पूर्व केंद्रीय मंत्री पर 200 करोड़ की जमीन हड़पने का आरोप

पानीपत में आरटीआई एक्टिविस्ट ने पूर्व केंद्रीय मंत्री चौ चांद राम और उनके परिवार पर दलित-पिछड़ों के तकनीकी संस्थान के लिए अलॉट हुई 14.75 एकड़ और करीब 200 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन हड़पने का आरोप लगाया है। डीसी ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री पर 200 करोड़ की जमीन हड़पने का आरोप

दलित-पिछड़ों के तकनीकी संस्थान की 15 एकड़ भूमि पर कब्जे की शिकायत, डीसी ने गठित की जांच टीम

➤ पूर्व केंद्रीय मंत्री चौ चांद राम और परिवार पर 200 करोड़ की जमीन हड़पने का आरोप
➤ आरटीआई एक्टिविस्ट की शिकायत पर डीसी ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई
➤ दलित-पिछड़ों के तकनीकी संस्थान के लिए अलॉट हुई थी 14.75 एकड़ जमीन

पानीपत में पूर्व केंद्रीय मंत्री चौ चांद राम और उनके परिवार पर दलित-पिछड़े वर्ग के लिए बनाए जाने वाले तकनीकी संस्थान की करीब 200 करोड़ रुपए मूल्य की 14.75 एकड़ जमीन हड़पने का गंभीर आरोप लगा है। आरटीआई एक्टिविस्ट कॉमरेड पीपी कपूर ने इस मामले को लेकर जिला उपायुक्त को शिकायत दी है। शिकायत मिलने के बाद डीसी वीरेंद्र कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी है। इस टीम में डीटीपी (प्लानिंग) और तहसीलदार को भी शामिल किया गया है। जांच टीम ने आरोपों की पड़ताल शुरू कर दी है।

1978 में बनाई गई थी शिक्षा सोसायटी

शिकायत के अनुसार वर्ष 1978 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री और रोहतक से सांसद रहे चौ चांद राम ने ऑल इंडिया अंत्योदय एजुकेशन सोसाइटी को रजिस्टर्ड कराया था। इस सोसायटी में कई केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधायक और वरिष्ठ अधिकारी शामिल बताए गए हैं। इस सोसायटी का उद्देश्य दलित और पिछड़े वर्ग के बच्चों को तकनीकी शिक्षा देने के लिए संस्थान स्थापित करना था।

1982 में सरकार से रियायती दरों पर मिली जमीन

बताया गया है कि वर्ष 1982 में हरियाणा सरकार के पुनर्वास विभाग से असंध रोड क्षेत्र में दोनों नहर पार इंसार इलाके में 14.75 एकड़ जमीन रियायती दरों पर अलॉट करवाई गई थी। अलॉटमेंट की शर्तों के अनुसार इस जमीन का उपयोग केवल तकनीकी संस्थान चलाने के लिए किया जाना था। अगर जमीन का अन्य उपयोग किया जाता है तो सरकार को अलॉटमेंट रद्द कर जमीन वापस लेने और जमा राशि जब्त करने का अधिकार था।

आधा एकड़ में आईटीआई, बाकी जमीन ठेके पर

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 1984 में मात्र आधा एकड़ जमीन पर ‘विधाता टेक्निकल इंस्टीट्यूट’ नाम से आईटीआई शुरू की गई थी। बाकी जमीन को कृषि कार्य के लिए ठेके पर दे दिया गया। यह आईटीआई भी वर्ष 1995 में बंद हो गई, जिसके बाद पूरी जमीन का उपयोग खेती और अन्य गतिविधियों के लिए किया जाता रहा। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जमीन पर बाउंसर तैनात कर दिए गए हैं और भूमि माफिया का कब्जा बना हुआ है।

परिवार लेता रहा जमीन से होने वाली आमदनी

आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर का आरोप है कि पिछले करीब 48 वर्षों से जमीन को ठेके पर देकर होने वाली आमदनी चौ चांद राम और उनका परिवार लेता रहा। वर्ष 2015 में चौ चांद राम के निधन के बाद पहले उनकी पत्नी, फिर बेटा और अब बहू सोसायटी के नाम पर जमीन से होने वाली आय प्राप्त करते रहे। आरोप है कि जिस उद्देश्य के लिए सरकार से रियायती दरों पर जमीन ली गई थी, उसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया और जमीन को निजी संपत्ति की तरह इस्तेमाल किया गया।

सोसायटी का न नवीनीकरण, न ऑडिट

शिकायत में यह भी कहा गया है कि वर्ष 1978 में सोसायटी के पंजीकरण के बाद न तो उसका नवीनीकरण कराया गया, न ऑडिट हुआ और न ही कोई बैठक आयोजित की गई।  यह भी आरोप लगाया कि पानीपत के एक बड़े भाजपा नेता के संरक्षण के कारण भूमि माफिया के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हो पाई और सरकारी जमीन पर कब्जा बना रहा।

यह की गई मांग

शिकायत में प्रशासन से मांग की गई है कि 14.75 एकड़ जमीन का अलॉटमेंट तुरंत रद्द कर सरकार कब्जा ले। साथ ही जमीन की निशानदेही कर वहां बने होटल और अन्य अवैध कब्जों को हटाया जाए। इसके अलावा जमीन को ठेके पर देकर पिछले वर्षों में प्राप्त हुई संपूर्ण आय को ब्याज सहित वसूलने और भूमि माफिया के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर केस दर्ज करने की भी मांग की गई है। मामले में जांच शुरू होने के बाद अब प्रशासनिक कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।