JE को 4 साल की जेल, ठेकेदार से दो बार मांगे थे 14-14 हजार रुपये

फरीदाबाद में नगर निगम के तत्कालीन JE टेकचंद को ठेकेदार से रिश्वत मांगने के मामले में अदालत ने चार साल की जेल और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

JE को 4 साल की जेल, ठेकेदार से दो बार मांगे थे 14-14 हजार रुपये

➤ नगर निगम के तत्कालीन JE टेकचंद को कोर्ट ने सुनाई 4 साल की कैद

➤ ठेकेदार का बिल पास करने और MB पूरी करने के नाम पर मांगी थी रिश्वत

➤ 14 हजार रुपये लेते ACB विजिलेंस टीम ने रंगे हाथ किया था गिरफ्तार


फरीदाबाद। सरकारी कामकाज में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए नगर निगम के तत्कालीन जूनियर इंजीनियर (JE) टेकचंद को चार साल की जेल की सजा सुनाई है। ठेकेदार का बिल पास करने और जरूरी दस्तावेज पूरे करने के बदले रिश्वत मांगने वाले आरोपी को एडिशनल सेशन जज अशोक कुमार की अदालत ने दोषी करार दिया। कोर्ट ने उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। आरोपी ने ठेकेदार से दो अलग-अलग मौकों पर 14-14 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। दूसरी बार रिश्वत लेते समय स्टेट विजिलेंस ब्यूरो की टीम ने जाल बिछाकर उसे रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।

पानी की टंकी तोड़ने का मिला था ठेका

स्टेट विजिलेंस ब्यूरो के अनुसार, शिकायतकर्ता राहुल ठेकेदारी का काम करता था। मई 2019 में उसे फरीदाबाद के सेक्टर-8 में पुरानी पानी की टंकी तोड़ने का ठेका मिला था। ठेकेदार ने निर्धारित काम पूरा कर दिया था। इसके बाद भुगतान प्राप्त करने के लिए बिल तैयार होना था।

बिल की प्रक्रिया पूरी करने के लिए मेजरमेंट बुक (MB) का पूरा होना जरूरी था। आरोप था कि तत्कालीन JE टेकचंद ने MB पूरी करने के बदले ठेकेदार से 14 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी। इस दौरान पहली बार भी ठेकेदार से रकम लेने का आरोप लगा था।

बिल पर हस्ताक्षर करने के लिए फिर मांगे 14 हजार

मेजरमेंट बुक पूरी होने के बाद जब ठेकेदार का भुगतान संबंधी बिल तैयार हुआ तो JE ने फाइल पर हस्ताक्षर करने के बदले दोबारा 14 हजार रुपये की मांग कर दी। ठेकेदार ने रिश्वत देने से इनकार किया तो आरोपी ने फाइल पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया।

सरकारी काम पूरा होने के बावजूद बिल की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने और दोबारा रिश्वत मांगे जाने से परेशान ठेकेदार ने विजिलेंस अधिकारियों से संपर्क किया। उसने पूरे मामले की शिकायत देकर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

विजिलेंस ने जाल बिछाकर किया गिरफ्तार

शिकायत मिलने के बाद 19 मई 2020 को स्टेट विजिलेंस ब्यूरो की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई की। टीम ने ठेकेदार के माध्यम से आरोपी को रिश्वत की रकम दिलवाई। इसी दौरान JE टेकचंद को 14 हजार रुपये लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया।

विजिलेंस ने मामले की जांच पूरी करने के बाद 1 सितंबर 2021 को अदालत में चालान पेश किया था। इसके बाद मामले की सुनवाई के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया गया।

अदालत ने सुनाई चार साल की सजा

लंबी कानूनी प्रक्रिया और सुनवाई के बाद एडिशनल सेशन जज अशोक कुमार की अदालत ने तत्कालीन JE टेकचंद को रिश्वतखोरी के मामले में दोषी ठहराया। अदालत ने उसे चार साल की कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।

इस फैसले से सरकारी विभागों में रिश्वत लेकर फाइलें रोकने और भुगतान संबंधी प्रक्रियाओं में अनावश्यक अड़चनें डालने वाले कर्मचारियों के लिए सख्त संदेश गया है।