■ 590 करोड़ IDFC बैंक फ्रॉड में हरियाणा के दो अधिकारी गिरफ्तार
■ सरकारी विभागों का पैसा FD में लगाने के बजाय शेल कंपनियों में ट्रांसफर करने का आरोप
■ ACB की कार्रवाई, आरोपियों को कोर्ट से 4 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया
हरियाणा में सरकारी विभागों की जमा राशि से जुड़े 590 करोड़ रुपये के IDFC बैंक फ्रॉड मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसी के अनुसार इन अधिकारियों ने बैंक कर्मचारियों के साथ मिलकर सरकारी धन की हेराफेरी करने की साजिश रची और उसे फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करने के बजाय फर्जी कंपनियों के खातों में ट्रांसफर करवाया।
पुलिस ने दोनों अधिकारियों को पंचकूला कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें 4 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। इस मामले में सावन ज्वेलर्स के मालिक राजन को भी 4 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है, जबकि एक अन्य आरोपी अंकुर शर्मा को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
जांच एजेंसी के अनुसार दोनों अधिकारियों ने जानबूझकर हरियाणा सरकार के वित्त विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया। आरोप है कि उन्होंने बैंक के अधिकारियों के साथ मिलकर सरकारी विभागों की बड़ी रकम को फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करने की अनुमति दी, लेकिन बाद में इस राशि को एफडी में जमा करने के बजाय शेल कंपनियों के खातों में डायवर्ट कर दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया में सरकारी धन की हेराफेरी की गई और इसमें शामिल लोगों को भारी रिश्वत भी मिली।
एसीबी की टीम ने हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड में तैनात राजेश सांगवान (नियंत्रक वित्त एवं लेखा) और हरियाणा विद्यालय शिक्षा परियोजना परिषद में तैनात रणधीर सिंह (नियंत्रक वित्त एवं लेखा) को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान सरकारी कर्मचारियों की संलिप्तता और रिश्वत लेने के प्रमाण मिलने पर एसीबी ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 भी जोड़ दी है।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस घोटाले में कैश कन्वर्जन के लिए ज्वेलर्स का भी इस्तेमाल किया गया। प्रारंभिक जांच के अनुसार सावन ज्वेलर्स के मालिक राजन ने मुख्य आरोपियों के लिए नकदी को वैध दिखाने का काम किया। इसके लिए फर्जी तरीके से सोने के आभूषण बेचने के बिल तैयार किए गए और इसके बदले भारी कमीशन लिया गया। पुलिस का कहना है कि आरोपी ने इस साजिश की शुरुआत से ही अहम भूमिका निभाई और योजना के तहत अपराध को अंजाम देने में सहयोग किया।
दरअसल, हाल ही में हरियाणा में करीब 590 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड का खुलासा हुआ था। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी जांच शुरू कर दी है। ईडी के चंडीगढ़ जोन ने इस केस से जुड़े लोगों के 19 ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया था।
जांच में सामने आया है कि हरियाणा सरकार की विभिन्न एजेंसियों ने लगभग 590 करोड़ रुपये बैंक में जमा कराए थे। यह राशि फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करने के लिए दी गई थी। लेकिन आरोप है कि बैंक के कुछ अधिकारियों और अन्य आरोपियों ने मिलकर इस रकम को एफडी में जमा करने के बजाय निजी कंपनियों के खातों में ट्रांसफर कर दिया और बाद में इसे रियल एस्टेट और अन्य निवेश में लगा दिया गया।
एसीबी सूत्रों के अनुसार चंडीगढ़ सेक्टर-32 स्थित IDFC बैंक के मैनेजर रिभव ऋषि को इस पूरे घोटाले का मुख्य सूत्रधार माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि उसने रिलेशनशिप मैनेजर के साथ मिलकर पूरी योजना बनाई थी और करीब छह महीने पहले बैंक की नौकरी छोड़ दी थी।
जांच में सामने आया है कि बैंक का रिलेशनशिप मैनेजर अभय अधिकारियों से संपर्क कर अपनी शाखा में एफडी बनवाने के लिए लॉइजनिंग करता था। इसी दौरान उसने अपनी पत्नी स्वाति सिंगला और साले अभिषेक सिंगला को भी इस योजना में शामिल कर लिया।
स्वाति सिंगला ने स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट नाम से एक कंपनी बनाई, जिसमें उसकी 75 प्रतिशत हिस्सेदारी बताई जा रही है। आरोप है कि इसी कंपनी के जरिए सरकारी धन को दूसरे खातों में ट्रांसफर किया गया और बाद में उसे प्रॉपर्टी और शेयर बाजार में लगाया गया। वहीं अभिषेक सिंगला की कंपनी में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी बताई जा रही है और वह रियल एस्टेट में पैसे लगाने और निकालने का काम संभालता था।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह घोटाला काफी बड़े नेटवर्क के जरिए अंजाम दिया गया और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और लोगों के नाम सामने आ सकते हैं। फिलहाल एसीबी और ईडी दोनों एजेंसियां पूरे मामले की गहन जांच कर रही हैं।