नए लक्ष्मण पर पुराने लक्ष्मण की राय,रवि दुबे की तारीफ, संगीत पर जताई निराशा
सुनील लहरी ने नई रामायण में रवि दुबे के लक्ष्मण किरदार की तारीफ की। हालांकि, फिल्म के संगीत और मिथिला-अयोध्या के लोकल फ्लेवर पर अपनी राय भी रखी।
सुनील लहरी ने रवि दुबे के लक्ष्मण किरदार की तारीफ की
➤ बोले- नई रामायण में लक्ष्मण के चरित्र में मासूमियत और इंटेंसिटी झलक रही है
➤ फिल्म के संगीत से पूरी तरह संतुष्ट नहीं, मिथिला और अयोध्या का लोकल फ्लेवर शामिल करने की दी सलाह
नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी फिल्म 'रामायण' 05 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी माता सीता और रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका में नजर आ रहे हैं। फिल्म रिलीज होने के बाद रामानंद सागर के चर्चित धारावाहिक 'रामायण' में लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले अभिनेता सुनील लहरी ने रवि दुबे की अदाकारी पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने नई फिल्म में लक्ष्मण के चरित्र को लेकर सकारात्मक विचार साझा किए हैं।
सुनील लहरी के मुताबिक, नई रामायण में लक्ष्मण के किरदार में जिस मासूमियत और इंटेंसिटी की जरूरत है, वह रवि दुबे के अभिनय में दिखाई दे रही है। उन्होंने फिल्म की सफलता के लिए पूरी टीम को शुभकामनाएं भी दी हैं। हालांकि, फिल्म के संगीत को लेकर उनकी राय थोड़ी अलग रही। सुनील लहरी ने कहा कि उन्होंने फिल्म का जो संगीत सुना है, उसके कुछ गानों ने उन्हें थोड़ा निराश किया है।
रवि दुबे के अभिनय में दिखी लक्ष्मण के चरित्र की मासूमियत
रामानंद सागर की 'रामायण' में सुनील लहरी ने लक्ष्मण की भूमिका निभाकर दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई थी। धारावाहिक में उनके अभिनय की आज भी चर्चा होती है। उनके चेहरे पर लक्ष्मण के चरित्र की मासूमियत के साथ-साथ क्रोध और आक्रामकता वाले दृश्यों में भी भावों की गहराई दिखाई देती थी। यही वजह है कि नए दौर में लक्ष्मण की भूमिका निभाने वाले अभिनेता रवि दुबे के अभिनय पर उनकी प्रतिक्रिया को खास माना जा रहा है।
फिल्म 'रामायण' की रिलीज के दिन सुनील लहरी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट साझा किया। इसमें उन्होंने रवि दुबे की भूमिका की तारीफ करते हुए लिखा, 'नई रामायण में लक्ष्मण के चरित्र में जो मासूमियत और इंटेंसिटी झलकनी चाहिए, वह झलक रही है। नई रामायण को सफलता के लिए हार्दिक शुभकामनाएं।'
उनकी इस प्रतिक्रिया से साफ है कि उन्हें रवि दुबे के अभिनय में लक्ष्मण के चरित्र के जरूरी भाव नजर आए हैं।
फिल्म के संगीत से पूरी तरह खुश नहीं हैं सुनील लहरी
सुनील लहरी ने फिल्म के संगीत को लेकर भी अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि रामायण केवल एक महाकाव्य नहीं, बल्कि भावना और विश्वास से जुड़ी धरोहर है। इसलिए इससे जुड़े हर पहलू का ध्यान रखना जरूरी है।
उन्होंने कहा, 'रामायण महाकाव्य एक भावना और विश्वास है। इस धरोहर का हम सबको पूरा ध्यान रखना चाहिए।' सुनील लहरी ने नितेश तिवारी की तारीफ करते हुए कहा कि वह बहुत अच्छे निर्देशक हैं और फिल्म से जुड़े सभी कलाकार सक्षम हैं।
हालांकि, संगीत को लेकर उन्होंने अपनी असहमति भी जाहिर की। उनका कहना है कि इस तरह के महाकाव्य में संगीत की अहम भूमिका होती है। उन्होंने फिल्म का जो भी संगीत सुना है, उसमें कुछ गानों ने उन्हें थोड़ा निराश किया है।
मिथिला और अयोध्या का लोकल फ्लेवर संगीत में होना चाहिए
सुनील लहरी ने संगीत को लेकर अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि रामायण की कहानी से जुड़े स्थानों की सांस्कृतिक पहचान गीतों में भी महसूस होनी चाहिए। उनके अनुसार, मिथिला और अयोध्या का लोकल फ्लेवर इन गीतों के पीछे के संगीत में शामिल होना चाहिए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह खुद को इस विषय का कोई अधिकारी नहीं मानते और यह उनकी निजी राय है। सुनील लहरी ने कहा, 'हालांकि, मैं कोई अथॉरिटी नहीं हूं, लेकिन यह मेरे विचार हैं।'
इसके साथ ही उन्होंने भगवान से प्रार्थना की कि फिल्म को बहुत सफलता मिले। उन्होंने कहा कि इस फिल्म का सफल होना बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे बहुत लोगों की रोजी-रोटी चल रही है।
यश के रावण और राघव जुयाल के मेघनाद किरदार की भी चर्चा
फिल्म 'रामायण' का निर्माण नमित मल्होत्रा और यश ने किया है। इसमें यश रावण की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म में उनके किरदार को लेकर भी काफी चर्चा हो रही है। वहीं, अभिनेता अरुण गोविल राजा दशरथ की भूमिका में नजर आ रहे हैं।
फिल्म में राघव जुयाल ने मेघनाद का किरदार निभाया है। उनके अभिनय की भी चर्चा हो रही है। फिल्म में राघव जुयाल का रौद्र रूप दिखाया गया है, जिसे लेकर दर्शकों के बीच दिलचस्पी बनी हुई है।
इस तरह फिल्म रिलीज होने के साथ ही इसके कलाकारों के अभिनय और संगीत को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। सुनील लहरी ने जहां रवि दुबे के लक्ष्मण वाले किरदार की सराहना की है, वहीं संगीत में मिथिला और अयोध्या की सांस्कृतिक झलक को और बेहतर तरीके से शामिल करने की जरूरत भी बताई है।
Akhil Mahajan