फतेहाबाद के दो अफसर कतर से ला रहे LPG: युद्ध के बीच होर्मुज मार्ग पार कर भारत की ओर बढ़े जहाज
फतेहाबाद के दो मर्चेंट नेवी अधिकारी अनिल भांभू और कृष्ण गोदारा कतर से 92,700 टन एलपीजी लेकर भारत आ रहे जहाजों पर तैनात हैं। युद्ध प्रभावित होर्मुज मार्ग से गुजरते हुए ये जहाज मुंद्रा और कांडला बंदरगाह की ओर बढ़ रहे हैं।
■ फतेहाबाद के अनिल भांभू और कृष्ण गोदारा मर्चेंट नेवी में अधिकारी
■ दो जहाजों में 92,700 टन LPG लेकर भारत की ओर बढ़ रहे
■ युद्ध के कारण होर्मुज मार्ग पर फंसे जहाजों के बीच सुरक्षित निकले
देश में एलपीजी गैस की आपूर्ति बनाए रखने के प्रयासों के बीच हरियाणा के फतेहाबाद जिले के दो युवकों का योगदान सामने आया है। जिले के गांव कुम्हारिया और सरवरपुर के रहने वाले अनिल भांभू और कृष्ण गोदारा मर्चेंट नेवी में अधिकारी के रूप में तैनात हैं और वे उन जहाजों पर सेवा दे रहे हैं जो कतर से एलपीजी गैस लेकर भारत की ओर आ रहे हैं।जानकारी के अनुसार, युद्ध प्रभावित होर्मुज मार्ग से भारतीय ध्वज वाले दो जहाज शिवालिक और नंदा देवी शनिवार सुबह सुरक्षित गुजर गए। इन दोनों जहाजों में कुल 92,700 टन एलपीजी गैस लदी हुई है।
दोनों जहाज अब गुजरात के मुंद्रा और कांडला बंदरगाह की ओर बढ़ रहे हैं। अनुमान है कि ये जहाज 16–17 मार्च तक भारत पहुंच जाएंगे।गांव कुम्हारिया के कृष्ण गोदारा जहाज नंदा देवी पर अधिकारी के रूप में तैनात हैं, जबकि गांव सरवरपुर के अनिल भांभू जहाज शिवालिक पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।बताया जा रहा है कि क्षेत्र में युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज मार्ग के पश्चिमी हिस्से में 24 भारतीय जहाज फंस गए थे। इनमें से दो जहाज अब सुरक्षित निकलकर भारत की ओर रवाना हो चुके हैं।
इसके अलावा फारस की खाड़ी में अभी भी 22 भारतीय जहाज कतार में खड़े हैं, जिन पर करीब 611 नाविक सवार हैं। वहीं चार अन्य भारतीय जहाज होर्मुज के पूर्वी हिस्से में भी फंसे हुए बताए जा रहे हैं।परिवार के अनुसार कृष्ण गोदारा मुख्य अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं, जबकि अनिल भांभू सेकेंड अधिकारी हैं। दोनों अधिकारी 25 फरवरी को जहाज लेकर कतर में एलपीजी गैस लोड करने गए थे।
इसी बीच क्षेत्र में युद्ध की स्थिति बनने के कारण उनका जहाज कुछ समय के लिए वहीं फंस गया था, लेकिन अब वे सुरक्षित मार्ग से भारत की ओर बढ़ रहे हैं।
अनिल भांभू के भाई सुनील के अनुसार, अनिल की उम्र करीब 30 वर्ष है और वह करीब आठ साल पहले मर्चेंट नेवी में भर्ती हुए थे। शुरू से ही उन्हें समुद्री सेवा में जाने का जुनून था।परिवार में उनके पिता कृष्ण कुमार, माता सुशीला, भाभी उषा और भतीजा कुशांत हैं, जो लगातार उनके सुरक्षित लौटने की दुआ कर रहे हैं।
परिवार के सदस्यों के अनुसार शुरू में उन्हें काफी चिंता थी, लेकिन अब उन्हें गर्व महसूस हो रहा है कि उनका बेटा देश के लिए काम कर रहा है।
परिवार के लोग व्हाट्सएप कॉल के जरिए अनिल से लगातार संपर्क में हैं और उनकी कुशलक्षेम पूछ रहे हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि सोमवार शाम तक जहाज अपने गंतव्य बंदरगाह तक पहुंच जाएंगे।
परिवार का कहना है कि जहाज के सुरक्षित मार्ग से गुजरने में भारत सरकार, भारतीय नेवी और शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की अहम भूमिका रही है।
shubham