हिमाचल में एक माह तक डिजिटल अरेस्ट रहा सेवानिवृत्त अफसर: मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी देकर 33 लाख ठगे, हर गतिविधि पर रखते थे नजर
हिमाचल के कांगड़ा में 64 वर्षीय सेवानिवृत्त अधिकारी को एक माह डिजिटल अरेस्ट रख साइबर ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी देकर 33 लाख ठगे।
➤ कांगड़ा के 64 वर्षीय सेवानिवृत्त अधिकारी को एक माह तक डिजिटल अरेस्ट रख साइबर ठगों ने 33 लाख रुपये ठगे
➤ आधार पर बैंक खाता खुलने और 6.8 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल होने का डर दिखाकर आरटीजीएस से रकम ट्रांसफर कराई
➤ 12 अगस्त को 4 लाख और 20 अगस्त को 29 लाख भेजे, 28 अगस्त को फोन बंद होने पर ठगी का पता चला
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की तहसील धीरा में साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां 64 वर्षीय सेवानिवृत्त अधिकारी को साइबर ठगों ने करीब एक माह तक डिजिटल अरेस्ट रखा और मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने का डर दिखाकर 33 लाख रुपये ठग लिए। शातिरों ने खुद को दिल्ली की दूरसंचार कंपनी, पुलिस और सीबीआई के अधिकारी बताकर बुजुर्ग को लगातार मानसिक दबाव में रखा।
ठगों ने दावा किया कि पीड़ित के आधार कार्ड पर आईसीआईसीआई बैंक में एक खाता खोला गया है और इस खाते का इस्तेमाल 6.8 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लेनदेन के लिए किया गया है। इसके बाद उन्हें गिरफ्तारी वारंट जारी होने की बात कहकर डराया गया। गिरफ्तारी से बचाने और मामले को रफा-दफा करने के नाम पर उनसे रकम ट्रांसफर कराई गई।
ठगी का सिलसिला यहीं नहीं रुका। कथित सीबीआई अधिकारी बनकर बात करने वाले ठगों ने पीड़ित पर निगरानी रखने का नाटक किया। उन्हें हर एक-दो घंटे में अपनी कुशलता की जानकारी देने और घर से बाहर जाने या वापस लौटने पर तुरंत सूचना देने के लिए मजबूर किया गया।
लगातार करीब एक महीने तक मानसिक प्रताड़ना झेलने के बाद 28 अगस्त की सुबह ठगों के फोन और वीडियो कॉल अचानक बंद हो गए। इसके बाद पीड़ित को अपने साथ हुई ठगी का अहसास हुआ। मामले की शिकायत साइबर क्राइम पुलिस थाना धर्मशाला में दर्ज कराई गई है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(डी) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
30 जुलाई को आया फोन, आधार पर बैंक खाता खुलने का दावा
साइबर क्राइम पुलिस थाना धर्मशाला में दर्ज शिकायत के अनुसार, 30 जुलाई को 64 वर्षीय सेवानिवृत्त अधिकारी के पास एक फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली की एक दूरसंचार कंपनी का अधिकारी बताया।
उसने पीड़ित से कहा कि उनके आधार कार्ड पर आईसीआईसीआई बैंक में एक बैंक खाता खोला गया है। कथित तौर पर इस खाते का इस्तेमाल 6.8 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लेनदेन के लिए किया गया है।
अचानक सामने आए इस कथित गंभीर मामले से पीड़ित को डराने के बाद ठगों ने बातचीत को दूसरे स्तर पर पहुंचा दिया।
खुद को IPS अधिकारी बताया, गिरफ्तारी वारंट का डर दिखाया
इसके बाद एक अन्य ठग ने खुद को आईपीएस अधिकारी बताते हुए पीड़ित से बात की। उसने दावा किया कि उनके नाम पर गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है।
ठग ने आगे कहा कि उसने इस मामले को रफा-दफा करने के एवज में 70 लाख रुपये कमीशन लिया है। इस तरह आरोपियों ने पीड़ित को लगातार यह विश्वास दिलाने की कोशिश की कि वह एक गंभीर कानूनी मामले में फंस चुके हैं और किसी भी समय गिरफ्तार किए जा सकते हैं।
इसके बाद कथित सीबीआई अधिकारी ने मामले को और गंभीर दिखाने के लिए पीड़ित पर निगरानी रखने का नाटक शुरू कर दिया।
हर एक-दो घंटे में देनी पड़ती थी अपनी कुशलता की जानकारी
ठगों ने पीड़ित को निर्देश दिया कि वह हर एक-दो घंटे में अपनी कुशलता की जानकारी दें। इतना ही नहीं, घर से बाहर निकलने और वापस लौटने पर भी उन्हें तुरंत इसकी सूचना देने के लिए कहा गया।
आरोपियों ने पीड़ित को यह भी बताया कि उनकी सुरक्षा के लिए दो लोग तैनात किए गए हैं। इस तरह लगातार निगरानी और सुरक्षा का माहौल बनाकर उन्हें मानसिक रूप से दबाव में रखा गया।
करीब एक महीने तक चली इस कथित डिजिटल अरेस्ट के दौरान पीड़ित को अपने ऊपर किसी कानूनी कार्रवाई का डर बना रहा।
बैंक खातों और मोबाइल की जांच के नाम पर मांगी रकम
शातिरों ने पीड़ित को बताया कि उनके बैंक खातों और मोबाइल की जांच की जा रही है। जांच की प्रक्रिया को आसान बनाने के नाम पर आरोपियों ने उनसे अपनी सारी रकम एक विशेष खाते में ट्रांसफर करने को कहा।
पीड़ित आरोपियों के दबाव में आ गए और उन्होंने अलग-अलग तारीखों पर रकम ट्रांसफर कर दी।
12 अगस्त को 4 लाख रुपये और 20 अगस्त को 29 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से ठगों के खातों में भेजे गए। इस तरह कुल 33 लाख रुपये आरोपियों के खातों में पहुंच गए।
28 अगस्त को अचानक बंद हो गए फोन और वीडियो कॉल
करीब एक महीने तक मानसिक प्रताड़ना और दबाव झेलने के बाद 28 अगस्त की सुबह ठगों के फोन और वीडियो कॉल अचानक बंद हो गए।
जब लगातार संपर्क करने के बावजूद आरोपियों से बात नहीं हुई तो पीड़ित को पूरे मामले पर शक हुआ। इसके बाद उन्हें अहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।
इसके बाद उन्होंने साइबर क्राइम पुलिस थाना धर्मशाला में शिकायत दर्ज कराई।
साइबर क्राइम पुलिस ने दर्ज की FIR, जांच जारी
पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(डी) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
पुलिस मामले की आगामी जांच कर रही है। जांच में ठगों की पहचान, रकम जिन खातों में भेजी गई उनकी जानकारी और पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य तथ्यों को खंगाला जाएगा।
इस मामले में सबसे अहम बात यह रही कि साइबर ठगों ने करीब एक महीने तक लगातार डर और निगरानी का माहौल बनाकर सेवानिवृत्त अधिकारी को अपने नियंत्रण में रखा और इसी दौरान 33 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए।
Akhil Mahajan