520 रुपये भी नहीं हैं सरकार के पास? 7.5 लाख कर्मचारियों के DA-DR बकाया पर हाईकोर्ट सख्त

पंजाब के 7.5 लाख कर्मचारियों के डीए-डीआर बकाया पर हाईकोर्ट सख्त हुआ। 520 रुपये की कमी पर सवाल उठाते हुए मुख्य सचिव को 5 नवंबर को तलब किया।

520 रुपये भी नहीं हैं सरकार के पास? 7.5 लाख कर्मचारियों के DA-DR बकाया पर हाईकोर्ट सख्त

हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से पूछा- क्या 520 रुपये भी नहीं हैं, जो सुप्रीम कोर्ट में अपील अटकी हुई है
➤ डीए-डीआर के बकाया भुगतान से करीब 7.5 लाख कर्मचारी और पेंशनर प्रभावित
➤ मुख्य सचिव केएपी सिन्हा को 5 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश

चंडीगढ़। पंजाब के कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) के बकाया भुगतान के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सरकार कर्मचारियों को उनके कानूनी अधिकारों से वंचित नहीं रख सकती। सुप्रीम कोर्ट में अपील की प्रक्रिया पूरी करने में हो रही देरी पर सवाल उठाते हुए पीठ ने पूछा कि क्या पंजाब सरकार के पास 520 रुपये भी नहीं हैं, जिसके कारण अपील की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।

हाईकोर्ट डीए-डीआर के बकाया भुगतान से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहा था। इससे पहले कोर्ट ने पंजाब सरकार को कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाया भुगतान के संबंध में निर्देश दिए थे। राज्य सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन अपील की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री की आपत्तियों के कारण आगे नहीं बढ़ सकी।

इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब मामला कर्मचारियों के कानूनी अधिकारों से जुड़ा है, तो अपील की प्रक्रिया पूरी करने में इतनी देरी क्यों हो रही है। कोर्ट ने 520 रुपये की कोर्ट फीस से जुड़ी कमी का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि इतनी छोटी राशि और औपचारिकता के कारण अपील क्यों अटकी हुई है। पीठ ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए।

5 नवंबर को मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश

सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से एडवोकेट विकास सिंह ने पक्ष रखा। कोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों के कानूनी अधिकारों और सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। कर्मचारियों को उनके वैध अधिकारों से वंचित नहीं रखा जा सकता।

पीठ ने पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा को इस मामले में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही उन्हें 5 नवंबर को हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए कहा गया है। कोर्ट ने सरकार से मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

7.5 लाख कर्मचारियों पर पड़ रहा असर

इससे पहले हुई सुनवाई में कर्मचारियों की ओर से पेश एडवोकेट ने आरोप लगाया था कि आगामी विधानसभा चुनाव और आदर्श आचार संहिता लागू होने की संभावना को देखते हुए मामले को टालने की कोशिश की जा रही है। कर्मचारियों की ओर से कहा गया कि सरकार के रवैये के कारण करीब 7.5 लाख कर्मचारी प्रभावित हो रहे हैं।

डीए और डीआर के बकाया भुगतान का मामला लंबे समय से लंबित है। ऐसे में हाईकोर्ट ने सरकार की ओर से अपील की प्रक्रिया पूरी करने में हो रही देरी पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट की सख्ती के बाद अब मुख्य सचिव को हलफनामा दाखिल करने के साथ व्यक्तिगत रूप से भी पेश होना होगा।

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद बुजुर्ग को मिला पेंशन का बकाया

इसी मामले से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में हाईकोर्ट की सख्ती के बाद 80 वर्ष से अधिक उम्र के जगदीश राज अरोड़ा को उनकी दिवंगत पत्नी की पेंशन का बकाया मिल गया। वर्ष 2007 से लंबित भुगतान पाने के लिए उन्हें करीब दो दशक तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़े थे। हाईकोर्ट के 18 सितंबर के आदेश के 10 दिन बाद, 28 सितंबर को पूरी राशि उनके बैंक खाते में जमा करा दी गई।

न्यायमूर्ति कुलदीप तिवारी की पीठ पंजाब सरकार के खिलाफ अरोड़ा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उन्होंने अपनी पत्नी सुदर्शन कुमारी की पेंशन का बकाया जारी कराने की मांग की थी। उनकी पत्नी गुरदासपुर में खंड प्राथमिक शिक्षा अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुई थीं।

याचिका में बताया गया था कि वर्ष 2007 से पेंशन का बकाया नहीं दिया गया। इस दौरान संबंधित अधिकारी भुगतान की जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालते रहे। अधिकारियों ने अरोड़ा के हक पर विवाद नहीं किया, इसके बावजूद उनकी पत्नी की पेंशन का बकाया लंबे समय तक अटका रहा।

18 सितंबर को कोर्ट ने दिए थे सख्त आदेश

इस मामले में 18 सितंबर को हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि चार संबंधित सरकारी और बैंक अधिकारी पूर्व अनुमति के बिना अपना वेतन नहीं निकाल सकेंगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि पेंशन का बकाया जारी कराने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने तक उन्हें वेतन का लाभ नहीं मिलेगा।

कोर्ट के अनुसार, 3 मई 2007 से 31 जुलाई 2021 तक की अवधि के लिए बकाया राशि 45 हजार 981 रुपये की दर से निर्धारित थी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद 28 सितंबर को पूरी राशि जगदीश राज अरोड़ा के बैंक खाते में जमा करा दी गई।