सुबह से अस्पताल में जिसे इंसानी भ्रूण समझकर मचा रहा था हड़कंप, जांच में निकला बंदर का बच्चा

हिसार सिविल अस्पताल के पार्क में मिला संदिग्ध भ्रूण पहले इंसानी समझा गया, लेकिन पुलिस और फोरेंसिक जांच में बंदर का भ्रूण होने की पुष्टि हुई।

सुबह से अस्पताल में जिसे इंसानी भ्रूण समझकर मचा रहा था हड़कंप, जांच में निकला बंदर का बच्चा

➤ हिसार सिविल अस्पताल के पार्क में पॉलिथिन से ढकी संदिग्ध चीज मिलने पर सुबह से मचा रहा हड़कंप

➤ डिप्टी सिविल सर्जन ने बताया था करीब 8 महीने का इंसानी भ्रूण, प्री-टर्म डिलीवरी की जताई थी आशंका

➤ पुलिस और फोरेंसिक टीम की जांच में खुला राज, गायनेकोलॉजिस्ट ने भी बंदर का भ्रूण होने की पुष्टि की


सुबह अस्पताल के पार्क में पॉलिथिन से ढकी एक संदिग्ध चीज दिखाई दी। देखते ही देखते खबर फैली कि सिविल अस्पताल परिसर में किसी ने नवजात का भ्रूण फेंक दिया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची तो शुरुआती जांच में इसे करीब आठ महीने का इंसानी भ्रूण मान लिया गया। प्री-टर्म डिलीवरी से लेकर किसी महिला द्वारा भ्रूण छोड़ने तक की आशंकाएं जताई जाने लगीं। पुलिस बुलाई गई, फोरेंसिक टीम ने जांच शुरू की और घटनास्थल की घेराबंदी कर दी गई। लेकिन जांच पूरी हुई तो मामला बिल्कुल उलट निकला। जिस भ्रूण को लेकर अस्पताल में दिनभर हलचल मची रही, वह इंसान का नहीं, बल्कि बंदर का भ्रूण था।

सुबह मिली सूचना, अस्पताल में पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम

मामला हिसार के सिविल अस्पताल के पार्क का है। मंगलवार को यहां पॉलिथिन से ढकी एक संदिग्ध वस्तु मिलने की सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी गई थी। इसके बाद डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. अनामिका बिश्नोई मौके पर पहुंचीं। उन्होंने बताया कि उन्हें डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. सुभाष खतरेजा से पार्क में भ्रूण पड़े होने की जानकारी मिली थी।

मौके पर पहुंचकर जब उन्होंने देखा तो पॉलिथिन के नीचे भ्रूण जैसा हिस्सा दिखाई दे रहा था। उसका आकार देखकर शुरुआती तौर पर करीब आठ से साढ़े आठ महीने के इंसानी भ्रूण की आशंका जताई गई।

प्री-टर्म डिलीवरी और महिला से जुड़ी आशंका भी जताई

डॉ. अनामिका बिश्नोई ने शुरुआती निरीक्षण के आधार पर आशंका जताई थी कि किसी महिला की प्री-टर्म डिलीवरी हुई होगी और इसके बाद भ्रूण को पार्क में छोड़ दिया गया होगा। उन्होंने मामले की सूचना पुलिस को दी और संबंधित क्षेत्र को सुरक्षित करवाया, ताकि जांच से पहले कोई छेड़छाड़ न हो।

शुरुआती जानकारी के आधार पर मामला गंभीर लग रहा था। ऐसे में पुलिस और फोरेंसिक विशेषज्ञों को भी मौके पर बुलाया गया।

फोरेंसिक जांच ने पलट दी पूरी कहानी

पुलिस और फोरेंसिक टीम ने संदिग्ध भ्रूण की जांच की तो सामने आया कि वह इंसानी नहीं, बल्कि बंदर का भ्रूण है। इसके बाद अस्पताल में शुरुआती तौर पर जताई गई इंसानी भ्रूण की आशंका गलत साबित हो गई।

सिटी थाना प्रभारी सुरेंद्र कुमार ने बताया कि फोरेंसिक टीम की जांच में बंदर का भ्रूण होने की जानकारी सामने आई। सिविल अस्पताल की गायनेकोलॉजिस्ट ने भी इसकी पुष्टि की कि वह मानव भ्रूण नहीं था।

पुलिस ने सुरक्षित कराया था घटनास्थल

सूचना मिलने के बाद पुलिस ने पार्क के उस हिस्से की घेराबंदी कर दी थी, जहां संदिग्ध भ्रूण मिला था। आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगालने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, ताकि पता लगाया जा सके कि वह वहां कैसे पहुंचा।

हालांकि, जांच में बंदर का भ्रूण होने की पुष्टि के बाद शुरुआती आशंकाओं का आधार समाप्त हो गया। उपलब्ध जानकारी में अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि बंदर का भ्रूण अस्पताल के पार्क तक किन परिस्थितियों में पहुंचा।

एक सूचना से शुरू हुआ हड़कंप, जांच ने सामने रखी दूसरी सच्चाई

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम बात यह रही कि पहली नजर में दिखाई देने वाली चीज को इंसानी भ्रूण मान लिया गया, लेकिन विशेषज्ञों की जांच में उसकी पहचान कुछ और निकली। इस मामले ने एक बार फिर दिखाया कि संवेदनशील घटनाओं में शुरुआती अनुमान के बजाय वैज्ञानिक जांच और विशेषज्ञों की पुष्टि कितनी जरूरी है।