एंबुलेंस फ्यूल घोटाला: बिना चले वाहनों के नाम पर 50 लाख का डीजल गबन!
फरीदाबाद में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की एंबुलेंस के नाम पर करीब 50 लाख रुपये के फ्यूल खर्च में गड़बड़ी सामने आई। स्वास्थ्य निदेशक ने चार अधिकारियों की जांच कमेटी बनाई।
➤ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की एंबुलेंस के फ्यूल कार्ड से करीब 50 लाख रुपये के डीजल की खरीद में गड़बड़ी का मामला सामने आया
➤ सर्विस और मरम्मत के लिए खड़ी एंबुलेंस के नाम पर भी खरीदा गया ईंधन, चार एंबुलेंस नहीं चल रही थीं
➤ स्वास्थ्य निदेशक ने चार अधिकारियों की जांच कमेटी बनाई, मंगलवार को टीम फरीदाबाद पहुंचकर रिकॉर्ड खंगालेगी
हरियाणा के फरीदाबाद में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए संचालित एंबुलेंस व्यवस्था में करीब 50 लाख रुपये के कथित फ्यूल घोटाले का मामला सामने आया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत चलने वाली एंबुलेंस के नाम पर डीजल की खरीद दिखाई गई, जबकि रिकॉर्ड के अनुसार कुछ एंबुलेंस सर्विस और मरम्मत के लिए खड़ी थीं। आरोप है कि इन वाहनों के फ्यूल कार्ड का इस्तेमाल करके ईंधन की खरीद की गई। मामले की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हलचल मच गई है। शुरुआती पड़ताल में सामने आई गड़बड़ियों के बाद स्वास्थ्य निदेशक ने चार अधिकारियों की जांच कमेटी गठित कर दी है। कमेटी यह पता लगाएगी कि कितनी एंबुलेंस के नाम पर कितना डीजल खरीदा गया, फ्यूल कार्ड का इस्तेमाल किसने किया और वाहनों के वास्तविक संचालन के मुकाबले कितनी दूरी दर्ज की गई। जांच में अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
हर जिले में संचालित होती हैं करीब 20 एंबुलेंस
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रत्येक जिले में रेफरल ट्रांसपोर्ट स्कीम चलाई जा रही है। इस योजना का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों को जरूरत पड़ने पर अस्पताल तक पहुंचाना और वापस लाना है।
योजना के तहत प्रत्येक जिले में लगभग 20 एंबुलेंस संचालित की जा रही हैं। हर एंबुलेंस के नाम पर पेट्रो कार्ड जारी किया जाता है। इस कार्ड के माध्यम से डीजल खरीदा जाता है और इसके इस्तेमाल के लिए मुख्यालय से अनुमति मिलती है।
एंबुलेंस का चालक इस कार्ड का इस्तेमाल करता है। इसके अलावा वाहन खराब होने की स्थिति में उसकी मरम्मत भी कराई जाती है। ऐसे में फ्यूल कार्ड के इस्तेमाल और वाहन के वास्तविक संचालन का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण माना जाता है।
सर्विस के लिए खड़ी एंबुलेंस के नाम पर भी खरीदा गया डीजल
मिशन के अधिकारियों के सामने पिछले दिनों कुछ एंबुलेंस का रिकॉर्ड आया, जो सर्विस के लिए भेजी गई थीं। जिला स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, अधिकांश एंबुलेंस डीजल से संचालित हो रही हैं, जबकि चार एंबुलेंस फिलहाल नहीं चल रही थीं।
इसी दौरान इन वाहनों के नाम पर फ्यूल कार्ड से डीजल खरीदने की जानकारी सामने आई। इसके बाद अधिकारियों ने रिकॉर्ड की पड़ताल शुरू की। शुरुआती जांच में करीब 50 लाख रुपये के ईंधन का मामला सामने आया है।
अब यह पता लगाया जाएगा कि जिन वाहनों के नाम पर डीजल खरीदा गया, वे उस समय वास्तव में चल रहे थे या सर्विस और मरम्मत के कारण खड़े थे।
दुष्यंत चौटाला ने भी उठाया मामला
फरीदाबाद में एंबुलेंस के ईंधन से जुड़ी गड़बड़ी का मुद्दा पूर्व उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने भी अपने इंटरनेट मीडिया अकाउंट पर उठाया था।
इस मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य निदेशालय ने जांच प्रक्रिया तेज कर दी। स्वास्थ्य निदेशक की ओर से चार अधिकारियों की कमेटी गठित की गई है, जो पूरे मामले की जांच करेगी।
चार अधिकारियों की कमेटी करेगी जांच
स्वास्थ्य निदेशक की ओर से बनाई गई जांच कमेटी में चार अधिकारी शामिल किए गए हैं।
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मिशन के उप निदेशक प्रशासन।
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मुख्य लेखा अधिकारी।
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स्टेट एनजीओ कोऑर्डिनेटर।
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रोहतक के उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी।
जानकारी के अनुसार, कमेटी मंगलवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय पहुंचेगी। यहां रेफरल ट्रांसपोर्ट स्कीम से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की जाएगी। साथ ही फ्यूल कार्ड, डीजल खरीद, एंबुलेंस संचालन और मरम्मत से संबंधित दस्तावेजों की जांच होगी।
चार बिंदुओं पर होगी जांच
जांच कमेटी मुख्य रूप से चार पहलुओं पर ध्यान देगी।
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ईंधन खर्च का हिसाब: कुल कितनी एंबुलेंस पर कितना डीजल खर्च किया गया।
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फ्यूल कार्ड का इस्तेमाल: कार्ड से कितनी बार और कितनी रकम का ईंधन खरीदा गया।
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वाहनों की वास्तविक दूरी: एंबुलेंस कितने किलोमीटर चलीं और रिकॉर्ड में कितनी दूरी दर्ज की गई।
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जिम्मेदारी तय करना: निगरानी में कहां लापरवाही हुई और वित्तीय नुकसान के लिए कौन जिम्मेदार है।
स्वास्थ्य निदेशक बोले- दोषियों को नहीं बख्शा जाएगा
हरियाणा के स्वास्थ्य निदेशक डॉ. वीरेंद्र यादव ने कहा कि मामले की बारीकी से जांच की जाएगी। इसमें अधिकारी की भूमिका हो या किसी कर्मचारी की, किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
उन्होंने बताया कि एंबुलेंस से जुड़े सभी रिकॉर्ड की जांच होगी। यह भी देखा जाएगा कि कहीं वाहनों की मरम्मत के नाम पर तो कोई गड़बड़ी नहीं की गई है।
फिलहाल जांच कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि फ्यूल कार्ड के इस्तेमाल में कितनी अनियमितता हुई और इस मामले में किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका सामने आती है।
Akhil Mahajan