्तर पर अच्छी पकड़ हो और जो चुनाव में जीत की संभावना मजबूत कर सके। इसी को ध्यान में रखते हुए संभावित प्रत्याशियों के बारे में अलग-अलग स्तर पर फीडबैक जुटाया जा रहा है।
31 अक्टूबर तक पूरा होगा पहला सर्वे, 10 नवंबर के बाद दूसरे चरण की तैयारी
दिल्ली की एजेंसी को सर्वे पूरा करने के लिए 31 अक्टूबर तक की डेडलाइन दी गई है। बताया जा रहा है कि एजेंसी इस समयसीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट तैयार कर हाईकमान को सौंपेगी। इसके बाद अगले चरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद 10 नवंबर के बाद दूसरे चरण का सर्वे शुरू होगा। पहले चरण में जहां टिकट के दावेदारों की संख्या और उनकी संभावित स्थिति का आकलन किया जा रहा है, वहीं दूसरे चरण में उम्मीदवारों की विनेबिलिटी पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा।
इसके बाद तीसरे सर्वे में भी जीतने की क्षमता को प्राथमिकता दिए जाने की बात कही जा रही है। इस तरह पार्टी अलग-अलग चरणों में संभावित उम्मीदवारों की स्थिति को समझने और चुनावी समीकरणों का आकलन करने की कोशिश कर रही है। हालांकि, इन सर्वे के आधार पर टिकट वितरण की अंतिम प्रक्रिया किस तरह होगी, इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।
जिन सीटों पर भाजपा हारी या बागी मैदान में थे, वहां 10 से 15 दावेदार
सर्वे के दौरान कुछ विधानसभा क्षेत्रों में टिकट के दावेदारों की संख्या काफी ज्यादा सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, 2022 के विधानसभा चुनाव में जिन सीटों पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था या जहां पार्टी के बागी उम्मीदवार मैदान में थे, वहां 10 से 15 दावेदार सामने आ रहे हैं।
ऐसे विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी के सामने संभावित उम्मीदवारों में से मजबूत प्रत्याशी चुनने की चुनौती हो सकती है। एक ही सीट पर कई नेताओं की दावेदारी होने से स्थानीय राजनीतिक समीकरण भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं। इसी वजह से सर्वे में नेताओं की लोकप्रियता, क्षेत्र में उनकी पकड़ और चुनाव जीतने की संभावनाओं को लेकर फीडबैक जुटाया जा रहा है।
पार्टी के लिए यह जानना भी जरूरी है कि किन क्षेत्रों में दावेदारों के बीच प्रतिस्पर्धा ज्यादा है और कहां किसी उम्मीदवार की स्थिति अन्य दावेदारों की तुलना में बेहतर हो सकती है।
कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं वाली नौ सीटों पर भी दावेदारी ज्यादा
सर्वे में उन नौ विधानसभा सीटों पर भी विशेष नजर है, जहां फरवरी 2024 में कांग्रेस के छह पूर्व विधायक और तीन निर्दलीय भाजपा में शामिल हुए थे। सूत्रों के मुताबिक, इनमें से ज्यादातर सीटों पर टिकट के दावेदारों की संख्या काफी ज्यादा है।
इन सीटों पर संभावित उम्मीदवारों की स्थिति का आकलन करना भाजपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी को यह समझना है कि इन क्षेत्रों में किस नेता की स्थानीय पकड़ मजबूत है और जनता के बीच किसकी स्वीकार्यता अधिक है।
हालांकि, सर्वे के दौरान सामने आ रहे फीडबैक और दावेदारों की संख्या के आधार पर किसी नेता के टिकट की दावेदारी मजबूत या कमजोर होने को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
मौजूदा विधायकों के साथ नए चेहरों की भी होगी परख
भाजपा के इस सर्वे में केवल मौजूदा विधायकों या पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके नेताओं को ही शामिल नहीं किया गया है। दूसरे संभावित प्रत्याशियों की स्थिति का भी आकलन किया जा रहा है।
इससे पार्टी को अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में उपलब्ध संभावित विकल्पों के बारे में जानकारी मिल सकती है। मौजूदा विधायकों और पहले चुनाव लड़ चुके नेताओं के साथ नए चेहरों की स्थानीय पकड़ और जनता के बीच स्वीकार्यता को भी परखा जा रहा है।
सर्वे का उद्देश्य संभावित उम्मीदवारों की स्थिति की जानकारी जुटाना है। हालांकि, इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि पार्टी मौजूदा विधायकों के टिकट काटने या नए चेहरों को प्राथमिकता देने का फैसला कर चुकी है। टिकट वितरण को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
चुनाव में अभी 13 से 14 महीने, दावेदार बढ़ा सकते हैं सक्रियता
हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी 13 से 14 महीने का समय है। ऐसे में शुरुआती सर्वे के बाद टिकट की उम्मीद लगाए बैठे नेताओं की सक्रियता बढ़ सकती है। संभावित दावेदार अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में जनसंपर्क बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर सकते हैं।
सर्वे के दौरान जुटाए जा रहे फीडबैक से नेताओं को यह समझने का अवसर मिल सकता है कि उनके क्षेत्र में जनता के बीच उनकी छवि कैसी है और उनकी दावेदारी को लेकर क्या स्थिति बन रही है। हालांकि, सर्वे की गोपनीयता के कारण किसी भी नेता को मिलने वाले फीडबैक या उसके आधार पर होने वाली राजनीतिक गतिविधियों की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
भाजपा की चुनावी रणनीति के लिहाज से अहम है सर्वे
हिमाचल की सभी 68 विधानसभा सीटों पर कराया जा रहा यह सर्वे भाजपा की आगामी चुनावी रणनीति तैयार करने की शुरुआती कवायद के तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके माध्यम से पार्टी को संभावित उम्मीदवारों की स्थिति, स्थानीय राजनीतिक समीकरणों और अलग-अलग क्षेत्रों में टिकट के दावेदारों की संख्या समझने में मदद मिल सकती है।
पहले चरण में जुटाई जा रही जानकारी और उसके बाद होने वाले सर्वे के जरिए पार्टी संभावित प्रत्याशियों की जीतने की क्षमता का आकलन करना चाहती है। खासकर उन सीटों पर यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो सकती है, जहां दावेदारों की संख्या अधिक है या पिछले चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था।
फिलहाल सर्वे जारी है और एजेंसी को 31 अक्टूबर तक रिपोर्ट सौंपनी है। इसके बाद 10 नवंबर के बाद दूसरे चरण की प्रक्रिया शुरू होने की बात कही जा रही है। सर्वे के आधार पर टिकट तय करने, किसी उम्मीदवार को प्राथमिकता देने या मौजूदा विधायकों के टिकट को लेकर भाजपा की ओर से अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।
Akhil Mahajan