यूक्रेन युद्ध में हरियाणा के दूसरे युवक की भी मौत
फतेहाबाद के युवक विजय पूनिया की यूक्रेन युद्ध में मौत हो गई। रूस में नौकरी के नाम पर सेना में भर्ती कर युद्ध में भेजा गया, 25 दिन पहले गांव के अंकित की भी मौत हुई थी।
➤ यूक्रेन युद्ध में फतेहाबाद के दूसरे युवक विजय पूनिया की मौत
➤ रूस में नौकरी के लालच में सेना में भर्ती कर युद्ध में धकेला गया
➤ 25 दिन पहले गांव के अंकित जांगड़ा की भी हो चुकी है मौत
हरियाणा के फतेहाबाद जिले के गांव कुम्हारिया से एक और दर्दनाक खबर सामने आई है। रूस की सेना में भर्ती होने के बाद यूक्रेन युद्ध में धकेले गए युवक विजय पूनिया की मौत हो गई है। उसकी डेडबॉडी दिल्ली भेजी गई है, जिसे लेने के लिए परिजन वहां पहुंचे हैं।
इससे पहले इसी गांव के युवक अंकित जांगड़ा की भी मौत हो चुकी है। करीब 25 दिन बाद अब विजय का पार्थिव शरीर भारत पहुंचा है। दोनों युवक बेहतर भविष्य और अच्छी कमाई की तलाश में रूस गए थे, लेकिन वहां उन्हें नौकरी का झांसा देकर सेना में भर्ती कर लिया गया और युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया।
विजय पूनिया के परिवार की स्थिति बेहद दयनीय है। उसके पिता का पहले ही निधन हो चुका है। परिवार में अब केवल मां और छोटा भाई ही हैं। बेटे की मौत की खबर से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
जानकारी के अनुसार, विजय जुलाई 2025 में बिजनेस वीजा पर रूस गया था। वहां एजेंटों ने उसे नौकरी का लालच देकर अपने जाल में फंसा लिया और जबरन रूसी सेना में भर्ती कर दिया। इसके बाद उसे यूक्रेन के डोनेत्स्क जैसे खतरनाक युद्ध क्षेत्र में भेजा गया, जहां उसकी मौत हो गई।
विजय के साथ गांव का ही युवक अंकित जांगड़ा भी इसी तरह ठगी का शिकार हुआ था। अंकित फरवरी 2025 में स्टडी वीजा पर रूस गया था। 13 सितंबर 2025 को उसने परिवार को आखिरी वॉइस मैसेज भेजा था, जिसमें कहा था कि उन्हें युद्ध में भेजा जा रहा है और अगर बचा सकते हो तो बचा लो। इसके बाद दोनों से संपर्क टूट गया था।
विजय का विदेश जाने का सिलसिला भी संघर्ष भरा रहा। वह जुलाई 2024 में स्टडी वीजा पर रूस गया था, लेकिन वीजा एक्सटेंड नहीं होने के कारण लौट आया। बाद में अक्टूबर 2024 में दोबारा गया और फिर मार्च 2025 में वापस लौटा। इसके बाद 15 जुलाई 2025 को एक साल के बिजनेस वीजा पर फिर रूस गया। परिवार ने उसे विदेश भेजने के लिए लोन तक लिया था।
परिजनों के अनुसार, रूस में एक महिला एजेंट ने अंकित और विजय सहित करीब 15 युवकों को नौकरी का लालच दिया था। बाद में उसी महिला ने व्हाट्सऐप कॉल पर बताया कि दोनों की मौत हो चुकी है और फिर नंबर ब्लॉक कर दिया।
11 सितंबर 2025 के बाद से दोनों युवकों का परिवार से कोई संपर्क नहीं हुआ था। लंबे समय तक परिवार उनकी सलामती की उम्मीद करता रहा, लेकिन पहले अंकित और अब विजय की मौत की पुष्टि हो गई।
दोनों युवकों को वापस लाने के लिए परिवार ने हर स्तर पर प्रयास किए। परिजन दिल्ली और चंडीगढ़ जाकर रूसी एंबेसी, विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय से मदद की गुहार लगाते रहे। सिरसा सांसद कुमारी सैलजा, रोहतक सांसद दीपेंद्र हुड्डा और अन्य नेताओं ने भी इस मामले में विदेश मंत्री को पत्र लिखे थे, लेकिन दोनों युवकों को बचाया नहीं जा सका।
अब गांव कुम्हारिया में लगातार दूसरी मौत से शोक का माहौल है और पूरे क्षेत्र में गहरा दुख व्याप्त है।
Akhil Mahajan