हरियाणा में गन्ने के रेट पर किसानों का विरोध, ₹600 प्रति क्विंटल की मांग,5 नवंबर को बैठक

हरियाणा में गन्ने का भाव ₹600 प्रति क्विंटल करने की मांग तेज, चढ़ूनी किसान यूनियन ने 5 नवंबर को कुरुक्षेत्र में बैठक बुलाई, विरोध की रणनीति बनेगी।

हरियाणा में गन्ने के रेट को लेकर किसानों में नाराजगी, ₹600 प्रति क्विंटल करने की मांग

➤ भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने 5 नवंबर को कुरुक्षेत्र में बुलाई बैठक, आंदोलन की रणनीति होगी तय

➤ किसान संगठनों ने विरोध की तैयारी की, बोले- खेती की लागत बढ़ी लेकिन फसल का उचित भाव नहीं मिल रहा

हरियाणा में गन्ने के भाव को लेकर किसानों और किसान संगठनों में नाराजगी बढ़ने लगी है। राज्य सरकार की ओर से अगले 2 वर्षों के लिए गन्ने का रेट बढ़ाकर ₹450 प्रति क्विंटल करने के फैसले को किसान संगठनों ने नाकाफी बताया है। सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए गन्ने का भाव ₹430 और 2027-28 के लिए ₹450 प्रति क्विंटल तय किया है। इस तरह 2 वर्षों में कुल ₹35 की बढ़ोतरी की गई है। लेकिन किसान संगठन गन्ने का भाव ₹600 प्रति क्विंटल करने की मांग पर अड़े हैं।

इस मुद्दे पर विरोध की रणनीति तैयार करने के लिए भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने 5 नवंबर को सुबह 11 बजे कुरुक्षेत्र में बैठक बुलाई है। इसमें गन्ने के भाव को लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी। दूसरे किसान संगठन भी इस मुद्दे पर एकजुट होकर विरोध दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि डीजल, खाद, दवाइयों, सिंचाई, मजदूरी और कृषि उपकरणों की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सरकार की ओर से तय किया गया मौजूदा भाव खेती की बढ़ती लागत के मुकाबले पर्याप्त नहीं है।

सरकार ने दो साल के लिए तय किया गन्ने का रेट, किसान संगठनों ने बताया नाकाफी

हरियाणा सरकार ने गन्ने के भाव में अगले 2 वर्षों के लिए बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है। इसके तहत वर्ष 2026-27 के लिए गन्ने का रेट ₹430 प्रति क्विंटल और वर्ष 2027-28 के लिए ₹450 प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।

सरकार के इस फैसले के अनुसार, दो वर्षों में गन्ने के भाव में कुल ₹35 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, किसान संगठन इस बढ़ोतरी से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि खेती की लागत में लगातार इजाफा हो रहा है, लेकिन किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा।

किसान संगठनों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में गन्ने का भाव ₹600 प्रति क्विंटल से कम नहीं होना चाहिए। इसी मांग को लेकर अब किसान संगठनों ने विरोध की तैयारी शुरू कर दी है।

₹600 से कम भाव किसी भी हालत में मंजूर नहीं: राकेश बैंस

भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के प्रवक्ता राकेश बैंस ने कहा कि गन्ने के भाव में मात्र ₹15 की बढ़ोतरी किसानों के साथ अन्याय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ₹600 प्रति क्विंटल से कम भाव किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

बैंस के अनुसार, किसानों को उनकी फसल का लाभकारी मूल्य नहीं मिलने के कारण धीरे-धीरे गन्ने की खेती से दूरी बनानी पड़ रही है। यदि यही स्थिति बनी रही तो भविष्य में गन्ने का रकबा और उत्पादन और घट सकता है।

उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ किसानों को गन्ने की खेती बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहती है, लेकिन दूसरी तरफ उन्हें उचित भाव देने से पीछे हट रही है। ऐसे में किसानों के सामने गन्ने की खेती जारी रखने को लेकर आर्थिक चुनौती खड़ी हो रही है।

5 नवंबर को कुरुक्षेत्र में किसान यूनियन की बैठक, तय होगी आगे की रणनीति

गन्ने के भाव को लेकर किसानों की नाराजगी के बीच भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने 5 नवंबर को सुबह 11 बजे कुरुक्षेत्र में बैठक बुलाई है।

इस बैठक में गन्ने के मौजूदा भाव, किसानों की मांग और सरकार के फैसले के खिलाफ आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। यूनियन के पदाधिकारी बैठक में तय करेंगे कि मांग को लेकर किस तरह विरोध दर्ज कराया जाए।

वहीं, दूसरे किसान संगठन भी इस मुद्दे पर एकजुट होकर विरोध करने की तैयारी में हैं। किसानों का कहना है कि जब खेती की लागत लगातार बढ़ रही है तो फसल का भाव भी उसी हिसाब से मिलना चाहिए।

डीजल से लेकर खाद और मजदूरी तक बढ़ी लागत, किसानों की आय पर दबाव

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र लाठर ने कहा कि सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, लेकिन किसानों की आय दोगुनी नहीं हुई। इसके उलट खेती की लागत जरूर दोगुनी हो गई है।

उन्होंने बताया कि डीजल, दवाइयों, सिंचाई, खाद, मजदूरी और कृषि उपकरणों के दामों में व्यापक बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद किसानों को उनकी मेहनत और लागत के हिसाब से गन्ने का उचित भाव नहीं मिल रहा है।

डॉ. लाठर के अनुसार, महंगाई लगातार बढ़ रही है और चीनी उद्योग अन्य उत्पादों से भी आर्थिक लाभ कमा रहा है। दूसरी ओर गन्ना किसान अपनी फसल का उचित मूल्य पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

गन्ने का रकबा और उत्पादन घटने की आशंका, किसानों को उचित भाव मिलने की मांग

किसान संगठनों का कहना है कि गन्ने की खेती में लागत बढ़ने और अपेक्षित लाभ नहीं मिलने से किसान इस फसल से दूरी बना सकते हैं। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के प्रवक्ता राकेश बैंस ने भी आशंका जताई है कि यही स्थिति रही तो भविष्य में गन्ने का रकबा और उत्पादन दोनों घट सकते हैं।

वहीं, पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र लाठर ने भी खेती की बढ़ती लागत और किसानों को उचित मूल्य नहीं मिलने का मुद्दा उठाया है। ऐसे में गन्ने के भाव को लेकर सरकार और किसान संगठनों के बीच टकराव बढ़ने के संकेत हैं।

अब सभी की नजरें 5 नवंबर को कुरुक्षेत्र में होने वाली किसान यूनियन की बैठक पर टिकी हैं। इस बैठक में तय होगा कि ₹600 प्रति क्विंटल की मांग को लेकर किसान संगठन आगे किस तरह की रणनीति अपनाते हैं।