ऑस्ट्रेलिया में करनाल के युवक की मौ*त,15 लाख खर्च कर पिता ने भेजा था विदेश, ट्रक हादसे में गई जान
करनाल के ब्याना गांव निवासी 24 वर्षीय तुषार कांबोज की ऑस्ट्रेलिया में दो ट्रकों की टक्कर में मौत हो गई। पिता ने 15 लाख खर्च कर विदेश भेजा था।
करनाल के 24 वर्षीय तुषार की ऑस्ट्रेलिया में सड़क हादसे में मौत
➤ पिता ने पशुबाड़ा बेचकर और कर्ज लेकर 15 लाख रुपये खर्च कर भेजा था विदेश
➤ जनवरी 2027 में घर लौटने और शादी करने की थी तैयारी, हादसे ने उजाड़े परिवार के सपने
करनाल। बेहतर भविष्य बनाने और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का सपना लेकर ऑस्ट्रेलिया गए हरियाणा के करनाल जिले के एक युवक की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत हो गई। शुक्रवार, 30 अक्टूबर को न्यू साउथ वेल्स के ह्यूम हाईवे पर दो ट्रकों के बीच हुई टक्कर में 24 वर्षीय तुषार कांबोज की जान चली गई। तुषार ट्रक चला रहा था। बेटे की मौत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जिस घर में कुछ महीनों बाद बेटे की वापसी और शादी की खुशियां मनाने की तैयारी चल रही थी, वहां अब मातम पसरा है।
करनाल जिले के ब्याना गांव निवासी तुषार करीब चार साल पहले स्टडी वीजा पर ऑस्ट्रेलिया गया था। परिवार ने उसकी पढ़ाई और विदेश में बेहतर भविष्य के लिए अपनी जमा-पूंजी तक लगा दी थी। पिता ने पशुबाड़ा बेचकर और कर्ज लेकर करीब 15 लाख रुपये जुटाए थे। उन्हें उम्मीद थी कि बेटा विदेश में मेहनत करके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करेगा और एक दिन खुशहाल जीवन के साथ घर लौटेगा। लेकिन परिवार के ये सारे सपने एक सड़क हादसे में बिखर गए।
पिता ने पशुबाड़ा बेचकर और कर्ज लेकर जुटाए थे 15 लाख रुपये
तुषार के पिता राकेश कुमार पेशे से टेलर हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और बेटे को बेहतर भविष्य देने के लिए उन्होंने हर संभव कोशिश की थी। राकेश कुमार ने बताया कि बेटे को विदेश भेजने के लिए उन्होंने अपना पशुबाड़ा बेच दिया था। इसके बावजूद पैसों की जरूरत पूरी नहीं हुई तो उन्हें कर्ज भी लेना पड़ा।
करीब 15 लाख रुपये खर्च करके 1 जनवरी 2022 को तुषार को स्टडी वीजा पर ऑस्ट्रेलिया भेजा गया था। तुषार ने 12वीं तक पढ़ाई की थी। विदेश पहुंचने के बाद वह पढ़ाई के साथ-साथ ट्रक चलाने का काम भी करने लगा था। पिता को भरोसा था कि बेटा वहां मेहनत करके अपने पैरों पर खड़ा होगा और परिवार की आर्थिक परेशानियां दूर करने में मदद करेगा।
राकेश कुमार ने बेटे को विदेश भेजने के लिए जो कुछ भी संभव था, वह सब किया था। उन्हें उम्मीद थी कि कुछ सालों की मेहनत के बाद परिवार की जिंदगी बदल जाएगी। मगर उन्हें क्या पता था कि जिस बेटे को बेहतर भविष्य की उम्मीद में हजारों किलोमीटर दूर भेजा है, उसकी वापसी तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर के रूप में होगी।
29 अक्टूबर को हुई थी आखिरी बातचीत, जनवरी में घर लौटने का दिया था भरोसा
इस हादसे ने परिवार को इसलिए भी गहरा सदमा दिया है, क्योंकि घटना से महज एक दिन पहले ही तुषार ने घर पर फोन किया था। 29 अक्टूबर को उसकी परिजनों से बातचीत हुई थी। इस दौरान परिवार में बन रहे नए मकान को लेकर चर्चा हुई।
परिजनों ने तुषार से उसके घर लौटने के बारे में पूछा था। इस पर उसने बताया था कि जनवरी 2027 में मकान का काम पूरा होने के बाद वह भारत लौट आएगा। परिवार भी उसके आने का बेसब्री से इंतजार कर रहा था।
घर में नए मकान का निर्माण चल रहा था। परिजनों ने उसके लौटने के बाद शादी करने की भी तैयारी सोच रखी थी। परिवार को उम्मीद थी कि जनवरी में तुषार घर आएगा तो घर में खुशियों का माहौल होगा। उसकी शादी होगी और परिवार के सभी सपने धीरे-धीरे पूरे होंगे।
लेकिन 29 अक्टूबर को जिस बेटे से घर लौटने की बात हुई थी, अगले ही दिन उसकी मौत की खबर आ गई। घर पर उसकी मां, छोटा भाई, दादी और चाचा हैं। परिवार के लिए इस दुख को सहन करना बेहद मुश्किल हो रहा है।
ह्यूम हाईवे पर गनिंग के पास दो ट्रकों की भिड़ंत, मौके पर गई जान
तुषार के पिता राकेश कुमार के अनुसार, 30 अक्टूबर को ऑस्ट्रेलिया के स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 9 बजे न्यू साउथ वेल्स के ह्यूम हाईवे पर गनिंग के पास यह हादसा हुआ। उस समय तुषार ट्रक चला रहा था।
इसी दौरान उसका ट्रक दूसरे ट्रक से टकरा गया। दोनों ट्रकों की टक्कर इतनी गंभीर थी कि तुषार की जान चली गई। हादसे की सूचना परिवार को भारतीय समयानुसार सुबह करीब 5 बजे मिली।
जैसे ही परिवार को बेटे की मौत की जानकारी मिली, घर में चीख-पुकार मच गई। जिस बेटे को अच्छी शिक्षा और रोजगार के लिए विदेश भेजा था, उसके हमेशा के लिए दुनिया छोड़ जाने की खबर ने परिवार को तोड़कर रख दिया।
10 दिन में भारत पहुंचने की उम्मीद, सरकार से मदद की गुहार
तुषार की मौत के बाद अब परिवार को उसके पार्थिव शरीर के भारत पहुंचने का इंतजार है। पिता राकेश कुमार ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया में तुषार के साथी शव को भारत लाने की प्रक्रिया में मदद कर रहे हैं। परिवार को उम्मीद है कि करीब 10 दिन में उसका पार्थिव शरीर गांव पहुंच जाएगा।
राकेश कुमार ने सरकार से भी अपील की है कि उनके बेटे का शव भारत लाने में मदद की जाए, ताकि परिवार अंतिम बार उसका चेहरा देख सके और अपने रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार कर सके।
जिस पिता ने बेटे के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपना पशुबाड़ा बेच दिया, कर्ज लिया और 15 लाख रुपये खर्च किए थे, आज वही पिता बेटे के पार्थिव शरीर के इंतजार में बैठा है। परिवार ने जिस घर में तुषार की वापसी पर शादी की शहनाइयां बजाने का सपना देखा था, वहां अब हर आंख नम है।
Akhil Mahajan