फ्री फायर गेम के किल टास्क की जांच, अंबाला बाल सुधार गृह में पीजीआई में मानसिक स्थिति का आकलन, काउंसलिंग और बिहेवियरल थेरेपी की तैयारी
पंचकूला स्कूल मामले में आठ साल के बच्चे की मोबाइल गेम की आदत, कथित रंजिश और स्कूल गतिविधियों की जांच जारी है। पीजीआई में मानसिक स्थिति का आकलन हो रहा है।
➤ आठ साल के बच्चे को आगामी आदेशों तक अंबाला के बाल सुधार गृह में रखा गया
➤ फ्री फायर गेम के किल टास्क और बच्ची से कथित रंजिश के पहलुओं की पड़ताल
➤ पीजीआई चंडीगढ़ में मानसिक स्थिति का आकलन, काउंसलिंग और बिहेवियरल थेरेपी की तैयारी
पंचकूला के सेक्टर-20 स्थित राजकीय मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में छह साल की बच्ची के साथ हुई क्रूरता के मामले की जांच अब कई पहलुओं पर केंद्रित हो गई है। घटना के चार दिन बाद जांच एजेंसियां आठ साल के बच्चे की मोबाइल गेम खेलने की आदत, स्कूल में उसके व्यवहार, दूसरे विद्यार्थियों से दोस्ती और बच्ची के साथ कथित रंजिश की कड़ियों को समझने में जुटी हैं। बच्चे को फ्री फायर गेम खेलने की लत होने की बात सामने आई है। ऐसे में गेम में मिलने वाले किल टास्क और घटना के बीच किसी संभावित संबंध की भी पड़ताल की जा रही है। हालांकि, अभी तक इन दोनों के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।
शनिवार रात बच्चे को आगामी आदेशों तक अंबाला के बाल सुधार गृह में रखा गया। वहां उसकी काउंसलिंग और बिहेवियरल थेरेपी कराई जाएगी। वहीं, चंडीगढ़ पीजीआई में उसकी मानसिक स्थिति का आकलन किया जा रहा है, ताकि उसके व्यवहार और मानसिक स्तर को बेहतर तरीके से समझा जा सके।
पूछताछ में घर जाने की इच्छा जताई
पूछताछ के दौरान बच्चे ने पूछा कि क्या उसे हॉस्टल में रखा जाएगा और वहां खाने के लिए अच्छी चीजें मिलेंगी। बताया गया कि उसे खाने-पीने का शौक है। उसने घर वापस जाने की इच्छा भी जताई।
जब उससे पूछा गया कि घर में उसे सबसे ज्यादा प्यार कौन करता है, तो उसने जवाब दिया कि कोई नहीं। हालांकि, इसके बावजूद वह अपने घर लौटना चाहता था। शुरुआती पूछताछ में उसके व्यवहार में कोई स्पष्ट असामान्यता सामने नहीं आई। उसका मानसिक स्तर आठ से नौ साल के बच्चे जैसा प्रतीत हुआ। उसकी मानसिक स्थिति को लेकर विशेषज्ञों का आकलन जारी है।
स्कूल प्रबंधन ने मोबाइल को लेकर की थी शिकायत
जांच में यह बात सामने आई है कि स्कूल प्रबंधन ने पहले भी बच्चे के मोबाइल इस्तेमाल को लेकर उसके स्वजन से कई बार शिकायत की थी। इसके बाद परिवार ने घर पर उसे मोबाइल देना बंद कर दिया था। अब जांच की जा रही है कि मोबाइल गेम खेलने की आदत और उससे जुड़ी गतिविधियों का घटना पर कोई प्रभाव पड़ा था या नहीं।
पूछताछ में बच्चे ने बताया कि वह छह साल की बच्ची को नीचे से ऊपर 12वीं कक्षा के क्लासरूम में इसलिए ले गया, ताकि नीचे मौजूद कोई व्यक्ति उन्हें देख न सके। उसने यह भी बताया कि जिस ईंट से बच्ची के सिर पर वार किया गया, वह पहले से ही क्लासरूम के गेट के पास रखी हुई थी।
शिकायत और कथित रंजिश का पहलू भी जांच के दायरे में
जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या बच्ची ने पहले बच्चे की शिकायत किसी शिक्षक से की थी। क्या इस शिकायत के बाद उसे डांट पड़ी थी और इसी वजह से उसके मन में बच्ची के प्रति नाराजगी पैदा हुई। बच्ची द्वारा उसे चिढ़ाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इन सभी पहलुओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
बड़े विद्यार्थियों से दोस्ती की बात आई सामने
घटना के लिए जिस कमरे को चुना गया, वह 12वीं कक्षा का क्लासरूम था। शुरुआती पूछताछ में बच्चे की अपने से अधिक उम्र के विद्यार्थियों के साथ दोस्ती होने की बात सामने आई है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि वह पहले भी इस कमरे में आता-जाता था या नहीं।
बच्चे के बयान के अनुसार, वारदात में इस्तेमाल की गई ईंट पहले से ही क्लासरूम के गेट के पास रखी थी। अब जांच एजेंसियां घटना से पहले की गतिविधियों, स्कूल परिसर में बच्चे की आवाजाही और उससे जुड़े अन्य तथ्यों को जोड़कर मामले की परिस्थितियों को समझने का प्रयास कर रही हैं।
नाबालिगों से जुड़े इस संवेदनशील मामले में बच्चे की पहचान और निजी विवरण सार्वजनिक करने से बचना जरूरी है। मोबाइल गेम, पारिवारिक परिस्थितियों या मानसिक स्थिति को घटना का निश्चित कारण मानना भी उचित नहीं होगा। जांच और विशेषज्ञों के आकलन के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा।
Akhil Mahajan