हरियाणा में टीचर मनीषा केस की फिर खुलेगी फाइल, CBI की क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट ने की खारिज

हरियाणा के भिवानी की टीचर मनीषा की मौत मामले में पंचकूला CBI कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर वरिष्ठ IPS अधिकारी की निगरानी में दोबारा जांच के आदेश दिए।

हरियाणा में टीचर मनीषा केस की फिर खुलेगी फाइल, CBI की क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट ने की खारिज

➤ मनीषा की मौत को आत्महत्या बताने वाली CBI की क्लोजर रिपोर्ट खारिज

➤ सीनियर IPS अधिकारी की अगुवाई में दोबारा होगी मामले की जांच

➤ पिता संजय कुमार बोले- कोर्ट के फैसले से न्याय की उम्मीद फिर जगी


हरियाणा के भिवानी की 19 वर्षीय प्ले-स्कूल टीचर मनीषा की मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। करीब एक साल से अधिक समय तक चली जांच के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मनीषा की मौत को आत्महत्या बताते हुए अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, लेकिन परिवार की आपत्तियों के बाद पंचकूला की विशेष CBI अदालत ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। शनिवार को आए अदालत के फैसले ने मामले की जांच को नया मोड़ दे दिया है। अब एक वरिष्ठ IPS अधिकारी की अगुवाई में CBI दोबारा जांच करेगी, जिससे परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद फिर से जगी है।

मनीषा का शव 13 अगस्त 2025 को भिवानी जिले के सिंघानी गांव के खेतों में मिला था। शुरुआती जांच के बाद 18 अगस्त 2025 को पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला बताया था। इस निष्कर्ष के बाद प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए थे। परिवार और स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी। इसके बाद 26 अगस्त 2025 को जांच CBI को सौंप दी गई थी।

CBI ने मामले की जांच पूरी करने के बाद 12 अगस्त 2026 को पंचकूला की विशेष अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में मनीषा की मौत को आत्महत्या बताया था। हालांकि, मनीषा के पिता संजय कुमार और उनके वकीलों ने जांच के निष्कर्षों पर सवाल उठाते हुए अदालत में रिपोर्ट का विरोध किया। परिवार का कहना था कि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और परिस्थितियों की सही तरीके से पड़ताल नहीं की गई है।

सुसाइड नोट और FSL रिपोर्ट पर परिवार ने उठाए सवाल

परिवार की ओर से अदालत में दाखिल याचिका में कथित सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग, फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की रिपोर्ट और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए। परिजनों का तर्क था कि घटनास्थल से मिले तथ्य मौत को आत्महत्या मानने के निष्कर्ष से मेल नहीं खाते। परिवार ने जांच के विभिन्न पहलुओं की दोबारा पड़ताल कराने की मांग की थी।

अदालत ने परिवार की आपत्तियों पर सुनवाई करते हुए CBI की अंतिम रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया और मामले की नए सिरे से जांच के आदेश दिए। अब क्लोजर रिपोर्ट CBI को वापस भेजी जाएगी। जांच की निगरानी एक वरिष्ठ IPS अधिकारी करेंगे। नई जांच में पहले से जुटाए गए सबूतों, FSL रिपोर्ट और घटनास्थल से जुड़े तथ्यों की दोबारा गहनता से पड़ताल की जाएगी।

पिता संजय बोले- अब न्याय मिलने की उम्मीद जगी

अदालत के फैसले के बाद मनीषा के पिता संजय कुमार ने राहत जताई। उन्होंने कहा कि CBI ने करीब डेढ़ साल की जांच के बाद बेटी की मौत को आत्महत्या बताते हुए क्लोजर रिपोर्ट अदालत में पेश की थी। परिवार ने इस रिपोर्ट को चुनौती दी थी, क्योंकि वे जांच के निष्कर्षों से संतुष्ट नहीं थे।

संजय कुमार के मुताबिक, अदालत के इस फैसले के बाद परिवार को एक बार फिर न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। परिवार शुरू से ही बेटी की मौत को आत्महत्या मानने से इनकार करता रहा है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करता रहा है।

पहले भी क्लोजर रिपोर्ट पर परिवार ने जताई थी नाराजगी

CBI की क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने की जानकारी मिलने के बाद भी मनीषा के पिता ने सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि अदालत में उन्हें बताया गया था कि CBI ने अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट में मौत को आत्महत्या घोषित किया है। हालांकि, परिवार का कहना था कि उन्हें ऐसा कोई ठोस कारण समझ नहीं आया, जिसके आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुंचा गया।

अब विशेष अदालत के आदेश के बाद मामले की जांच नए सिरे से होगी। हालांकि, दोबारा जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और CBI किन निष्कर्षों तक पहुंचती है, यह आगे की जांच पर निर्भर करेगा। फिलहाल अदालत के फैसले ने मनीषा की मौत से जुड़े सवालों की पड़ताल का रास्ता फिर खोल दिया है।