रामपुर विधायक नंद लाल नहीं रहे,72 साल की उम्र में निधन,चार बार जीता चुनाव, ITBP और SPG से राजनीति तक का सफर
हिमाचल के रामपुर से चार बार विधायक रहे नंद लाल का 72 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन पर लवी मेले की गतिविधियां स्थगित की गईं।
72 वर्ष की आयु में कांग्रेस विधायक नंद लाल का निधन, चमियाणा अस्पताल में सुबह 5 बजे ली अंतिम सांस
➤ 2007 से 2022 तक लगातार चार विधानसभा चुनाव जीते, ITBP और SPG में भी निभाई थीं अहम जिम्मेदारियां
➤ निधन के सम्मान में 3 और 4 नवंबर की लवी मेले की गतिविधियां स्थगित, रामपुर विधानसभा सीट हुई रिक्त
शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति से मंगलवार सुबह एक दुखद खबर सामने आई। शिमला जिले की रामपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक और सातवें राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष नंद लाल का 3 नवंबर 2026 को 72 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने शिमला के चमियाणा स्थित अटल सुपर स्पेशियलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान में सुबह करीब पांच बजे अंतिम सांस ली। वह पिछले कई दिनों से बीमार थे और अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था।
नंद लाल के निधन की खबर से रामपुर बुशहर सहित पूरे हिमाचल प्रदेश में शोक की लहर फैल गई। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने निधन से एक दिन पहले अस्पताल पहुंचकर उनका हालचाल जाना था। उनके निधन पर प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने गहरा दुख जताया। रामपुर में भी उनके समर्थकों और क्षेत्र के लोगों में शोक का माहौल है।
नंद लाल का जीवन कई मायनों में अलग पहचान रखता था। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत सुरक्षा सेवाओं से की थी। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) में कमांडो के रूप में सेवाएं देने से लेकर विशेष सुरक्षा समूह (SPG) में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने तक उनका सफर रहा। सरकारी सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और रामपुर विधानसभा क्षेत्र से लगातार चार चुनाव जीतकर अपनी पहचान बनाई।
ITBP कमांडो से SPG तक निभाईं सुरक्षा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां
नंद लाल का जन्म 16 अप्रैल 1954 को रामपुर बुशहर के देवठी गांव में हुआ था। उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) में अपनी सेवाएं शुरू कीं। इस दौरान वह कमांडो दल का हिस्सा रहे और सुरक्षा से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
सरकारी सेवा के दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर में ITBP की एक बटालियन की कमान भी संभाली। इसके बाद उन्हें विशेष सुरक्षा समूह यानी SPG में सेवाएं देने का अवसर मिला। SPG में रहते हुए उन्होंने देश के महत्वपूर्ण व्यक्तियों की सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाईं।
सुरक्षा सेवाओं में उनके योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था। अपनी सेवा के दौरान उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में भी सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियां निभाईं।
लंबे समय तक सुरक्षा सेवाओं में योगदान देने के बाद उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली और कांग्रेस के माध्यम से सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। यहीं से उनके जीवन का एक नया अध्याय शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने रामपुर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए लगातार चार विधानसभा चुनाव जीते।
2007 में पहली बार बने विधायक, चार चुनाव में लगातार दर्ज की जीत
नंद लाल ने वर्ष 2007 में पहली बार रामपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उनका मुकाबला भाजपा के बृज लाल से हुआ। नंद लाल ने उन्हें 6,470 मतों से हराकर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया।
पहली जीत के बाद उन्होंने क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखी। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने जीत दर्ज की। इस बार उन्होंने 9,471 मतों के अंतर से चुनाव जीता और दोबारा विधानसभा पहुंचे।
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भी उनका जीत का सिलसिला जारी रहा। उन्होंने इस चुनाव में 4,037 मतों से जीत हासिल की। लगातार तीन चुनाव जीतने के बाद वर्ष 2022 का विधानसभा चुनाव उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा।
इस बार मुकाबला बेहद करीबी था। भाजपा प्रत्याशी के साथ कांटे की टक्कर में नंद लाल ने मात्र 567 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। इस जीत के साथ ही उन्होंने लगातार चौथी बार रामपुर विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करने का रिकॉर्ड बनाया।
इस तरह वर्ष 2007, 2012, 2017 और 2022 में लगातार चार विधानसभा चुनाव जीतकर उन्होंने रामपुर की राजनीति में अपनी मजबूत मौजूदगी बनाए रखी। उनका यह चुनावी सफर उनके लंबे राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
मुख्य संसदीय सचिव से सातवें राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष तक पहुंचा राजनीतिक सफर
विधायक बनने के बाद नंद लाल को वर्ष 2013 में मुख्य संसदीय सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस दौरान उन्होंने विधानसभा की विभिन्न समितियों में भी काम किया और प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई।
दिसंबर 2022 में चौथी बार विधायक बनने के बाद उन्हें विधानसभा की कल्याण समिति का अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद मार्च 2024 में हिमाचल प्रदेश सरकार ने उन्हें सातवें राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया। इस नियुक्ति के साथ उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया गया।
राज्य वित्त आयोग की जिम्मेदारी प्रदेश की पंचायतों और नगर निकायों की आर्थिक स्थिति की समीक्षा करना तथा उनके लिए संसाधनों के वितरण से संबंधित सिफारिशें देना है। इस तरह नंद लाल का राजनीतिक सफर विधायक से लेकर विधानसभा समिति के अध्यक्ष और राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष तक पहुंचा।
नंद लाल को पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के करीबी नेताओं में गिना जाता था। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी उनके निधन पर दुख जताया। उन्होंने नंद लाल को कांग्रेस के प्रति समर्पित और अपने सिद्धांतों पर कायम रहने वाला नेता बताया।
रामपुर में शोक, अंतरराष्ट्रीय लवी मेले की गतिविधियां दो दिन के लिए स्थगित
नंद लाल के निधन का असर उनके गृह क्षेत्र रामपुर बुशहर में भी देखने को मिला। उनके निधन से पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। उपमंडल प्रशासन ने उनके निधन को क्षेत्र और प्रदेश के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।
उपमंडलाधिकारी (नागरिक) हर्ष अमरेंद्र सिंह के अनुसार, नंद लाल ने अपने सार्वजनिक जीवन में क्षेत्र के विकास और समाज के प्रति समर्पित रहकर काम किया। उनके निधन के सम्मान में प्रशासन ने 3 और 4 नवंबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय लवी मेला-2026 के तहत होने वाली पूर्व निर्धारित गतिविधियां स्थगित करने की घोषणा की है।
अंतरराष्ट्रीय लवी मेला रामपुर बुशहर की ऐतिहासिक पहचान और प्रदेश के प्रमुख व्यापारिक आयोजनों में शामिल है। ऐसे में मेले की गतिविधियों को स्थगित करने का निर्णय नंद लाल के निधन पर क्षेत्र की शोक संवेदना को दर्शाता है।
गौरतलब है कि वर्ष 2026 का अंतरराष्ट्रीय लवी मेला 11 से 14 नवंबर तक आयोजित किया जाना निर्धारित है। फिलहाल प्रशासन की ओर से केवल 3 और 4 नवंबर की पूर्व निर्धारित गतिविधियां स्थगित करने की घोषणा की गई है।
नंद लाल के निधन से रामपुर विधानसभा सीट हुई रिक्त, उपचुनाव पर रहेगी नजर
विधायक नंद लाल के निधन के बाद रामपुर विधानसभा सीट रिक्त हो गई है। अब इस सीट पर उपचुनाव कराने की प्रक्रिया निर्वाचन आयोग के आगामी निर्णय पर निर्भर करेगी।
नियमों के अनुसार, विधानसभा की कोई सीट रिक्त होने पर सामान्य परिस्थितियों में छह महीने के भीतर उपचुनाव कराया जाता है। हालांकि, कुछ निर्धारित परिस्थितियों में इसमें छूट का प्रावधान भी है।
फिलहाल निर्वाचन आयोग की ओर से रामपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव की तारीख या कार्यक्रम को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। ऐसे में आगामी चुनावी प्रक्रिया को लेकर निर्वाचन आयोग के निर्णय का इंतजार रहेगा।
सुरक्षा सेवाओं से जनसेवा तक का सफर, रामपुर की राजनीति में छोड़ी पहचान
नंद लाल का जीवन सुरक्षा बलों की जिम्मेदारियों से शुरू होकर विधानसभा और राज्य वित्त आयोग तक पहुंचा। उन्होंने ITBP में कमांडो के रूप में सेवाएं दीं, जम्मू-कश्मीर में एक बटालियन की कमान संभाली और SPG में रहते हुए देश के महत्वपूर्ण व्यक्तियों की सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाईं।
सरकारी सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने राजनीति को अपना कार्यक्षेत्र बनाया। वर्ष 2007 में पहली बार विधायक बने और इसके बाद लगातार चार विधानसभा चुनाव जीतकर रामपुर का प्रतिनिधित्व किया।
उनके निधन से रामपुर ने अपना निर्वाचित प्रतिनिधि खो दिया है। उनके परिवार, समर्थकों और क्षेत्र के लोगों के लिए यह अपूरणीय क्षति है। ITBP और SPG की सेवाओं से लेकर चार बार विधायक बनने और राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष की जिम्मेदारी तक का उनका सफर लंबे समय तक याद किया जाएगा।
Akhil Mahajan