हरियाणा में 10 हजार से ज्यादा गेस्ट टीचर्स का इंतजार बरकरार, खुल्लर से मुलाकात बेनतीजा; अब आंदोलन की तैयारी
हरियाणा में गेस्ट टीचर्स की नियमितीकरण मांग पर राजेश खुल्लर से हुई बैठक बेनतीजा रही। 10,757 शिक्षक पक्का करने की मांग कर रहे हैं, अब मोर्चा आगे की रणनीति बनाएगा।
➤ पक्का करने की मांग लेकर गेस्ट टीचर्स ने चंडीगढ़ में सीएम के मुख्य प्रधान सचिव आरके खुल्लर से की मुलाकात
➤ करीब आधे घंटे चली बैठक में नहीं बनी सहमति, शिक्षक बोले- कोर्ट से केस जीतने के बाद भी सरकार नहीं कर रही नियमित
➤ यूनियन के मुताबिक 10,757 गेस्ट टीचर्स नियमितीकरण की मांग कर रहे, 400 से ज्यादा शिक्षकों की हो चुकी है मौत
हरियाणा में सरकारी स्कूलों में वर्षों से सेवाएं दे रहे गेस्ट टीचर्स के नियमितीकरण का मामला एक बार फिर अटक गया है। पक्का करने की मांग को लेकर सोमवार, 2 नवंबर को गेस्ट टीचर्स के प्रतिनिधियों ने चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश कुमार खुल्लर से मुलाकात की। करीब आधे घंटे चली इस बैठक में दोनों पक्षों के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई। शिक्षक संगठन का कहना है कि वे हाईकोर्ट से अपने पक्ष में फैसला आने के बाद भी नियमितीकरण का इंतजार कर रहे हैं, जबकि सरकार उन्हें पक्का नहीं करने की बात कहते हुए स्पीकिंग ऑर्डर जारी कर चुकी है। बैठक बेनतीजा रहने के बाद अब गेस्ट टीचर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चा आगे की रणनीति बनाने में जुट गया है। प्रदेश के 10 हजार से अधिक अतिथि अध्यापकों की निगाहें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
कॉलेज लेक्चरर पक्के हुए तो गेस्ट टीचर्स के साथ अलग व्यवहार क्यों?
गेस्ट टीचर्स का कहना है कि सरकार ने वर्ष 2014 की नीति के तहत हरट्रॉन के माध्यम से नियुक्त 58 कर्मचारियों को नियमित किया है। इसके अलावा कॉलेजों में कार्यरत गेस्ट लेक्चरर और स्कूलों में विज्ञापन के माध्यम से नियुक्त शिक्षकों को भी पक्का किया गया है, लेकिन स्कूलों के गेस्ट टीचर्स की मांग अब तक पूरी नहीं हुई।
शिक्षक प्रतिनिधियों का तर्क है कि गेस्ट टीचर्स और कॉलेज लेक्चरर के मामलों के लिए कमेटियां बनाई गई थीं। कॉलेज कमेटी ने गेस्ट लेक्चरर को नियमित करने का रास्ता साफ किया, लेकिन स्कूलों के गेस्ट टीचर्स के मामले में वैसा निर्णय नहीं लिया गया। इसी आधार पर शिक्षक सवाल उठा रहे हैं कि जब दूसरे वर्गों को नियमित किया जा सकता है तो उनके मामले में ऐसा क्यों नहीं हो रहा।
कोर्ट से केस जीतने के बाद भी नियमित नहीं करने का आरोप
गेस्ट टीचर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चा के मीडिया प्रभारी अजय लोहान ने कहा कि शिक्षक कोर्ट से केस जीतकर आए हैं, इसके बावजूद सरकार उन्हें पक्का नहीं कर रही है। उनका कहना है कि सरकार को स्पीकिंग ऑर्डर जारी करने के बजाय अदालत के फैसले को लागू करते हुए पात्र गेस्ट टीचर्स को नियमित करना चाहिए था।
अजय लोहान के अनुसार, सरकार को वर्ष 2014 की तीन साल वाली नीति के तहत गेस्ट टीचर्स को नियमित करना चाहिए। संगठन का कहना है कि शिक्षक लंबे समय से सरकारी स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और अब उन्हें स्थायी सेवा का लाभ मिलना चाहिए।
10,757 गेस्ट टीचर्स नियमितीकरण की मांग कर रहे
गेस्ट टीचर्स यूनियन के अनुसार, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी यानी डीएसई से प्राप्त जानकारी के आधार पर नियमितीकरण की मांग कर रहे गेस्ट टीचर्स की संख्या 10,757 है। यूनियन का दावा है कि इनमें से 400 से अधिक शिक्षकों की मृत्यु हो चुकी है।
संगठन ने शिक्षकों की सेवानिवृत्ति को लेकर भी चिंता जताई है। यूनियन के मुताबिक, वर्ष 2029 तक 50 प्रतिशत से अधिक गेस्ट टीचर्स सेवानिवृत्त हो जाएंगे। वहीं, वर्ष 2031 तक करीब 90 प्रतिशत गेस्ट टीचर्स रिटायर हो सकते हैं।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि यदि नियमितीकरण का फैसला लेने में और देरी हुई तो बड़ी संख्या में शिक्षक स्थायी सेवा का लाभ मिलने से पहले ही सेवानिवृत्त हो जाएंगे।
पहले भी मुख्यमंत्री से मुलाकात की तैयारी हुई थी
गेस्ट टीचर्स लंबे समय से नियमितीकरण की मांग को लेकर सरकार के सामने अपना पक्ष रख रहे हैं। इससे पहले भी शिक्षक प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात का प्रयास किया था। 26 अक्टूबर को कैबिनेट मंत्री अनिल विज के हस्तक्षेप के बाद 2 नवंबर को मुख्यमंत्री कार्यालय में बैठक कराने का आश्वासन मिला था। इसी मांग को लेकर शिक्षकों ने चंडीगढ़ की ओर निकाली जा रही न्याय यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया था।
अब 2 नवंबर को राजेश खुल्लर के साथ हुई बैठक में सहमति नहीं बनने के बाद शिक्षकों के सामने आंदोलन की अगली रणनीति तय करने का सवाल खड़ा हो गया है।
अब आगे की रणनीति बनाने में जुटा संघर्ष मोर्चा
बैठक से कोई ठोस निर्णय नहीं निकलने के बाद गेस्ट टीचर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चा आगे की रणनीति तैयार कर रहा है। शिक्षकों की प्रमुख मांग है कि अदालत के फैसले और वर्ष 2014 की नीति के अनुरूप नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी की जाए।
फिलहाल सरकार और शिक्षक संगठनों के बीच बातचीत से कोई अंतिम समाधान सामने नहीं आया है। ऐसे में अब देखना होगा कि सरकार गेस्ट टीचर्स की मांग पर क्या कदम उठाती है और क्या हजारों शिक्षकों को लंबे इंतजार के बाद स्थायी सेवा का लाभ मिल पाएगा।
Akhil Mahajan