राहुल गांधी ने PM मोदी को फिर दी खुली बहस की चुनौती: पूछा- कौन है देशद्रोही और किसका है विदेशी कनेक्शन? अमेरिकी डील से अडानी केस तक उठाए सवाल
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली बहस की चुनौती दी। देशद्रोह, विदेशी कनेक्शन, अमेरिकी डील, अडानी केस और वित्तीय व्यवस्था पर उठाए सवाल।
➤ राहुल गांधी ने 24 घंटे के भीतर दूसरी बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमने-सामने बहस की चुनौती दी
➤ विदेशी ताकतों से संबंध और देशद्रोह के आरोपों पर सार्वजनिक चर्चा की मांग, मोहन भागवत को जज बनाने का भी दिया सुझाव
➤ अमेरिका के साथ डील, वित्तीय व्यवस्था, अडानी केस और एपस्टीन का मुद्दा भी बहस में शामिल करने की बात कही
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बार फिर खुली बहस की चुनौती देकर सियासी हलचल बढ़ा दी है। राहुल गांधी ने सवाल उठाया है कि आखिर देशद्रोही कौन है और विदेशी ताकतों से संबंध किसके हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि वह अपनी पसंद का कोई भी मंच और समय तय कर लें, दोनों आमने-सामने बैठकर देश के सामने सभी मुद्दों पर खुलकर चर्चा कर सकते हैं। राहुल गांधी ने यह चुनौती एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार नहीं, बल्कि अपनी पिछली चुनौती के करीब 24 घंटे बाद दोहराई है। उन्होंने बहस में देश की वित्तीय व्यवस्था, भारत-अमेरिका डील, अडानी मामले और विदेशी कनेक्शन से जुड़े सवाल उठाने की बात भी कही है। यहां तक कि उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत को बहस का निर्णायक बनाने का सुझाव भी दिया।
24 घंटे बाद राहुल गांधी ने फिर दी चुनौती
राहुल गांधी ने 3 नवंबर को सोशल मीडिया पर वीडियो संदेश जारी कर प्रधानमंत्री मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी पहली चुनौती को 24 घंटे बीत चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री विपक्ष को देशद्रोही बताते हैं तो इस मुद्दे पर आमने-सामने बैठकर बहस होनी चाहिए।
राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री अपनी पसंद का कोई भी स्थान और मंच चुन सकते हैं। बहस में मीडिया और देश के युवा भी मौजूद रहें। दोनों नेता एक टेबल पर आमने-सामने बैठें और जनता के सामने सवालों के जवाब दें।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री चाहें तो बहस के लिए किसी भी व्यक्ति को निर्णायक बना सकते हैं। राहुल ने इस संबंध में मोहन भागवत का नाम भी सुझाया। उनका कहना था कि बहस का उद्देश्य यह स्पष्ट करना होना चाहिए कि देशद्रोही कौन है और विदेशी ताकतों से किसके संबंध हैं।
विदेशी कनेक्शन को लेकर पीएम पर लगाए आरोप
राहुल गांधी ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विदेशी मदद से सत्ता में आने और बने रहने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि देश की वित्तीय व्यवस्था पर विदेशी ताकतों का प्रभाव है और विदेशी सोशल मीडिया भी प्रधानमंत्री का समर्थन करता है।
राहुल गांधी ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री विपक्ष पर विदेशी ताकतों से संबंध होने के आरोप लगाते हैं तो उन्हें भी इस मुद्दे पर सार्वजनिक बहस के लिए सामने आना चाहिए। उन्होंने कहा कि बहस से आरोपों की सच्चाई सामने आ सकेगी।
हालांकि, विदेशी समर्थन और कथित कनेक्शन को लेकर राहुल गांधी की ओर से लगाए गए ये राजनीतिक आरोप हैं। इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि उनके दावों और चुनौती के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
अमेरिका के साथ डील और अडानी केस पर भी होंगे सवाल
राहुल गांधी ने प्रस्तावित बहस का दायरा केवल देशद्रोह और विदेशी कनेक्शन तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने कहा कि चर्चा में देश की वित्तीय व्यवस्था और वित्तीय ढांचे से जुड़े सवाल भी शामिल होने चाहिए।
उन्होंने भारत-अमेरिका डील को लेकर सवाल उठाए कि यह समझौता कैसे और क्यों हुआ, इसे इतनी जल्दी क्यों पूरा किया गया और प्रधानमंत्री ने इस प्रक्रिया में कैबिनेट को जानकारी क्यों नहीं दी। इसके अलावा उन्होंने अडानी मामले और एपस्टीन का भी जिक्र किया।
राहुल गांधी का कहना है कि इन सभी मुद्दों पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए, ताकि देश के सामने स्थिति स्पष्ट हो सके।
बोले- मेरे खिलाफ करीब 45 मानहानि के मामले
राहुल गांधी ने अपने बयान में मानहानि के मामलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग मुद्दों पर उनके खिलाफ मानहानि के मुकदमे दर्ज किए गए हैं और उनकी संख्या करीब 45 है।
उन्होंने सवाल उठाया कि विदेशी कनेक्शन से जुड़े उनके आरोपों पर मानहानि का मामला क्यों नहीं दर्ज किया गया। राहुल ने चुनौती देते हुए कहा कि यदि इस मुद्दे पर भी कानूनी कार्रवाई होती है तो वहां भी खुलकर चर्चा हो सकती है।
दो नवंबर को भी प्रधानमंत्री पर साधा था निशाना
राहुल गांधी ने 2 नवंबर को भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री विदेशी मदद से सत्ता में आए और विदेशी मदद से ही पद पर बने हुए हैं।
राहुल ने यह भी दावा किया था कि देश की वित्तीय व्यवस्था विदेशी समर्थन और नियंत्रण से प्रभावित है। इसी बयान के साथ उन्होंने प्रधानमंत्री को किसी भी मंच पर खुली बहस की चुनौती दी थी।
यह विवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान के बाद सामने आया, जिसमें उन्होंने विपक्ष को नीतियों का विरोध करने के बजाय बाधाएं पैदा करने वाला बताया था। राष्ट्रीय एकता दिवस के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कुछ ताकतों पर देश को बांटने की कोशिश करने और विदेशी तत्वों से कथित संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए थे।
अब बहस की चुनौती पर सबकी नजर
राहुल गांधी की लगातार दूसरी चुनौती के बाद अब राजनीतिक चर्चा का केंद्र यह बन गया है कि क्या प्रधानमंत्री और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के बीच इस तरह की सार्वजनिक बहस होगी। राहुल गांधी ने इसके लिए मंच, समय और निर्णायक चुनने की जिम्मेदारी भी प्रधानमंत्री पर छोड़ने की बात कही है।
फिलहाल राहुल गांधी की ओर से बहस का प्रस्ताव और प्रधानमंत्री को लेकर लगाए गए आरोप राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा हैं। इस प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री की सहमति या किसी निर्धारित बहस की तारीख की जानकारी सामने नहीं आई है।
देशद्रोह, विदेशी कनेक्शन, भारत-अमेरिका डील और आर्थिक व्यवस्था जैसे मुद्दों पर राहुल गांधी ने बहस की मांग उठाई है। अब देखना होगा कि इस चुनौती पर सत्तापक्ष की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और क्या यह राजनीतिक विवाद किसी सार्वजनिक चर्चा तक पहुंचता है।
Akhil Mahajan