रंग-बिरंगी थाली का राज,सेहत के लिए फल, सब्जियां और साबुत अनाज क्यों जरूरी?
रंग-बिरंगी थाली, फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज अच्छी सेहत के लिए जरूरी हैं। जानिए WHO की सलाह और संतुलित डाइट के आसान तरीके।
रंग-बिरंगी थाली से शरीर को मिलते हैं अलग-अलग पोषक तत्व, डाइट में विविधता रखना जरूरी
➤ WHO के मुताबिक 10 साल से ज्यादा उम्र के लोग रोज कम से कम 400 ग्राम फल और सब्जियां खाएं
➤ साबुत अनाज, दालें और फाइबर वाली चीजें पाचन, ब्लड शुगर और वजन को नियंत्रित रखने में मददगार
नई दिल्ली। अच्छी सेहत के लिए सिर्फ पेट भरकर खाना या कम कैलोरी वाली डाइट लेना ही पर्याप्त नहीं है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है कि रोजाना के भोजन में अलग-अलग पोषक तत्व शामिल हों। यही वजह है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ संतुलित और विविधतापूर्ण आहार लेने की सलाह देते हैं। अच्छी डाइट का एक आसान तरीका है अपनी थाली को रंग-बिरंगे फल, सब्जियों, दालों और साबुत अनाज से भरना। इससे शरीर को अलग-अलग तरह के विटामिन, खनिज और अन्य जरूरी पोषक तत्व मिल सकते हैं।
अक्सर लोग रोजाना एक जैसी सब्जियां और सीमित खाद्य पदार्थ खाते हैं। इससे भोजन में विविधता कम हो सकती है। जबकि अलग-अलग रंगों के फल और सब्जियों में अलग तरह के प्राकृतिक यौगिक और पोषक तत्व पाए जाते हैं। हरी पत्तेदार सब्जियों से लेकर लाल, पीले, नारंगी और बैंगनी रंग के फलों-सब्जियों तक, हर तरह के खाद्य पदार्थ का अपना पोषण महत्व है।
स्वस्थ खान-पान का मतलब किसी एक खास फल, सब्जी या सुपरफूड पर निर्भर रहना नहीं है। पूरी थाली में संतुलन, पर्याप्तता, संयम और विविधता बनाए रखना जरूरी है। हार्वर्ड हेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक, स्वस्थ आहार के ये चार प्रमुख आधार हैं। इन बातों को ध्यान में रखकर रोजमर्रा के भोजन में छोटे बदलाव किए जा सकते हैं।
रंग-बिरंगी थाली क्यों है जरूरी?
रंगीन थाली का मतलब केवल भोजन को देखने में आकर्षक बनाना नहीं है, बल्कि इसमें अलग-अलग प्रकार के पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करना है। जब थाली में कई तरह की सब्जियां, फल, दालें, साबुत अनाज और मेवे शामिल होते हैं, तो शरीर को अलग-अलग पोषक तत्व प्राप्त करने के अवसर मिलते हैं।
हरी पत्तेदार सब्जियां कई जरूरी विटामिन और खनिज प्रदान करती हैं। वहीं, लाल, पीले, नारंगी और बैंगनी रंग के पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों में अलग-अलग प्राकृतिक यौगिक और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इसलिए रोजाना एक ही तरह की सब्जी खाने के बजाय अलग-अलग विकल्प चुनना बेहतर माना जाता है।
डाइट में विविधता बढ़ाने का एक आसान तरीका यह है कि मौसम के अनुसार मिलने वाले फलों और सब्जियों को भोजन में शामिल किया जाए। इससे खाने में नयापन भी बना रहता है और अलग-अलग पोषक तत्व प्राप्त करने में मदद मिलती है।
हर रंग के फल और सब्जियों के हैं अलग फायदे
फल और सब्जियों के अलग-अलग रंग उनमें मौजूद प्राकृतिक यौगिकों की विविधता को दर्शाते हैं। इसलिए भोजन में अलग-अलग रंगों के खाद्य पदार्थ शामिल करने से पोषण के कई स्रोत मिल सकते हैं।
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हरी सब्जियां: हरी पत्तेदार सब्जियां कई जरूरी विटामिन और खनिजों का स्रोत हैं। इन्हें नियमित भोजन में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है।
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लाल रंग के फल और सब्जियां: लाल रंग के पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों में अलग-अलग प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं।
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पीले और नारंगी रंग के खाद्य पदार्थ: इन रंगों के फल और सब्जियां भी विविध पोषक तत्व प्रदान करते हैं।
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बैंगनी रंग के फल और सब्जियां: इनमें भी अलग-अलग तरह के प्राकृतिक यौगिक और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं।
हालांकि, केवल रंगों के आधार पर किसी खाद्य पदार्थ के सभी पोषण संबंधी फायदे तय नहीं किए जा सकते। बेहतर तरीका यही है कि अपनी डाइट में विभिन्न प्रकार के फल और सब्जियां शामिल की जाएं।
सिर्फ फल-सब्जियां खाना पर्याप्त नहीं
स्वस्थ आहार के लिए फल और सब्जियां महत्वपूर्ण हैं, लेकिन केवल इन्हीं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। शरीर को साबुत अनाज, दालों और प्रोटीन के अन्य स्रोतों की भी जरूरत होती है। इसलिए रोजाना के भोजन में इन सभी खाद्य समूहों के लिए जगह बनानी चाहिए।
साबुत अनाज, दालें और सब्जियां फाइबर के अच्छे स्रोत हो सकते हैं। पर्याप्त फाइबर लेने से पाचन तंत्र को ठीक रखने में मदद मिलती है। इसके अलावा, फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और वजन को नियंत्रित रखने में भी सहायक हो सकते हैं।
भोजन में विविधता लाने के लिए दालों को बदल-बदलकर खाना, अलग-अलग अनाज शामिल करना और मौसमी फल-सब्जियों को प्राथमिकता देना उपयोगी आदतें हो सकती हैं। इससे भोजन में पोषक तत्वों के विभिन्न स्रोत शामिल होते हैं और डाइट अधिक संतुलित बनती है।
WHO की सलाह: रोज 400 ग्राम फल और सब्जियां खाएं
विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के मुताबिक, 10 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को रोजाना कम से कम 400 ग्राम फल और सब्जियां खानी चाहिए। स्वस्थ आहार में इनकी पर्याप्त मात्रा के साथ संतुलन और संयम बनाए रखना भी जरूरी है।
फल और सब्जियां खाने के साथ साबुत अनाज, दालें और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को भी डाइट का हिस्सा बनाना चाहिए। केवल किसी एक खाद्य पदार्थ की मात्रा बढ़ाने के बजाय पूरे दिन के भोजन में पोषण का संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ पाचन में मदद करते हैं। ये ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और वजन को नियंत्रित रखने में भी सहायक हो सकते हैं। हालांकि, इनका प्रभाव व्यक्ति की पूरी डाइट, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य की स्थिति पर भी निर्भर करता है।
स्वस्थ रहने के लिए अपनाएं ये आसान आदतें
रोजाना की डाइट में सुधार करने के लिए बहुत बड़े बदलाव करना जरूरी नहीं है। कुछ छोटी आदतों से भोजन में विविधता बढ़ाई जा सकती है।
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रोज एक ही तरह के फल और सब्जियां खाने के बजाय अलग-अलग विकल्प चुनें।
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मौसम के अनुसार उपलब्ध फल और सब्जियां भोजन में शामिल करें।
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साबुत अनाज और दालों को नियमित डाइट का हिस्सा बनाएं।
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पर्याप्त फाइबर लेने के लिए सब्जियों, दालों और साबुत अनाज का सेवन करें।
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भोजन में संतुलन बनाए रखें और किसी एक खाद्य पदार्थ पर पूरी तरह निर्भर न रहें।
कुल मिलाकर, अच्छी सेहत के लिए महंगे खाद्य पदार्थों या किसी खास सुपरफूड पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित, पर्याप्त, संयमित और विविधतापूर्ण आहार पर ध्यान देना चाहिए। रंग-बिरंगी थाली इसी दिशा में एक आसान कदम है। अलग-अलग फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दालें शामिल करके रोजमर्रा के भोजन को अधिक पौष्टिक बनाया जा सकता है।
Akhil Mahajan