दिशा सालियान केस: BJP का सवाल, 'उद्धव ठाकरे सरकार किसे बचाना चाह रही थी'
दिशा सालियान मौत मामले में CBI ने छह साल बाद FIR दर्ज की। बीजेपी नेता राम कदम ने उद्धव ठाकरे सरकार पर जांच को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
➤ दिशा सालियान केस में CBI ने छह साल बाद FIR दर्ज की
➤ बीजेपी नेता राम कदम ने तत्कालीन उद्धव ठाकरे सरकार पर उठाए सवाल
➤ कहा- दिशा के पिता की बात क्यों नहीं सुनी गई, जांच से अब सच सामने आएगा
दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में छह साल बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सोमवार, 14 सितंबर को FIR दर्ज कर ली है। CBI की ओर से जांच शुरू किए जाने के बाद इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। बीजेपी नेता और विधायक राम कदम ने FIR का स्वागत करते हुए तत्कालीन उद्धव ठाकरे सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
राम कदम ने सवाल उठाया कि जब दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान लगातार यह कहते रहे कि उनकी बेटी ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उसके साथ प्रताड़ना हुई और उसकी हत्या की गई, तो तत्कालीन सरकार ने उनकी बात क्यों नहीं सुनी। उन्होंने यह भी सवाल किया कि आखिर उस समय इस मामले की जांच को गंभीरता से आगे बढ़ाने के बजाय इसकी कथित तौर पर लीपापोती क्यों की गई।
छह साल बाद FIR, राम कदम बोले- बेबस पिता को न्याय की उम्मीद
CBI की FIR के बाद प्रतिक्रिया देते हुए राम कदम ने कहा कि छह साल की लंबी प्रतीक्षा के बाद एक बेबस पिता को अपनी बेटी की मौत के मामले में न्याय मिल सके, इसी उम्मीद के साथ यह FIR दर्ज हुई है।
उन्होंने कहा कि जब दिशा के पिता खुद यह कह रहे थे कि उनकी बेटी को प्रताड़ित किया गया और उसकी हत्या हुई, तो तत्कालीन उद्धव ठाकरे सरकार को एक पिता की बात सुननी चाहिए थी। राम कदम ने सवाल किया कि आखिर उस समय सरकार ने इस मामले में पिता की शिकायत और उनके सवालों को गंभीरता से क्यों नहीं लिया।
उनके बयान के मुताबिक, मामला सिर्फ एक परिवार के आरोपों तक सीमित नहीं था, बल्कि दिशा के पिता लंबे समय से अपनी बेटी की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे थे। अब CBI के FIR दर्ज करने के बाद मामले की जांच एक नए स्तर पर पहुंच गई है।
उद्धव ठाकरे सरकार किसे बचाना चाह रही थी?- राम कदम
राम कदम ने तत्कालीन सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि उस समय की उद्धव ठाकरे सरकार आखिर किसे बचाना चाह रही थी।
उन्होंने कहा कि यदि तत्कालीन सरकार का इस मामले में कुछ भी हाथ नहीं था और वह किसी को बचाना नहीं चाहती थी, तो पुलिस को स्वतंत्र और गंभीरता से जांच करने के लिए कहा जाना चाहिए था।
राम कदम ने सवाल किया कि पुलिस को क्यों रोका गया और जब दिशा के पिता खुद मामले की जांच CBI को सौंपने की मांग कर रहे थे तो उनकी मांग क्यों नहीं मानी गई।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने कुछ गलत नहीं किया था तो उसे CBI जांच से डरने की जरूरत नहीं थी। उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति में सरकार को खुद जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंप देनी चाहिए थी, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।
'कानून सबके लिए समान है'
CBI की FIR में सामने आए नामों और मामले की आगे होने वाली जांच का जिक्र करते हुए राम कदम ने कहा कि कानून सबके लिए समान है।
उन्होंने कहा कि मुकदमा दर्ज हो चुका है और मामले में नेता, अभिनेता तथा कुछ अधिकारियों के नाम सामने आए हैं। कानून यह नहीं देखता कि कोई व्यक्ति कौन है या किस पद पर बैठा है।
राम कदम के मुताबिक, यदि जांच के दौरान किसी के खिलाफ कोई तथ्य या सबूत सामने आता है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं जिन लोगों के खिलाफ कोई आपराधिक भूमिका साबित नहीं होती, उनके बारे में भी निष्कर्ष जांच के आधार पर ही निकलना चाहिए।
'मुकदमा दर्ज होने के बाद सारी बातें सामने आएंगी'
राम कदम ने कहा कि देश यह जानना चाहता है कि जब दिशा के पिता बार-बार अपनी बेटी की मौत को लेकर सवाल उठा रहे थे, तब तत्कालीन सरकार ने उनकी बात क्यों नहीं सुनी।
उन्होंने सवाल किया कि क्या उस समय सरकार ने पिता की शिकायत को नजरअंदाज किया या किसी को बचाने की कोशिश की जा रही थी।
राम कदम ने कहा कि अब मुकदमा दर्ज हो चुका है और जांच आगे बढ़ेगी। ऐसे में आने वाले समय में वे सभी बातें सामने आ सकती हैं, जिनको लेकर पिछले कई वर्षों से सवाल उठते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि दिशा के पिता, देश और दिशा को चाहने वाले लोग लंबे समय से इसी बात का इंतजार कर रहे थे कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और सच्चाई सामने आए।
दिशा सालियान की मौत के बाद सुशांत सिंह राजपूत की भी हुई थी मौत
दिशा सालियान की मौत जून 2020 में मुंबई में हुई थी। उनकी मौत के कुछ ही दिनों बाद अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की भी मौत हो गई थी।
दोनों घटनाओं के बीच समय का अंतर बेहद कम होने के कारण वर्षों से सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा में दोनों मामलों को लेकर कई तरह के सवाल और दावे सामने आते रहे हैं। हालांकि, किसी भी आरोप या दावे को जांच के निष्कर्ष के बिना तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।
अब दिशा सालियान मामले में CBI की FIR दर्ज होने के बाद जांच एजेंसी के सामने घटना से जुड़े तमाम पहलुओं की जांच करने की जिम्मेदारी है। जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्य ही यह तय करेंगे कि मामले की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और किसी आपराधिक भूमिका की पुष्टि होती है या नहीं।
FIR से दो दिन पहले CBI के सामने दर्ज कराया था पिता ने बयान
CBI की FIR दर्ज होने से दो दिन पहले दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने केंद्रीय जांच ब्यूरो के सामने अपना बयान दर्ज कराया था।
पिता लंबे समय से अपनी बेटी की मौत की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। अब उनके बयान और मामले से जुड़े अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड भी CBI की जांच का हिस्सा बन सकते हैं।
छह साल पुराने मामले में FIR दर्ज होने के बाद अब जांच एजेंसी के सामने पुराने रिकॉर्ड, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित लोगों के बयानों की समीक्षा कर पूरे घटनाक्रम को समझने की चुनौती होगी।
फिलहाल इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि CBI ने FIR दर्ज कर जांच की औपचारिक शुरुआत कर दी है। राम कदम ने इसे न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए तत्कालीन उद्धव ठाकरे सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। अब जांच आगे बढ़ने के साथ यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि CBI के सामने कौन-कौन से तथ्य और साक्ष्य सामने आते हैं और छह साल पुराने इस मामले की वास्तविक तस्वीर क्या निकलकर आती है।
Akhil Mahajan