रैक्सिल केस में पूर्व सीएम हुड्डा और दो IAS अधिकारियों को बड़ी राहत
पंचकूला की सीबीआई विशेष अदालत ने रैक्सिल फंगीसाइड खरीद मामले की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और दो IAS अधिकारियों को राहत मिली।
➤ पंचकूला की सीबीआई विशेष अदालत ने जांच एजेंसी की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर केस बंद किया
➤ जांच में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और सरकारी खजाने को नुकसान के पर्याप्त सबूत नहीं मिले
➤ दो वरिष्ठ IAS अधिकारी भी थे आरोपी, दवा की कीमत और खरीद प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप हुए खारिज
पंचकूला, 2 नवंबर। गेहूं के प्रमाणित बीजों के उपचार के लिए रैक्सिल फंगीसाइड की खरीद से जुड़े करीब 14 साल पुराने कथित घोटाले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को बड़ी राहत मिली है। पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने मामले में जांच एजेंसी की ओर से दाखिल क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली है। इसके साथ ही यह मामला पूरी तरह बंद हो गया है। इस केस में हुड्डा के अलावा दो वरिष्ठ IAS अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया था। सीबीआई की जांच में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने या किसी अधिकारी को निजी आर्थिक लाभ मिलने के पर्याप्त मौखिक और दस्तावेजी सबूत नहीं मिले।
जांच में साजिश और वित्तीय नुकसान के सबूत नहीं
सीबीआई की जांच के बाद अदालत के सामने यह बात रखी गई कि रैक्सिल फंगीसाइड के इस्तेमाल और उसकी खरीद से जुड़े फैसलों में किसी आपराधिक साजिश या बेईमानी के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले। जांच में यह भी साबित नहीं हुआ कि अधिकारियों ने किसी व्यक्ति या कंपनी को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाने के इरादे से फैसला लिया था।
अदालत ने जांच के निष्कर्षों पर विचार करते हुए पाया कि मामले में आपराधिक कार्यवाही आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। केवल शुरुआती आरोपों या संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा जारी नहीं रखा जा सकता।
वैज्ञानिक सिफारिशों के आधार पर हुआ था दवा का चयन
अदालत ने वैज्ञानिक परीक्षणों और नियामक संस्थाओं की ओर से पहले दी गई अनुमतियों को भी महत्वपूर्ण माना। सीबीआई की जांच में सामने आया कि वर्ष 2003 में कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने गेहूं की फसल को तीन प्रमुख बीमारियों से बचाने के लिए रैक्सिल के इस्तेमाल की सिफारिश की थी। उस समय इन तीनों बीमारियों के एक साथ उपचार के लिए इस दवा को प्रभावी विकल्प माना गया था।
इसी वैज्ञानिक आधार पर गेहूं के प्रमाणित बीजों के उपचार में रैक्सिल के इस्तेमाल का निर्णय लिया गया था। जांच में दवा के चयन को लेकर किसी आपराधिक मंशा के प्रमाण नहीं मिले।
पंजाब और नेशनल सीड्स कॉरपोरेशन ने भी इसी दर पर खरीदी दवा
मामले में दवा की कीमतों को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। आरोप था कि हरियाणा में एक ही फर्म के माध्यम से दवा की आपूर्ति कराकर कीमतें बढ़ाई गईं और सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया।
हालांकि, सीबीआई की जांच में पाया गया कि पंजाब स्टेट सीड कॉरपोरेशन और नेशनल सीड्स कॉरपोरेशन ने भी रैक्सिल उसी दर पर खरीदी थी, जिस दर पर हरियाणा सीड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन को इसकी आपूर्ति की गई थी। ऐसे में अधिक कीमत वसूलने और सरकारी धन को नुकसान पहुंचाने के आरोपों की पुष्टि नहीं हुई।
बेस्ट डीलर रेट की शर्त हटाने में भी गलत मंशा नहीं मिली
विवाद का एक प्रमुख हिस्सा हाई पावर परचेज कमेटी (HPPC) की ओर से सप्लाई ऑर्डर में बेस्ट डीलर रेट की शर्त हटाने से जुड़ा था। यह सप्लाई ऑर्डर 29 मार्च 2013 को जारी हुआ था। आरोप लगाया गया था कि इस शर्त को हटाने से किसी को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
सीबीआई की जांच में इस फैसले के पीछे बेईमान इरादे या किसी को गलत तरीके से फायदा पहुंचाने के पर्याप्त सबूत नहीं मिले। अदालत ने भी इस निष्कर्ष को स्वीकार किया।
2010 में हुड्डा की अध्यक्षता में हुई बैठक से जुड़ा था मामला
इस पूरे विवाद की शुरुआत अक्टूबर 2010 में हुई थी। उस समय हरियाणा में गेहूं के प्रमाणित बीजों के उपचार के लिए बायर कंपनी के रैक्सिल फंगीसाइड का इस्तेमाल अनिवार्य करने का निर्णय लिया गया था। आरोप था कि 6 अक्टूबर 2010 को तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया।
आरोपों के अनुसार, किसानों और बीज विक्रेताओं को सरकारी सब्सिडी का लाभ लेने के लिए इसी दवा की खरीद जरूरी कर दी गई थी। यह भी आरोप लगाया गया था कि प्रदेश में इसकी आपूर्ति एक ही फर्म के माध्यम से कराई गई और कीमतों में गड़बड़ी कर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया।
2015 में सीबीआई ने दर्ज किया था केस
मामले में हरियाणा सरकार के सतर्कता विभाग ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर सीबीआई जांच कराने का अनुरोध किया था। इसके बाद 21 अगस्त 2015 को सीबीआई ने आधिकारिक रूप से मामला दर्ज किया। एजेंसी ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120-B और 420 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी।
जांच के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और दो वरिष्ठ IAS अधिकारियों को आरोपी बनाया गया था। लंबे समय तक चली जांच के बाद सीबीआई ने मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की।
हरियाणा सरकार ने भी क्लोजर रिपोर्ट पर जताई सहमति
अदालत ने इस बात को भी ध्यान में रखा कि शिकायतकर्ता हरियाणा सरकार ने क्लोजर रिपोर्ट पर विचार करने के बाद इसे स्वीकार करने पर अपनी सहमति और अनापत्ति जताई थी। अदालत ने जांच अधिकारी के निष्कर्षों से असहमति जताने का पर्याप्त आधार नहीं पाया।
इस तरह रैक्सिल फंगीसाइड की खरीद से जुड़े इस पुराने मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और दो वरिष्ठ IAS अधिकारियों को राहत मिल गई है। अदालत द्वारा क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार किए जाने के बाद केस बंद हो गया है।
Akhil Mahajan