हरियाणा तक फैला हिमाचल की फार्मा कंपनियों का ड्रग्स नेटवर्क, 20.10 करोड़ की 25 संपत्तियां फ्रीज

हिमाचल के कालाअंब की दो फार्मा कंपनियों से जुड़े प्रतिबंधित दवाओं के नेटवर्क की जांच हरियाणा समेत सात राज्यों तक पहुंची। एनसीबी ने 20.10 करोड़ की 25 संपत्तियां फ्रीज कीं।

हरियाणा तक फैला हिमाचल की फार्मा कंपनियों का ड्रग्स नेटवर्क, 20.10 करोड़ की 25 संपत्तियां फ्रीज

➤ कालाअंब की दो फार्मा कंपनियों से प्रतिबंधित दवाएं और कच्चा माल मिलने के बाद एनसीबी की बड़ी कार्रवाई

➤ हिमाचल के साथ हरियाणा, पंजाब समेत सात राज्यों तक फैला था सप्लाई नेटवर्क

➤ फर्जी फर्मों के नाम पर दवाओं की सप्लाई, जांच में 20.10 करोड़ रुपये की संपत्तियों का पता चला


हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के कालाअंब से संचालित कथित अवैध दवा कारोबार की जांच में हरियाणा का नाम भी सामने आया है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की जांच के अनुसार, कालाअंब की दो फार्मा कंपनियों से प्रतिबंधित साइकोट्रोपिक दवाओं और कच्चे माल की बरामदगी के बाद सामने आया नेटवर्क सात राज्यों तक फैला हुआ था, जिनमें हरियाणा भी शामिल है। जांच में फर्जी फर्मों के नाम पर दवाओं की सप्लाई और उससे अर्जित कमाई को छिपाने के आरोप सामने आए हैं। एनसीबी ने कथित अवैध कमाई से खरीदी गई 20.10 करोड़ रुपये की 25 संपत्तियों को फ्रीज किया है। इस कार्रवाई से हिमाचल के फार्मा उद्योग के साथ हरियाणा और दूसरे राज्यों में दवाओं की सप्लाई से जुड़े नेटवर्क की जांच भी महत्वपूर्ण हो गई है।

हरियाणा तक कैसे पहुंचा दवाओं का नेटवर्क

एनसीबी की जांच में सामने आया है कि कालाअंब स्थित मैसर्स डिजिटल विजन और मैसर्स वेलिंटन हेल्थकेयर से प्रतिबंधित साइकोट्रोपिक दवाओं और कच्चे माल की बड़ी खेप बरामद हुई थी। इसके बाद जांच एजेंसी ने कंपनियों की सप्लाई चेन और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल शुरू की।

जांच के दौरान पता चला कि इन इकाइयों से कथित तौर पर फर्जी फर्मों के नाम पर दवाओं की सप्लाई की जा रही थी। यह नेटवर्क केवल हिमाचल प्रदेश तक सीमित नहीं था, बल्कि हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल तक फैला हुआ था।

हरियाणा का नाम इस मामले में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एनसीबी की जांच में इसे उन सात राज्यों में शामिल किया गया है, जहां तक इस नेटवर्क की पहुंच सामने आई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में हरियाणा के किसी विशेष शहर, फर्म या व्यक्ति का नाम नहीं बताया गया है।

20.10 करोड़ की 25 संपत्तियां फ्रीज

एनसीबी की वित्तीय जांच में दवाओं की बिक्री से अर्जित कथित अवैध कमाई का पता चला। जांच एजेंसी के अनुसार, इस रकम को कंपनियों के बैंक खातों में अलग-अलग लेनदेन के जरिये घुमाया गया, ताकि पैसे का वास्तविक स्रोत छिपाया जा सके।

इसके बाद आरोपियों और उनके परिजनों के नाम पर संपत्तियां खरीदी गईं। जांच में इन संपत्तियों की कुल कीमत 20.10 करोड़ रुपये आंकी गई। आरोपी इन संपत्तियों को खरीदने के लिए वैध आय का स्रोत नहीं बता सके।

इसी आधार पर एनसीबी ने कुल 25 संपत्तियों को फ्रीज करने की कार्रवाई की है।

31 अक्टूबर को फ्रीजिंग आदेश की हुई पुष्टि

नई दिल्ली के सक्षम प्राधिकारी ने एनडीपीएस अधिनियम की धारा 68 एफ(2) के तहत 2 अक्टूबर को जारी फ्रीजिंग आदेश की 31 अक्टूबर को पुष्टि कर दी। इसके बाद संपत्तियों को फ्रीज करने की कार्रवाई को औपचारिक मंजूरी मिल गई।

एनसीबी की यह कार्रवाई कथित अवैध दवा कारोबार से अर्जित संपत्ति और उसके वित्तीय नेटवर्क पर शिकंजा कसने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मोहाली में भी खरीदी गई थीं औद्योगिक और आवासीय संपत्तियां

जांच में सामने आई संपत्तियों में पंजाब के मोहाली स्थित कई औद्योगिक और वाणिज्यिक इकाइयां तथा आवासीय फ्लैट शामिल हैं। इनमें गिलको इंडस्ट्रियल पार्क, सिटी सेंटर-3, सिटी सेंटर वॉक, जनता इंडस्ट्रियल एस्टेट, गैलेक्सी हाइट्स-2 और क्वीनस्टाउन की संपत्तियां शामिल बताई गई हैं।

एनसीबी की जांच का मुख्य फोकस प्रतिबंधित दवाओं की सप्लाई, कथित अवैध कमाई और उस रकम से बनाई गई संपत्तियों के बीच संबंधों का पता लगाना है।

फार्मा कारोबार और सात राज्यों की सप्लाई चेन जांच के दायरे में

इस मामले में हिमाचल प्रदेश की दो फार्मा कंपनियों से शुरू हुई जांच अब सात राज्यों तक पहुंचने वाले नेटवर्क पर केंद्रित है। हरियाणा भी इस सूची में शामिल है। हालांकि, अभी उपलब्ध विवरण में हरियाणा में दवाओं की आपूर्ति के किसी खास ठिकाने या संबंधित व्यक्ति की पहचान सामने नहीं आई है।

एनसीबी की वित्तीय कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि जांच केवल दवाओं की बरामदगी तक सीमित नहीं रही, बल्कि कथित अवैध कारोबार से अर्जित संपत्ति और उसके स्रोत तक पहुंचने का प्रयास भी किया गया है।