सोना-चांदी छोड़ें ! 10 रुपए की ये छोटी सी चीज धनतेरस पर सुख-समृद्धि लाएगी
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➤ धनतेरस पर 10 रुपये का साबुत धनिया खरीदना भी शुभ माना जाता है
➤ ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार धनिया का संबंध धन और खुशहाली से जोड़ा जाता है
➤ दीपावली पर पूजा के बाद धनिया के बीज गमलों या आंगन में बोने की परंपरा
धनतेरस पर सोना-चांदी और महंगे बर्तन खरीदने की परंपरा के बीच एक ऐसी छोटी-सी चीज भी है, जिसे धार्मिक मान्यताओं में सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। यह चीज है साबुत धनिया, जो बाजार में करीब 10 रुपये में भी मिल जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार धनतेरस के दिन साबुत धनिया खरीदकर घर लाना शुभ माना जाता है। इसे धन और खुशहाली से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन धनिया घर लाने और भगवान धनवंतरी तथा कुबेर देव की पूजा में शामिल करने से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इस साल धनतेरस का पर्व 6 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा।
धनतेरस पर क्यों खरीदा जाता है साबुत धनिया
धनतेरस हर साल कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान धनवंतरी और धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है। परंपरागत रूप से लोग इस अवसर पर सोना, चांदी, आभूषण, बर्तन और दूसरी उपयोगी वस्तुएं खरीदते हैं।
ज्योतिषविदों की मान्यता के अनुसार, धनतेरस पर साबुत धनिया खरीदना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इसे धन, बरकत और खुशहाली का प्रतीक माना गया है। खास बात यह है कि इसके लिए ज्यादा खर्च करने की जरूरत नहीं होती। बाजार से थोड़ी मात्रा में साबुत धनिया करीब 10 रुपये में भी खरीदा जा सकता है।
पूजा में कैसे शामिल करें साबुत धनिया
धार्मिक मान्यता के अनुसार, धनतेरस के दिन थोड़ा-सा साबुत धनिया खरीदकर घर लाएं। इसे किसी साफ पात्र या कलश में रखकर भगवान की चौकी के पास स्थापित किया जा सकता है। पूजा के समय इसे भगवान को अर्पित करें और परिवार की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली के लिए प्रार्थना करें।
दीपावली के दिन माता लक्ष्मी को करें अर्पित
धनतेरस के बाद भी इस धनिये को पूजा में शामिल करने की परंपरा बताई गई है। दीपावली यानी कार्तिक अमावस्या के दिन इसी धनिये के बीज माता लक्ष्मी को अर्पित किए जाते हैं।
धार्मिक विधि के अनुसार, पूजा पूरी होने के अगले दिन इन बीजों को घर के आंगन या छत पर रखे गमलों में बोया जा सकता है। मान्यता है कि धनिये के बीजों से उगने वाला पौधा घर की उन्नति, सौभाग्य और खुशहाली का प्रतीक होता है।
महंगी खरीदारी जरूरी नहीं, आस्था से जुड़ी है परंपरा
धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदना हर किसी के लिए संभव नहीं होता। ऐसे में साबुत धनिया जैसी कम कीमत वाली वस्तु को भी धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, इससे धन या आर्थिक लाभ मिलने की बात धार्मिक मान्यता और आस्था का विषय है, इसकी कोई वैज्ञानिक गारंटी नहीं है।
Akhil Mahajan