सुक्खू का भाजपा पर निशाना, बोले- पांच गुटों में बंटी पार्टी, कई विधायक नहीं जीत पाएंगे दोबारा

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भाजपा के पांच गुटों, विधायकों के चुनावी दावों और आरडीजी कटौती के बावजूद हिमाचल सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर अपना पक्ष रखा।

सुक्खू का भाजपा पर निशाना, बोले- पांच गुटों में बंटी पार्टी, कई विधायक नहीं जीत पाएंगे दोबारा

➤ मुख्यमंत्री सुक्खू ने भाजपा को पांच गुटों में बंटी पार्टी बताते हुए कई विधायकों के दोबारा नहीं जीतने का दावा किया

➤ आरडीजी में 8 से 10 हजार करोड़ रुपये की कटौती के बावजूद वित्तीय संतुलन बनाए रखने की बात कही

➤ आर्थिक चुनौतियों के बीच कर्मचारियों को डीए की किस्तें जारी करने और हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने का दावा किया


शिमला। दिल्ली में आयोजित वोट चोरी के मुद्दे पर कांग्रेस की महारैली को लेकर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज उठाना, रैलियां निकालना और आंदोलन करना राजनीतिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी की ओर से चुनावी प्रणाली और कथित चुनावी धांधलियों को लेकर उठाए जा रहे सवालों का समर्थन करते हुए कहा कि इन मुद्दों को जनता का व्यापक समर्थन मिल रहा है। वहीं, भाजपा की आंतरिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने दावा किया कि पार्टी हिमाचल प्रदेश में पांच अलग-अलग गुटों में बंटी हुई है और उसके कई विधायक आगामी विधानसभा चुनाव में दोबारा जीत दर्ज नहीं कर पाएंगे।

भाजपा के पांच गुटों पर मुख्यमंत्री ने साधा निशाना

मुख्यमंत्री सुक्खू ने असम के मुख्यमंत्री और भाजपा की पदयात्रा को लेकर उठे सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में भाजपा पांच अलग-अलग गुटों में बंटी हुई है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के कई विधायक ऐसी स्थिति में हैं कि वे अगला चुनाव दोबारा नहीं जीत पाएंगे।

सुक्खू ने कहा कि भाजपा की अंदरूनी राजनीति के कारण पार्टी के सामने अपने गुटों को एकजुट रखने की चुनौती है। उन्होंने यह भी कहा कि 2027 में हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनेगी और सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को निमंत्रण भेजा जाएगा। इसी परंपरा के तहत असम के मुख्यमंत्री को भी आमंत्रित किया जाएगा।

आरडीजी में कटौती के बावजूद वित्तीय संतुलन बनाए रखने का दावा

मुख्यमंत्री ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर बात करते हुए कहा कि केंद्र सरकार की ओर से राजस्व घाटा अनुदान (RDG) में करीब 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये की कटौती किए जाने के बावजूद राज्य सरकार ने वित्तीय संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया है।

उन्होंने कहा कि किसी परिवार की आमदनी कम होने पर उसके लिए घर का बजट संभालना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसी तरह सरकार को भी सीमित संसाधनों के बीच प्रदेश का आर्थिक प्रबंधन करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, केंद्र से मिलने वाली राशि में कटौती के बावजूद सरकार ने वित्तीय चुनौतियों का सामना किया है।

सुक्खू ने यह भी कहा कि आर्थिक दबाव के बीच कर्मचारियों को महंगाई भत्ते (DA) की किस्तें जारी की गई हैं। उन्होंने इसे कर्मचारियों के हितों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता से जोड़कर पेश किया।

हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम करने की बात

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य के साथ काम कर रही है। सीमित वित्तीय संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद प्रदेश के हितों को प्राथमिकता दी जा रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश अपने संसाधनों और आय के माध्यम से आर्थिक रूप से मजबूत बने। इसके लिए वित्तीय प्रबंधन और प्रदेश की संपदा का संरक्षण महत्वपूर्ण है।

प्रदेश की संपदा को लेकर सरकार का स्पष्ट संदेश

सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश की संपदा और प्राकृतिक संसाधनों को लेकर भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश के संसाधनों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी को भी इनका गलत इस्तेमाल नहीं करने दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश की संपदा को पहले भी लूटने नहीं दिया गया है और भविष्य में भी ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार हिमाचल के हितों और संसाधनों की सुरक्षा करते हुए प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

मुख्यमंत्री के इन बयानों में एक ओर भाजपा की अंदरूनी स्थिति और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दावे सामने आए, वहीं दूसरी ओर आरडीजी में कटौती के बाद राज्य की वित्तीय चुनौतियों और सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी उनका पक्ष सामने आया।