'लिवर को नुकसान पहुंचा सकती है कमी!' A, D, E और K की कमी का खतरा
विटामिन ए, डी, ई और के की कमी लिवर की सेहत को प्रभावित कर सकती है। जानिए इनकी कमी के लक्षण और लिवर से जुड़ी समस्याओं का खतरा।
विटामिन ए, डी, ई और के की कमी लिवर की सेहत को प्रभावित कर सकती है
➤ क्रॉनिक लिवर डिजीज में शरीर के लिए जरूरी विटामिन्स का अवशोषण भी प्रभावित होता है
➤ संतुलित खानपान, सही जांच और डॉक्टर की सलाह से पोषक तत्वों की कमी पहचानना जरूरी
लिवर शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह न सिर्फ भोजन पचाने में मदद करता है, बल्कि शरीर से हानिकारक पदार्थों को प्रोसेस करने, ऊर्जा जमा करने और कई जरूरी प्रोटीन बनाने का काम भी करता है। ऐसे में लिवर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित खानपान और जरूरी पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा लेना बेहद जरूरी है।
अक्सर लोग विटामिन और दूसरे पोषक तत्वों की कमी को केवल कमजोरी या खून की कमी से जोड़कर देखते हैं, लेकिन इसका असर लिवर की सेहत पर भी पड़ सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, विटामिन ए, डी, ई और के की कमी कुछ लिवर बीमारियों में देखी जाती है। वहीं, कुपोषण और शराब से जुड़ी लिवर बीमारी में विटामिन-बी की कमी भी हो सकती है।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि विटामिन की कमी होने का मतलब हमेशा लिवर का कमजोर होना नहीं है। कई बार लिवर की बीमारी के कारण ही शरीर पोषक तत्वों को ठीक से अवशोषित नहीं कर पाता। इसलिए कमी और बीमारी के बीच संबंध को समझने के लिए सही जांच जरूरी है।
लिवर की बीमारी में क्यों होने लगती है विटामिन्स की कमी?
लंबे समय तक खानपान में गड़बड़ी और जरूरी पोषक तत्वों की कमी शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकती है। लिवर की कुछ क्रॉनिक बीमारियों में शरीर के लिए जरूरी विटामिन्स का भंडारण, प्रोसेसिंग और अवशोषण प्रभावित हो सकता है।
लिवर की बीमारी से पीड़ित कई लोगों में विटामिन ए, डी, ई और के की कमी देखी जाती है। ये सभी विटामिन शरीर के अलग-अलग कार्यों के लिए जरूरी हैं। इनकी कमी से आंखों, हड्डियों, मांसपेशियों, नसों और खून के थक्के जमने की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।
1. विटामिन ए की कमी से आंखों और त्वचा पर असर
विटामिन ए आंखों की रोशनी, त्वचा और प्रतिरक्षा प्रणाली को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है। इसकी कमी होने पर रात में कम दिखाई देने, आंखों में सूखापन और त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा, लिवर की क्रॉनिक बीमारी में भी विटामिन ए का स्तर कम देखा जा सकता है।
दरअसल, लिवर शरीर में विटामिन ए के भंडारण और प्रोसेसिंग का मुख्य केंद्र है। शरीर के कुल विटामिन ए भंडार का 80% से 90% हिस्सा लिवर की विशेष कोशिकाओं में जमा रहता है। इन कोशिकाओं को 'हेपेटिक स्टैलेट सेल्स' कहा जाता है। इनमें विटामिन ए 'रेटिनिल एस्टर' के रूप में संग्रहित रहता है।
इसलिए लिवर की कार्यप्रणाली प्रभावित होने पर शरीर में विटामिन ए के भंडारण और इस्तेमाल पर भी असर पड़ सकता है।
2. विटामिन डी की कमी बढ़ा सकती है फाइब्रोसिस का जोखिम
विटामिन डी को मुख्य रूप से हड्डियों और मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के लिए जाना जाता है। हालांकि, इसका संबंध लिवर की सेहत से भी है। क्रॉनिक लिवर डिजीज से पीड़ित लोगों में विटामिन डी की कमी आम तौर पर देखी जाती है।
अध्ययनों में पाया गया है कि विटामिन डी की कमी फाइब्रोसिस का खतरा बढ़ाने वाली हो सकती है। नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज और क्रोनिक हेपेटाइटिस जैसी स्थितियों में इसकी कमी गंभीर सूजन और स्कारिंग यानी फाइब्रोसिस का जोखिम बढ़ा सकती है।
फाइब्रोसिस की स्थिति में लिवर के ऊतकों पर निशान बनने लगते हैं। ऐसे में विटामिन डी की कमी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से इसकी जांच करानी चाहिए।
3. विटामिन ई की कमी से नसों और मांसपेशियों को हो सकती है परेशानी
विटामिन ई शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सिडेटिव डैमेज से बचाने में मदद करता है। इसकी गंभीर कमी होने पर नसों और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
कुछ क्रॉनिक लिवर बीमारियों और शरीर में फैट के अवशोषण में गड़बड़ी होने पर विटामिन ई की कमी का खतरा बढ़ जाता है। यह विटामिन नॉन-अल्कोहलिक स्टीटोहेपेटाइटिस से पीड़ित मरीजों में लिवर की सूजन और कोशिकाओं को होने वाले नुकसान को कम करने में मदद कर सकता है।
इसलिए लिवर से जुड़ी बीमारी या फैट के अवशोषण में परेशानी होने पर विटामिन ई के स्तर पर भी ध्यान देना जरूरी है।
4. विटामिन के की कमी से देर से रुक सकता है खून
विटामिन के खून का थक्का जमाने वाले प्रोटीन के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शरीर में इसकी कमी होने पर चोट लगने के बाद खून देर से रुक सकता है। इसके अलावा, शरीर पर आसानी से नील पड़ने की समस्या भी हो सकती है।
विटामिन के वसा में घुलनशील विटामिन है। छोटी आंत में इसके सही अवशोषण के लिए लिवर और पित्ताशय (गॉल ब्लैडर) से बनने वाले पित्त अम्लों की जरूरत होती है।
कोलेस्टेटिक लिवर डिजीज, सिरोसिस या पित्त नली में रुकावट जैसी स्थितियों में पित्त का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। इससे शरीर पोषक तत्वों को ठीक से अवशोषित नहीं कर पाता और विटामिन के की कमी का खतरा बढ़ जाता है।
लिवर को स्वस्थ रखने के लिए खानपान और जांच पर दें ध्यान
लिवर की सेहत बनाए रखने के लिए संतुलित भोजन लेना जरूरी है। शरीर को पर्याप्त विटामिन, प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व मिलने चाहिए। इसके साथ ही, यदि किसी व्यक्ति को लिवर से जुड़ी बीमारी है तो उसे डॉक्टर की सलाह के अनुसार जरूरी जांच करानी चाहिए।
विटामिन की कमी के लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते उनकी पहचान करना जरूरी है। हालांकि, केवल लक्षणों के आधार पर विटामिन की कमी या लिवर की बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। सही स्थिति जानने के लिए जांच और चिकित्सकीय सलाह जरूरी है। बिना डॉक्टर की सलाह के विटामिन सप्लीमेंट लेना भी उचित नहीं है।
Akhil Mahajan