दुष्यंत चौटाला को काले झंडे दिखाने के केस में 8 किसान बरी, हरियाणा की नरवाला अदालत का बड़ा फैसला

नरवाना अदालत ने दुष्यंत चौटाला को काले झंडे दिखाने के 2022 के मामले में आठ किसानों को बरी किया। सतबीर पहलवान सहित सभी आरोपित किसानों को मिली राहत।

दुष्यंत चौटाला को काले झंडे दिखाने के केस में 8 किसान बरी, हरियाणा की नरवाला अदालत का बड़ा फैसला

➤ मार्च 2022 में उचाना में दुष्यंत चौटाला को काले झंडे दिखाने के मामले में आठ किसानों को मिली राहत

➤ खेड़ा खाप के प्रधान सतबीर पहलवान सहित नरेंद्र गतौली, प्रदीप सिहाग और अन्य किसान बरी

➤ सतबीर पहलवान ने अदालत में मौके की तस्वीरें पेश करने की बात कही, जिनमें उनके मौजूद नहीं होने का दावा किया गया


जींद। हरियाणा में किसान आंदोलन से जुड़े एक पुराने मामले में नरवाना अदालत ने आठ किसानों को बरी कर दिया है। मामला मार्च 2022 का है, जब उचाना में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की ओर से आयोजित मैराथन के दौरान उन्हें काले झंडे दिखाने और खटकड़ टोल पर गतिविधियां बाधित करने के आरोप लगे थे। इस मामले में पुलिस ने खेड़ा खाप के प्रधान सतबीर पहलवान सहित कई किसानों के खिलाफ केस दर्ज किया था। करीब साढ़े चार साल तक चले मामले के बाद अदालत ने आठ किसानों को आरोपों से बरी कर दिया। बरी होने वालों में सतबीर पहलवान के अलावा नरेंद्र गतौली, प्रदीप सिहाग जुलाना, कविता खरकरामजी, प्रियंका खरकरामजी, सुशील नरवाल चांदपुर, संदीप बडौदा और ओम प्रकाश शादीपुर शामिल हैं। फैसले के बाद एक बार फिर 2022 के किसान विरोध प्रदर्शन और उस दौरान दर्ज हुए मुकदमों की चर्चा शुरू हो गई है।

दुष्यंत चौटाला की मैराथन के दौरान हुआ था विवाद।

खेड़ा खाप के प्रधान सतबीर पहलवान के अनुसार, 23 मार्च 2022 को तत्कालीन उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने उचाना में मैराथन आयोजित करवाई थी। इसी दौरान किसानों की ओर से उन्हें काले झंडे दिखाए जाने का मामला सामने आया था।

इस घटनाक्रम के बाद पुलिस ने सतबीर पहलवान सहित कई किसानों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। आरोपों में काले झंडे दिखाने के साथ खटकड़ टोल पर गतिविधियां बाधित करने का मामला भी शामिल था। इसके बाद यह केस नरवाना अदालत में विचाराधीन रहा।

अदालत में तस्वीरों का दिया गया हवाला।

सतबीर पहलवान ने बताया कि सोमवार को अदालत ने आठ किसानों को बरी कर दिया। उनके अनुसार, उन्होंने न्यायाधीश के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि मौके की तस्वीरें देखी जा सकती हैं, जिनमें वह घटनास्थल पर मौजूद नहीं दिखाई देते।

उनका कहना था कि वह दुष्यंत चौटाला को काले झंडे दिखाने की घटना में शामिल नहीं थे, इसके बावजूद उनका नाम एफआईआर में शामिल कर लिया गया था। उन्होंने अदालत के सामने तस्वीरों के आधार पर अपनी बात रखी।

इस दलील और मामले में उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने आठ किसानों को बरी कर दिया। हालांकि, उपलब्ध समाचार विवरण में अदालत के विस्तृत लिखित आदेश और सभी साक्ष्यों पर की गई न्यायिक टिप्पणियों का उल्लेख नहीं है।

आठ किसानों के नाम, जिन्हें अदालत ने किया बरी।

इस मामले में बरी किए गए आठ किसानों के नाम इस प्रकार हैं।

  1. सतबीर पहलवान।

  2. नरेंद्र गतौली।

  3. प्रदीप सिहाग जुलाना।

  4. कविता खरकरामजी।

  5. प्रियंका खरकरामजी।

  6. सुशील नरवाल चांदपुर।

  7. संदीप बडौदा।

  8. ओम प्रकाश शादीपुर।

किसान आंदोलन से जुड़े पुराने मामलों पर फिर चर्चा।

हरियाणा में किसान आंदोलन के दौरान कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। तत्कालीन उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को काले झंडे दिखाने का मामला भी इसी राजनीतिक और किसान आंदोलन की पृष्ठभूमि से जुड़ा था।

इस मामले में आठ किसानों की रिहाई के बाद किसान संगठनों के बीच भी चर्चा होने की संभावना है। हालांकि, अदालत के विस्तृत आदेश और फैसले के सभी कानूनी आधारों की जानकारी सामने आने के बाद ही निर्णय की पूरी न्यायिक वजह स्पष्ट होगी।

करीब साढ़े चार साल पुराने मामले में आठ किसानों को मिली राहत ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों में आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कितनी महत्वपूर्ण होती है।