अवैध हथियार सप्लाई नेटवर्क का भंडाफोड़, दो तस्कर गिरफ्तार

गुरुग्राम में मध्य प्रदेश से हथियार सप्लाई करने पहुंचे दो आरोपी गिरफ्तार, 8 पिस्टल और 16 मैगजीन बरामद। चार साल से तस्करी में शामिल थे आरोपी।

अवैध हथियार सप्लाई नेटवर्क का भंडाफोड़, दो तस्कर गिरफ्तार

गुरुग्राम में अंतरराज्यीय अवैध हथियार सप्लाई नेटवर्क का खुलासा, मध्य प्रदेश से आए दो तस्कर गिरफ्तार

➤ आरोपियों के कब्जे से 8 अवैध पिस्टल और 16 मैगजीन बरामद, पहले भी पहुंचा चुके थे हथियारों की खेप

➤ चार साल से कर रहे थे हथियारों की तस्करी, हर पिस्टल की डिलीवरी पर मिलता था 7 हजार रुपए कमीशन

गुरुग्राम में सक्रिय अंतरराज्यीय अवैध हथियार सप्लाई नेटवर्क का पुलिस ने खुलासा किया है। मध्य प्रदेश से हथियारों की खेप लेकर गुरुग्राम पहुंचे दो सप्लायरों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 8 अवैध पिस्टल और 16 मैगजीन बरामद हुई हैं। ये हथियार दिल्ली-एनसीआर के स्थानीय बदमाशों तक पहुंचाए जाने थे, लेकिन डिलीवरी से पहले ही पुलिस ने दोनों आरोपियों को दबोच लिया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दुर्गेश और नरेंद्र उर्फ नरेन पुत्र कालिया उर्फ कालू, निवासी गांव बामनाला, जिला खरगोन, मध्य प्रदेश के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क का सुराग पहले गिरफ्तार किए गए आरोपी दीपक और राहुल से पूछताछ के दौरान मिला था। उनकी निशानदेही और पूछताछ में सामने आई जानकारियों के आधार पर पुलिस ने सप्लाई नेटवर्क की अन्य कड़ियां जोड़ते हुए दोनों आरोपियों तक पहुंच बनाई।

जांच में यह भी सामने आया कि दुर्गेश और नरेंद्र पहले भी दीपक और राहुल को 5 अवैध पिस्टल और 11 मैगजीन की खेप पहुंचा चुके थे। अब दोनों नए आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे गिरोह से बरामद हथियारों की संख्या बढ़कर 13 अवैध पिस्टल और 27 मैगजीन हो गई है।

बस में हथियार छिपाकर मध्य प्रदेश से गुरुग्राम पहुंचे थे आरोपी

पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों आरोपी बस के जरिए मध्य प्रदेश से हथियारों की खेप लेकर गुरुग्राम पहुंचे थे। उनका मकसद इन हथियारों को दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय स्थानीय बदमाशों तक पहुंचाना था।

आरोपी हथियारों की डिलीवरी देने की तैयारी में थे, लेकिन इससे पहले ही पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से बरामद 8 पिस्टल और 16 मैगजीन को पुलिस ने अपने कब्जे में लेकर आगे की जांच शुरू कर दी है।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हथियारों की यह खेप किन लोगों तक पहुंचाई जानी थी और दिल्ली-एनसीआर में इस नेटवर्क से जुड़े कितने लोग सक्रिय हैं।

चार साल से हथियारों की तस्करी में शामिल, हर पिस्टल पर मिलता था 7 हजार कमीशन

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि वे पिछले करीब 4 वर्षों से अवैध हथियारों की तस्करी के धंधे में संलिप्त हैं। इस काम के बदले उन्हें प्रत्येक हथियार की सफल डिलीवरी पर 7,000 रुपए कमीशन मिलता था।

यानी हथियारों की सप्लाई पहुंचाने के लिए उन्हें हर पिस्टल पर अलग से रकम दी जाती थी। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ के आधार पर गिरोह के मुख्य सरगना और हथियार खरीदने वाले लोगों की पहचान करने में जुटी है।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि आरोपी अब तक कितनी बार हथियारों की खेप दिल्ली-एनसीआर तक पहुंचा चुके हैं और इस अवैध कारोबार में उनके साथ और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

मध्य प्रदेश में हथियार बनाने वाली फैक्ट्री का पता लगा रही पुलिस

पुलिस की जांच अब हथियारों के वास्तविक स्रोत तक पहुंचने पर केंद्रित है। टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपियों को हथियार उपलब्ध कराने वाला मुख्य सप्लायर कौन है और मध्य प्रदेश में किन संभावित निर्माण केंद्रों पर अवैध हथियार तैयार किए जा रहे हैं।

इसके साथ ही हथियारों के वास्तविक स्रोत, संभावित निर्माण केंद्रों और इस कारोबार में शामिल अन्य लोगों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

पुलिस टीम पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़कर यह पता लगाने में जुटी है कि मध्य प्रदेश से गुरुग्राम और फिर दिल्ली-एनसीआर तक अवैध हथियारों की सप्लाई का पूरा तंत्र किस तरह काम कर रहा था। मामले में मुख्य सरगना और अन्य खरीदारों की तलाश जारी है।