3 करोड़ की हकदार गोल्ड मेडलिस्ट को मिला 7.50 लाख का चेक, हरियाणा खेल विभाग ने रिकॉर्ड में पार्टिसिपेंट दिखाया

एशियन गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट कीर्ति शर्मा को हरियाणा में 3 करोड़ की जगह 7.50 लाख मिले। खेल विभाग ने रिकॉर्ड की गलती मानी, मंत्री ने कार्रवाई का भरोसा दिया।

3 करोड़ की हकदार गोल्ड मेडलिस्ट को मिला 7.50 लाख का चेक, हरियाणा खेल विभाग ने रिकॉर्ड में पार्टिसिपेंट दिखाया

एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाली कीर्ति शर्मा को 3 करोड़ की जगह मिला सिर्फ 7.50 लाख का चेक

➤ खेल विभाग के रिकॉर्ड में गोल्ड मेडलिस्ट को दिखाया पार्टिसिपेंट, अधिकारियों ने बताई क्लेरिकल मिस्टेक

➤ खेल मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने पूरा सम्मान दिलाने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई का दिया भरोसा

हरियाणा के खेल विभाग की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन करने वाली जींद के रिटोली गांव की तीरंदाज कीर्ति शर्मा को प्रदेश स्तरीय सम्मान समारोह में उनके हक की पुरस्कार राशि नहीं मिल पाई। विभाग के रिकॉर्ड में कीर्ति को गोल्ड मेडलिस्ट की जगह पार्टिसिपेंट यानी प्रतिभागी दिखा दिया गया। इसका नतीजा यह हुआ कि 3 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि की हकदार खिलाड़ी को केवल 7 लाख 50 हजार रुपये का चेक थमा दिया गया।

यह मामला 30 अक्टूबर को भिवानी में आयोजित प्रदेश स्तरीय सम्मान समारोह का है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सैनी ने एशियन और पैरा एशियन गेम्स के 132 खिलाड़ियों को कुल करीब 189.38 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि चेक के रूप में दी थी। इसी समारोह में रिकॉर्ड में हुई गलती के कारण कीर्ति शर्मा को पूरा पुरस्कार नहीं मिल सका।

मामला सामने आने के बाद खेल विभाग में हलचल मच गई है। अधिकारी इसे क्लेरिकल मिस्टेक बता रहे हैं और जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाल रहे हैं। मामला संज्ञान में आने के बाद खेल मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कीर्ति को जल्द पूरा सम्मान दिलाने का भरोसा दिया है। उन्होंने यह भी कहा है कि इस चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

सम्मान समारोह में अनदेखी से आहत कीर्ति ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

प्रदेश स्तरीय सम्मान समारोह में पूरा पुरस्कार नहीं मिलने से आहत कीर्ति शर्मा ने मुख्यमंत्री नायब सैनी को पत्र लिखकर अपनी बात रखी। पत्र में उन्होंने एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर हुए सम्मान का भी उल्लेख किया।

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एशियन गेम्स के पदक विजेता खिलाड़ियों को अपने आवास पर बुलाकर सम्मानित किया था। इस कार्यक्रम में जींद की नीरू ढांडा के साथ कीर्ति शर्मा भी शामिल थीं। दोनों खिलाड़ियों को प्रधानमंत्री की ओर से सम्मानित किया गया था।

कीर्ति ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में प्रदेश स्तरीय समारोह में सम्मान से वंचित रहने पर अपनी पीड़ा जाहिर की। उन्होंने बताया कि एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के बावजूद उन्हें दूसरे पदक विजेता खिलाड़ियों की तरह पुरस्कार राशि और सम्मान नहीं मिला। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि उन्हें भी दूसरे मेडल विजेता खिलाड़ियों की तरह सम्मान के साथ उनका हक दिलाया जाए।

मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा से फोन पर बताई अपनी पीड़ा

कीर्ति शर्मा ने सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा से भी टेलीफोन पर बातचीत कर अपने साथ हुई अनदेखी के बारे में बताया। उन्होंने मंत्री को जानकारी दी कि एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के बावजूद प्रदेश स्तरीय सम्मान समारोह में उन्हें निर्धारित पुरस्कार राशि नहीं मिली।

मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कीर्ति को भरोसा दिलाया कि उन्हें जल्द पूरा सम्मान दिलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड में हुई इस चूक के लिए जो भी अधिकारी जिम्मेदार होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बातचीत के दौरान मंत्री ने कीर्ति को अपने आवास पर भी आमंत्रित किया।

मंत्री के इस आश्वासन के बाद अब खिलाड़ी और उसके परिवार को बकाया पुरस्कार राशि मिलने की उम्मीद है।

पिता बोले- एक सप्ताह पहले ही जमा करा दिए थे सभी दस्तावेज

कीर्ति के पिता विजय शर्मा ने बताया कि उनकी बेटी और नीरू ढांडा के दस्तावेज एक ही दिन खेल विभाग में जमा कराए गए थे। विभाग की ओर से जो एन एक्सरे मांगे गए थे, वे भी सम्मान समारोह से करीब एक सप्ताह पहले जिला खेल विभाग में जमा करा दिए गए थे।

इसके बावजूद विभाग के रिकॉर्ड में गोल्ड मेडल जीतने वाली उनकी बेटी को पार्टिसिपेंट दिखा दिया गया। इसी वजह से उसे 3 करोड़ रुपये की जगह केवल 7 लाख 50 हजार रुपये का चेक दिया गया।

विजय शर्मा ने कहा कि इस घटना से उन्हें और उनके परिवार को गहरा धक्का लगा है। जब सभी जरूरी दस्तावेज समय पर जमा करा दिए गए थे, तो इसके बावजूद इतनी बड़ी गलती कैसे हो गई, यह समझ से बाहर है। उन्होंने कहा कि यह चूक कहां और किस स्तर पर हुई, इसका पता सरकार के स्तर पर ही लगाया जा सकता है।

जिला खेल अधिकारी बोले- जल्द मिलेगा 3 करोड़ के अवॉर्ड का ऑफर लेटर

जिला खेल अधिकारी रामपाल हुड्डा ने भी मामले में अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि कीर्ति शर्मा से संबंधित सभी दस्तावेज पंचकूला मुख्यालय भेज दिए गए थे। एशियन गेम्स में 7 पदक जीतने वाले अपने खिलाड़ियों पर विभाग को गर्व है।

उन्होंने स्वीकार किया कि क्लेरिकल मिस्टेक के कारण कीर्ति के साथ यह स्थिति बनी। रामपाल हुड्डा के अनुसार, कीर्ति को जल्द ही 3 करोड़ रुपये के अवॉर्ड का ऑफर लेटर मिल जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह पुरस्कार राशि कीर्ति का अधिकार है।

15 साल की उम्र में शुरू की थी तीरंदाजी, पुराने धनुष से किया अभ्यास

कीर्ति शर्मा ने बेहद साधारण परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। उनके परिवार में पिता विजय शर्मा, मां गुड्डी देवी, दादा राम जुआरी और दादी भरपाई देवी हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, लेकिन कीर्ति ने अपने खेल के जुनून और मेहनत से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक का सफर तय किया।

कीर्ति ने 15 साल की उम्र में तीरंदाजी शुरू की थी। उस समय वह पिल्लूखेड़ा के एक निजी स्कूल में नौवीं कक्षा में पढ़ती थीं। कोच उधम सिंह के कहने पर उन्होंने तीरंदाजी का अभ्यास शुरू किया।

शुरुआत में परिवार के सामने सबसे बड़ी परेशानी अच्छे धनुष की व्यवस्था करना था। नया धनुष काफी महंगा था। ऐसे में पिता विजय शर्मा ने स्कूल से 5 हजार रुपये में पुराना धनुष खरीदकर बेटी को दिया। इसी धनुष से कीर्ति ने अपने खेल का सफर आगे बढ़ाया।

धनुष खरीदने के लिए पिता ने 60 हजार रुपये ब्याज पर लिए

साल 2022 में कीर्ति का चयन झारखंड के हजारीबाग स्थित पदमा साई में हुआ। चयन के दौरान उन्हें नए धनुष की जरूरत पड़ी। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण धनुष खरीदना आसान नहीं था।

बेटी के खेल को आगे बढ़ाने के लिए पिता विजय शर्मा ने आढ़ती से 60 हजार रुपये ब्याज पर लिए और पटियाला से धनुष खरीदकर दिया। बाद में साई की ओर से कीर्ति को 5 लाख रुपये का धनुष दिलवाया गया।

इस तरह सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद परिवार ने कीर्ति के खेल को आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कीर्ति ने भी अपनी मेहनत और प्रदर्शन से परिवार के संघर्ष को उपलब्धियों में बदल दिया।

पढ़ाई में भी अव्वल, 10वीं और 12वीं में 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक

कीर्ति शर्मा केवल खेलों में ही नहीं, बल्कि पढ़ाई में भी अच्छी रही हैं। उन्होंने सीबीएसई बोर्ड से 10वीं की परीक्षा 90 प्रतिशत अंकों के साथ पास की थी। इसके बाद हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड से आर्ट्स संकाय में 12वीं की परीक्षा भी 90 प्रतिशत से अधिक अंकों के साथ उत्तीर्ण की।

फिलहाल कीर्ति पानीपत के गांव अहर-कुराना स्थित कॉलेज में बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं। खेलों में हासिल की गई उपलब्धियों के दम पर उन्हें सितंबर में ही बीएसएफ में कॉन्स्टेबल की नौकरी भी मिल गई है। हालांकि, अभी उन्हें स्टेशन अलॉट नहीं हुआ है।

एक साधारण परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतने तक का सफर तय करने वाली कीर्ति के लिए अब सबसे बड़ा सवाल सम्मान समारोह में हुई चूक को ठीक करने का है। खेल मंत्री और जिला खेल अधिकारी की ओर से पूरा पुरस्कार दिलाने का भरोसा दिया गया है। अब देखना होगा कि विभाग कब तक उन्हें 3 करोड़ रुपये के अवॉर्ड का ऑफर लेटर सौंपता है।