शिमला में KNH की गायनी OPD शिफ्टिंग पर बवाल, महिलाओं का उग्र प्रदर्शन; पुलिस से हुई धक्का-मुक्की
शिमला में KNH की गायनी OPD को IGMC शिफ्ट करने के विरोध में महिलाओं का उग्र प्रदर्शन हुआ। पुलिस से धक्का-मुक्की के बाद सड़क पर बैठीं प्रदर्शनकारी।
➤ KNH की गायनी OPD शिफ्टिंग के विरोध में महिलाओं का उग्र प्रदर्शन
➤ पुलिस से धक्का-मुक्की के बीच बैरिकेड हटाकर सड़क पर बैठीं प्रदर्शनकारी
➤ महिला समिति की चेतावनी, फैसला वापस नहीं हुआ तो आंदोलन होगा तेज
शिमला। राजधानी शिमला में कमला नेहरू अस्पताल (KNH) से गायनी OPD को IGMC शिफ्ट करने के फैसले के विरोध में मंगलवार को महिलाओं का प्रदर्शन उग्र हो गया। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति के बैनर तले बड़ी संख्या में महिलाएं छोटा शिमला सचिवालय के बाहर पहुंचीं और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेड लगाए, लेकिन स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब महिलाओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड हटा दिए और सचिवालय के बाहर सड़क पर बैठकर विरोध शुरू कर दिया। प्रदर्शन के चलते सर्कुलर रोड पर यातायात भी बाधित हुआ और सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
हिमलैंड से सचिवालय तक निकला पैदल मार्च
प्रदर्शन से पहले महिलाओं ने हिमलैंड से छोटा शिमला सचिवालय तक पैदल मार्च निकाला। बड़ी संख्या में महिलाएं नारे लगाते हुए सचिवालय की ओर बढ़ीं। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सर्कुलर रोड पर रास्ता बंद करने की व्यवस्था की।
सचिवालय के नजदीक पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच स्थिति तनावपूर्ण हो गई। महिलाओं ने लगाए गए बैरिकेड हटाने का प्रयास किया और बाद में उन्हें हटाकर आगे बढ़ गईं। इसके बाद प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गईं और सरकार के फैसले के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
सड़क पर बैठीं महिलाएं, यातायात व्यवस्था प्रभावित
सचिवालय के बाहर सड़क पर महिलाओं के बैठ जाने से सर्कुलर रोड का यातायात प्रभावित हुआ। प्रदर्शन के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। काफी देर तक यातायात व्यवस्था प्रभावित रहने से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ओर से स्थिति को नियंत्रित रखने का प्रयास किया गया। महिलाओं और पुलिस के बीच हुई धक्का-मुक्की के कारण कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण बना रहा।
पांच-छह महीने से जारी है विरोध
दरअसल, KNH की गायनी OPD को IGMC शिफ्ट करने के फैसले के खिलाफ महिला समिति पिछले करीब पांच-छह महीने से विरोध कर रही है। समिति का कहना है कि इस फैसले से महिलाओं को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाएं प्रभावित होंगी। अस्पताल के स्टाफ की ओर से भी इस निर्णय का विरोध किए जाने की बात कही गई है।
प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि KNH में महिलाओं को एक ही छत के नीचे इलाज की सुविधा मिलती है। महिला समिति का आरोप है कि कांग्रेस सरकार इस व्यवस्था को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
समिति का कहना है कि वह पिछले कई महीनों से सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग कर रही है, लेकिन अब तक उनकी मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया। इसी वजह से मंगलवार को विरोध प्रदर्शन को और व्यापक रूप दिया गया।
गर्भवती महिलाओं की परेशानी का मुद्दा उठाया
महिला समिति की राज्य महासचिव फालमा चौहान ने कहा कि गायनी OPD को IGMC में शिफ्ट करने से गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि महिलाएं करीब छह महीने से इस फैसले को वापस लेने की मांग कर रही हैं। समिति का कहना है कि अस्पतालों में मरीजों की संख्या और उपलब्ध सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए महिलाओं के इलाज से जुड़ी मौजूदा व्यवस्था को बनाए रखना जरूरी है।
फालमा चौहान ने कहा कि महिलाओं की सुविधा से जुड़े इस मुद्दे पर सरकार को उनकी मांग पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनका कहना है कि लंबे समय से विरोध के बावजूद फैसला वापस नहीं लिया गया, इसलिए महिलाओं को सड़क पर उतरकर विरोध करना पड़ा।
‘बना-बनाया अस्पताल उजाड़ रही सरकार’
फालमा चौहान ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नया अस्पताल या स्वास्थ्य संस्थान विकसित करने के बजाय पहले से स्थापित स्वास्थ्य संस्थान की सुविधाओं को कम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि करीब 100 साल पुराने KNH की अपनी ऐतिहासिक पहचान है और यहां लंबे समय से महिलाओं को एक ही छत के नीचे उपचार की सुविधाएं मिलती रही हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अस्पताल की मौजूदा सुविधाओं को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। महिला समिति का कहना है कि यदि स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत बढ़ रही है तो सरकार को नई सुविधाएं विकसित करनी चाहिए, न कि पुराने और स्थापित अस्पताल की सेवाओं को दूसरी जगह स्थानांतरित करना चाहिए।
IGMC पर पहले से मरीजों का भारी दबाव
महिला समिति ने IGMC में पहले से मौजूद मरीजों के दबाव का मुद्दा भी उठाया है। समिति के मुताबिक IGMC की OPD में रोजाना 3,000 से अधिक मरीज पहुंचते हैं।
ऐसे में समिति का कहना है कि यदि KNH की गायनी OPD को भी IGMC में शिफ्ट कर दिया जाता है तो अस्पताल पर मरीजों का अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। इससे खास तौर पर महिलाओं और गर्भवती मरीजों को इलाज के लिए अधिक भीड़ और इंतजार का सामना करना पड़ सकता है।
महिला समिति का तर्क है कि मरीजों की संख्या को देखते हुए मौजूदा स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि इलाज के लिए आने वाले मरीजों को बेहतर और सुविधाजनक सेवाएं मिल सकें।
फैसला वापस नहीं हुआ तो आंदोलन होगा तेज
प्रदर्शन के दौरान महिला समिति ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि KNH की गायनी OPD को वापस KNH में संचालित रखने का निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
समिति ने प्रदेश की महिलाओं और आम लोगों से भी इस मुद्दे पर आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। समिति का कहना है कि यह केवल महिलाओं का मुद्दा नहीं है, बल्कि अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों की सुविधा से जुड़ा मामला है।
महिला समिति ने सरकार से मांग की है कि मरीजों की सुविधा और अस्पताल की मौजूदा व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए गायनी OPD को KNH में ही संचालित रखा जाए।
मामला हाईकोर्ट में भी विचाराधीन
फालमा चौहान ने बताया कि KNH की गायनी OPD से जुड़ा मामला हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है। उनका कहना है कि जब मामला न्यायालय में विचाराधीन है, तब सरकार को महिलाओं की सुविधा और अस्पताल की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कोई ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए, जिससे मरीजों को परेशानी हो।
उन्होंने दोहराया कि महिला समिति की मांग स्पष्ट है कि गायनी OPD को KNH में ही संचालित रखा जाए। समिति का कहना है कि करीब छह महीने से लगातार विरोध के बावजूद यदि सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
फिलहाल प्रदर्शन के दौरान हुई धक्का-मुक्की और सड़क पर प्रदर्शन के कारण राजधानी में माहौल तनावपूर्ण रहा। KNH की गायनी OPD की शिफ्टिंग को लेकर महिलाओं और सरकार के बीच विवाद अब आंदोलन से आगे बढ़कर न्यायिक स्तर पर भी पहुंच चुका है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार इस मामले में क्या रुख अपनाती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।
Akhil Mahajan