हरियाणा कैबिनेट के 7 बड़े फैसले: जमीन नीति बदली, ट्रैवल एजेंटों पर शिकंजा, 26 नवंबर को विधानसभा सत्र

हरियाणा कैबिनेट ने सात एजेंडों को मंजूरी दी। 26 नवंबर को विधानसभा का विशेष सत्र होगा, ट्रैवल एजेंट पंजीकरण अनिवार्य और नई लैंड पूलिंग नीति लागू होगी।

हरियाणा कैबिनेट के 7 बड़े फैसले: जमीन नीति बदली, ट्रैवल एजेंटों पर शिकंजा, 26 नवंबर को विधानसभा सत्र

➤ संविधान दिवस पर 26 नवंबर को बुलाया जाएगा हरियाणा विधानसभा का विशेष सत्र

➤ ट्रैवल एजेंटों का पंजीकरण अनिवार्य, नई लैंड पूलिंग पॉलिसी-2026 को भी मंजूरी

➤ 629 गौशालाओं को 86 करोड़ 95 लाख रुपये की सहायता राशि देने की जानकारी


हरियाणा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में प्रदेश से जुड़े कई अहम फैसलों पर मुहर लगाई गई। बैठक में कुल सात एजेंडे रखे गए और मुख्यमंत्री के अनुसार सभी को मंजूरी प्रदान कर दी गई। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए फैसलों की जानकारी दी। इनमें संविधान दिवस के अवसर पर 26 नवंबर को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने, ट्रैवल एजेंटों के कामकाज को नियंत्रित करने के लिए नए नियम लागू करने, कॉलेज कैडर के सेवा नियमों में संशोधन और नई लैंड पूलिंग पॉलिसी-2026 को मंजूरी देने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय शामिल हैं। इसके अलावा ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स यानी टीडीआर नीति में बदलाव और गौशालाओं को दी जा रही आर्थिक सहायता से जुड़े कदमों की भी जानकारी दी गई।

26 नवंबर को हरियाणा विधानसभा का विशेष सत्र

मंत्रिमंडल ने संविधान दिवस के अवसर पर 26 नवंबर को हरियाणा विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लिया है। इस विशेष सत्र के माध्यम से संविधान दिवस के महत्व और संवैधानिक मूल्यों से जुड़े विषयों पर चर्चा की जाएगी।

ट्रैवल एजेंटों के लिए पंजीकरण अनिवार्य

मंत्रिमंडल ने हरियाणा ट्रैवल एजेंट पंजीकरण एवं विनियमन नियम, 2026 को मंजूरी प्रदान की है। इन नियमों का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को धोखाधड़ी करने वाले ट्रैवल एजेंटों, अवैध विदेश भर्ती, मानव तस्करी और डंकी रूट जैसी गैरकानूनी गतिविधियों से बचाना है।

नए नियम लागू होने के बाद प्रदेश में ट्रैवल एजेंट का कारोबार करने वाले सभी नए और पहले से काम कर रहे एजेंटों के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। प्रत्येक नए कार्यालय या शाखा के लिए अलग पंजीकरण करवाना पड़ेगा। इसके साथ ही एजेंटों को अपनी प्रत्येक सेवा श्रेणी के लिए भी अलग पंजीकरण लेना होगा।

इन सेवाओं में पासपोर्ट सेवाएं, टूर एवं ट्रैवल एजेंसी सेवाएं, स्टडी वीजा कंसल्टेंसी और टिकटिंग सेवाएं शामिल होंगी। पुलिस सत्यापन रिपोर्ट मिलने के बाद सक्षम प्राधिकारी 30 दिनों के भीतर पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करेगा। यह प्रमाणपत्र तीन वर्ष तक वैध रहेगा।

सरकार पंजीकृत ट्रैवल एजेंटों की जिला-वार सूची और उनके पंजीकरण प्रमाणपत्र अंत्योदय सरल पोर्टल के साथ गृह विभाग और पुलिस विभाग की आधिकारिक वेबसाइटों पर उपलब्ध करवाएगी। इससे विदेश जाने या यात्रा संबंधी सेवाएं लेने वाले लोगों को अधिकृत एजेंटों की जानकारी मिल सकेगी।

जूनियर लेक्चर असिस्टेंट की भर्ती और पदोन्नति के नियम बदले

मंत्रिमंडल ने हरियाणा एजुकेशनल कॉलेज कैडर (ग्रुप-सी) सेवा नियम, 1986 में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत जूनियर लेक्चर असिस्टेंट के पद पर सीधी भर्ती और पदोन्नति के लिए शैक्षणिक योग्यता तथा अनुभव की शर्तें निर्धारित की गई हैं।

अब इस पद के लिए अभ्यर्थी का भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, गणित या जीव विज्ञान विषयों के साथ 10+2 उत्तीर्ण होना अनिवार्य होगा।

सीधी भर्ती के मामले में मान्यता प्राप्त कॉलेज में लैबोरेटरी अटेंडेंट के रूप में पांच वर्ष का अनुभव जरूरी होगा। वहीं पदोन्नति के लिए 10+2 या समकक्ष योग्यता के साथ नियमित नियुक्ति के बाद लैबोरेटरी अटेंडेंट के रूप में पांच वर्ष का अनुभव निर्धारित किया गया है। सीधी भर्ती के लिए अभ्यर्थियों की आयु सीमा 18 से 42 वर्ष तय की गई है।

टीडीआर नीति में बदलाव, मूल्यांकन का नया आधार तय

मंत्रिमंडल ने 16 नवंबर 2021 को अधिसूचित ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (टीडीआर) नीति में संशोधनों को मंजूरी दी है। इसके तहत टीडीआर प्रमाणपत्र के मूल्यांकन की गणना के फार्मूले में बदलाव किया गया है।

अब संबंधित भूमि का मूल्यांकन आवेदन जमा करने की तारीख पर लागू औसत कलेक्टर दर के आधार पर किया जाएगा। जिस स्थान पर टीडीआर का उपयोग किया जाना है, वहां की भूमि का मूल्यांकन भी आवेदन जमा करने की तारीख पर लागू औसत कलेक्टर दर के अनुसार होगा।

संशोधित फार्मूला उन सभी लंबित आवेदनों पर भी लागू होगा, जिनमें टीडीआर उपयोग प्रमाणपत्र जारी करने की अनुमति नहीं दी गई है और उपयोग के लिए सैद्धांतिक मंजूरी भी प्रदान नहीं की गई है।

इसके अलावा टीडीआर प्रमाणपत्रों के उपयोग का दायरा भी बढ़ाया गया है। पहले इन प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल केवल उसी डेवलपमेंट प्लान में किया जा सकता था, जिसके लिए प्रमाणपत्र जारी किया गया था। अब इनका उपयोग उसी डेवलपमेंट प्लान के साथ-साथ प्रदेश की किसी भी कम संभावित विकास योजना में भी किया जा सकेगा।

नई लैंड पूलिंग पॉलिसी-2026 को मंजूरी

मंत्रिमंडल ने नई लैंड पूलिंग पॉलिसी-2026 को भी मंजूरी प्रदान की है। इस नीति का उद्देश्य विकास परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध करवाने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है।

नई नीति के तहत स्वीकृत लेआउट प्लान के अनुसार परियोजना के कुल बिक्री योग्य क्षेत्र का 50 प्रतिशत हिस्सा भू-मालिकों को और शेष 50 प्रतिशत हिस्सा विकास एजेंसी को दिया जाएगा। भू-मालिकों के हिस्से में से पात्रता के अनुसार कुछ हिस्सा वाणिज्यिक साइट के रूप में भी दिया जाएगा।

सरकार ने भू-मालिकों को मिलने वाले विकसित प्लॉट का न्यूनतम आकार भी निर्धारित किया है। इसके अनुसार आवासीय प्लॉट का न्यूनतम आकार 100 वर्ग मीटर, संस्थागत प्लॉट का 500 वर्ग मीटर और औद्योगिक प्लॉट का 250 वर्ग मीटर होगा।

लैंड एंटाइटलमेंट सर्टिफिकेट धारक अपने प्रमाणपत्रों को आपस में जोड़कर बड़े आकार के विकसित प्लॉट के लिए संयुक्त रूप से आवेदन कर सकेंगे। इससे एक से अधिक भू-मालिक मिलकर अपनी पात्रता के अनुसार बड़े प्लॉट का विकल्प चुन सकेंगे।

भू-मालिकों को आर्थिक सहायता देने के लिए प्रति एकड़ प्रति वर्ष एक लाख रुपये की अंतरिम वित्तीय सहायता देने का प्रावधान किया गया है। यह राशि भूमि के योगदान के अनुपात में चार वर्ष तक, सेल डीड के पंजीकरण की तारीख से देय होगी।

629 गौशालाओं को 86 करोड़ 95 लाख रुपये की सहायता

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश सरकार गौशालाओं के विकास और गोवंश संरक्षण के लिए लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसी दिशा में गौशालाओं को चारे और शेड निर्माण के लिए अनुदान राशि दी जाती है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, गत दिवस प्रदेश की 629 गौशालाओं को 86 करोड़ 95 लाख रुपये की राशि प्रदान की गई। सरकार का कहना है कि इस सहायता का उद्देश्य गौशालाओं में चारे की व्यवस्था और गोवंश के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाना है।


सातों एजेंडों को मिली मंजूरी

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कुल सात एजेंडे रखे गए थे और सभी को मंजूरी दी गई। पत्रकार वार्ता में सामने आए फैसलों में विधानसभा का विशेष सत्र, ट्रैवल एजेंटों का पंजीकरण, कॉलेज कैडर सेवा नियमों में संशोधन, टीडीआर नीति में बदलाव और नई लैंड पूलिंग पॉलिसी प्रमुख रहे। इसके साथ ही गौशालाओं को दी गई सहायता राशि की जानकारी भी साझा की गई।

➤ हरियाणा रोडवेज को मिलेंगी 500 नई बसें: प्रदेश सरकार ने हरियाणा रोडवेज के बेड़े में 500 पूर्ण निर्मित डीजल इंजन वाली नॉन-एसी बसें शामिल करने को मंजूरी दी है। ये सभी बसें नवीनतम BS-VI उत्सर्जन मानकों के अनुरूप होंगी। इसके साथ ही परिवहन व्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने के लिए 24 पूर्ण निर्मित डीजल इंजन वाले ट्रक और डीजल एग्जॉस्ट फ्लूइड भी खरीदा जाएगा।

➤ गुरुग्राम में दो फ्लाईओवर और एक अंडरपास बनेगा: शहर में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के लिए सेक्टर-45-46 और सेक्टर-51-52 के चौराहे पर फ्लाईओवर बनाए जाएंगे। इसके अलावा सेक्टर-85-86 और सेक्टर-89-90 के चौराहे पर भी फ्लाईओवर निर्माण को मंजूरी दी गई है। सेक्टर-27-29 और सेक्टर-43-44 के चौराहे पर अंडरपास बनाया जाएगा।

➤ जींद मेडिकल कॉलेज के लिए फर्नीचर खरीदा जाएगा: जींद जिले के गांव हैबतपुर में निर्माणाधीन संत शिरोमणि श्री धन्ना भगत जी राजकीय मेडिकल कॉलेज के लिए आवश्यक फर्नीचर की खरीद को मंजूरी दी गई है। इससे कॉलेज में जरूरी सुविधाओं को विकसित करने का काम आगे बढ़ेगा।

➤ रोहतक में शिक्षक आवासों का निर्माण पूरा होगा: स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में टाइप-II (जी-6) श्रेणी के 1300 वर्ग फुट वाले शिक्षक आवासों के शेष निर्माण कार्य को स्वीकृति दी गई है। इससे विश्वविद्यालय में शिक्षकों के लिए आवासीय सुविधाएं पूरी करने में मदद मिलेगी।

➤ पानीपत में बनेगा नया रेलवे ओवरब्रिज: जीटी रोड से डाहर होते हुए एनएच-709 तक मौजूदा रेलवे ओवरब्रिज के समानांतर नया रेलवे ओवरब्रिज बनाया जाएगा। इससे रेलवे लाइन के कारण प्रभावित होने वाले यातायात को सुचारू बनाने और वाहन चालकों को राहत देने में मदद मिलेगी।

➤ खरीद कमेटी के प्रस्तावों में 7.40 करोड़ रुपये बचे: हाई पावर्ड परचेज कमेटी की बैठक में सात प्रस्ताव रखे गए थे, जिनकी अनुमानित लागत 351.46 करोड़ रुपये थी। इनमें चार मामलों को री-टेंडर करने का निर्णय लिया गया, जबकि तीन प्रस्ताव 208.91 करोड़ रुपये की मूल अनुमानित लागत के मुकाबले 201.51 करोड़ रुपये में अंतिम किए गए। इससे करीब 7.40 करोड़ रुपये की बचत हुई।

➤ निर्माण कार्यों के प्रस्तावों में 4.56 करोड़ रुपये की बचत: हाई पावर्ड वर्क्स परचेज कमेटी में सात प्रस्तावों की अनुमानित लागत 250.36 करोड़ रुपये थी। इनमें एक मामले को री-टेंडर करने का निर्णय लिया गया, जबकि छह कार्यों को 227.74 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के मुकाबले 223.18 करोड़ रुपये में अंतिम रूप दिया गया। इससे लगभग 4.56 करोड़ रुपये की बचत हुई।

➤ दोनों कमेटियों में कुल करीब 12 करोड़ रुपये की बचत: खरीद और निर्माण से जुड़े प्रस्तावों पर बोलीदाताओं के साथ बातचीत के बाद कुल लगभग 11.96 करोड़ रुपये बचाए गए। बैठक में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल और लोक निर्माण मंत्री रणबीर गंगवा भी मौजूद रहे।