कैल्शियम की कमी के नुकसान,हड्डियों के अलावा शरीर पर भी पड़ता है असर
कैल्शियम की कमी से हड्डियां कमजोर होने के साथ मांसपेशियों में ऐंठन और हाथ-पैर सुन्न पड़ सकते हैं। जानिए कैल्शियम और विटामिन-डी के स्रोत
कैल्शियम सिर्फ हड्डियों और दांतों के लिए नहीं, मांसपेशियों और दिल की सामान्य कार्यप्रणाली के लिए भी जरूरी
➤ कमी होने पर मांसपेशियों में ऐंठन, हाथ-पैर सुन्न पड़ने और हड्डियों के टूटने का खतरा बढ़ सकता है
➤ कैल्शियम के बेहतर अवशोषण के लिए विटामिन-डी जरूरी, दूध-दही-पनीर, बादाम और हरी सब्जियां अच्छे स्रोत
कैल्शियम का नाम आते ही सबसे पहले हड्डियों और दूध का ख्याल आता है। हालांकि, शरीर में कैल्शियम का काम सिर्फ हड्डियों को मजबूत बनाए रखना नहीं है। यह दांतों की मजबूती, मांसपेशियों के सही तरीके से काम करने और दिल की धड़कन को सामान्य रखने में भी अहम भूमिका निभाता है। इसलिए बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों, हर उम्र में शरीर को पर्याप्त कैल्शियम मिलना जरूरी है।
अगर खानपान में लंबे समय तक कैल्शियम की कमी रहती है तो इसका असर धीरे-धीरे हड्डियों पर दिखाई देना शुरू हो सकता है। शरीर में कैल्शियम बहुत कम होने पर हाइपोकैल्सीमिया की स्थिति हो सकती है। इसमें मांसपेशियों में ऐंठन, हाथ-पैर सुन्न पड़ना और भ्रम जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। साथ ही हड्डियों के टूटने का खतरा भी बढ़ जाता है।
लंबे समय तक कैल्शियम की कमी रहने पर हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए शरीर में कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा बनाए रखना जरूरी है।
सिर्फ कैल्शियम लेना काफी नहीं, विटामिन-डी भी जरूरी
कैल्शियम हड्डियों के निर्माण और उनकी मजबूती बनाए रखने में मदद करता है। वहीं विटामिन-डी शरीर को खाने से मिले कैल्शियम को अवशोषित करने में मदद करता है। यानी दोनों पोषक तत्व एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
अगर आपके आहार में कैल्शियम पर्याप्त मात्रा में है, लेकिन शरीर में विटामिन-डी की कमी है तो कैल्शियम का अवशोषण प्रभावित हो सकता है। इसलिए हड्डियों को मजबूत रखने के लिए खानपान में कैल्शियम के साथ विटामिन-डी की पर्याप्त मात्रा पर भी ध्यान देना चाहिए।
बादाम भी कैल्शियम का अच्छा स्रोत, लेकिन मात्रा का रखें ध्यान
कैल्शियम के लिए सिर्फ दूध पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। बादाम भी इसका अच्छा स्रोत है। करीब 28 ग्राम बादाम से रोज की कैल्शियम जरूरत का लगभग 6 प्रतिशत मिल सकता है।
बादाम में कैल्शियम के साथ फाइबर, प्रोटीन और स्वस्थ वसा भी होती है। इसे नाश्ते में या दूध के साथ लिया जा सकता है। हालांकि, बादाम को सीमित मात्रा में खाना बेहतर है, क्योंकि इसमें कैलोरी भी काफी होती है।
दूध, दही और पनीर को डाइट में करें शामिल
दूध और उससे बने खाद्य पदार्थ कैल्शियम के सबसे आसान स्रोतों में शामिल हैं। दूध, दही और पनीर को रोज की डाइट में शामिल करके कैल्शियम की जरूरत पूरी करने में मदद मिल सकती है।
बच्चों की बढ़ती उम्र में कैल्शियम खास तौर पर जरूरी होता है। वहीं उम्र बढ़ने के साथ भी हड्डियों की मजबूती बनाए रखने के लिए इसका पर्याप्त सेवन जरूरी रहता है।
हरी सब्जियां और कुछ फल भी कैल्शियम देने में मददगार
अगर आप कैल्शियम के लिए सिर्फ डेयरी उत्पादों पर निर्भर नहीं रहना चाहते तो हरी पत्तेदार सब्जियों को भी अपनी प्लेट में जगह दे सकते हैं। पालक, गोभी और कोलार्ड जैसी सब्जियों में कैल्शियम पाया जाता है।
इसके अलावा अंजीर और संतरे जैसे कुछ खाद्य पदार्थ भी डाइट में शामिल किए जा सकते हैं। अलग-अलग तरह के पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाने से शरीर को कई जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं और संतुलित आहार बनाए रखने में मदद मिलती है।
कैल्शियम की कमी से बचने के लिए संतुलित खानपान जरूरी
कैल्शियम शरीर के लिए कई स्तरों पर जरूरी पोषक तत्व है। इसकी कमी का असर केवल हड्डियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि मांसपेशियों और शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली पर भी पड़ सकता है। इसलिए रोज के खानपान में दूध, दही, पनीर, बादाम और हरी सब्जियों जैसे कैल्शियम वाले खाद्य पदार्थों को शामिल करना मददगार हो सकता है।
साथ ही शरीर कैल्शियम को बेहतर तरीके से अवशोषित कर सके, इसके लिए विटामिन-डी पर भी ध्यान देना जरूरी है।
Akhil Mahajan