गुरुग्राम में 17 महीने बाद सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव, धर्मबीर-अनूप के नाम पर लगी मुहर; BJP में 5.30 घंटे चला मंथन
गुरुग्राम नगर निगम में 17 महीने बाद सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव हुआ। धर्मबीर भंगरोला और अनूप चुने गए, भाजपा में 5.30 घंटे मंथन चला।
➤ 17 महीने बाद गुरुग्राम नगर निगम को मिले सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर
➤ धर्मबीर भंगरोला सीनियर डिप्टी मेयर और अनूप डिप्टी मेयर चुने गए
➤ चुनाव से पहले भाजपा में 5.30 घंटे मंथन, राव इंद्रजीत और राव नरबीर खेमों में खींचतान
गुरुग्राम नगर निगम में पिछले 17 महीनों से खाली पड़े सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पदों को आखिरकार नए पदाधिकारी मिल गए हैं। सीनियर डिप्टी मेयर पद पर धर्मबीर भंगरोला और डिप्टी मेयर पद पर अनूप को चुना गया है। दोनों पदों के चुनाव से पहले भाजपा के भीतर उम्मीदवारों के नाम को लेकर करीब 5 घंटे 30 मिनट तक गहन मंथन चला। पार्षदों की अलग-अलग कमरों में बैठकें हुईं और पार्टी स्तर पर सहमति बनाने की कोशिश की गई।
चुनाव को लेकर सुबह से ही राजनीतिक गतिविधियां तेज थीं। भाजपा नेतृत्व ने अपने पार्षदों को पार्टी कार्यालय गुरुकमल में बुलाया। यहां अलग-अलग नेताओं और उनके समर्थक पार्षदों के बीच चर्चा का दौर चला। इसके बाद हिपा कार्यालय में दोनों पदों के नाम तय किए गए। हाउस मीटिंग के दौरान केवल पार्षदों को अंदर जाने की अनुमति दी गई, जबकि अन्य लोगों को बाहर ही रोक दिया गया। संभावित हंगामे और विवाद को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए थे।
5.30 घंटे तक चलता रहा भाजपा के अंदर मंथन
दोनों पदों के लिए नाम तय करने से पहले भाजपा में लंबी बैठक चली। मंत्री महिपाल ढांडा, विधायक मुकेश शर्मा, सुधा यादव, संदीप जोशी और मेयर राजरानी मल्होत्रा ने अपने-अपने समर्थक पार्षदों के साथ चर्चा की। अलग-अलग स्तर पर बातचीत के बाद पार्टी कार्यालय में दोनों पदों के लिए नामों को अंतिम रूप दिया गया।
पार्टी नेतृत्व की कोशिश थी कि सदन में चुनाव की स्थिति आने से पहले ही पार्षदों के बीच सर्वसम्मति बना ली जाए। इससे पार्टी के भीतर किसी तरह की गुटबाजी सार्वजनिक रूप से सामने आने की संभावना को कम किया जा सके।
लंबी चर्चा के बाद सीनियर डिप्टी मेयर के लिए धर्मबीर और डिप्टी मेयर पद के लिए अनूप के नाम पर फैसला हुआ।
17 महीने से खाली थे दोनों महत्वपूर्ण पद
गुरुग्राम नगर निगम में सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पद लंबे समय से खाली थे। करीब 17 महीने से इन पदों पर कोई पदाधिकारी नहीं था। ऐसे में दोनों पदों का चुनाव नगर निगम की राजनीति के साथ-साथ शहर के प्रशासनिक कामकाज के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा था।
पद खाली रहने के कारण नगर निगम से जुड़े कई विकास कार्यों और प्रशासनिक फैसलों पर भी इसका असर पड़ने की बात सामने आती रही है। अब दोनों पदों पर नए पदाधिकारियों के चुने जाने के बाद स्थानीय विकास योजनाओं को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
जातीय समीकरण साधने की भी थी कोशिश
चुनाव से पहले भाजपा की रणनीति में जातीय समीकरण भी महत्वपूर्ण माने जा रहे थे। पार्टी स्तर पर ऐसी रणनीति तैयार की गई थी कि दोनों पदों में से एक पद अहीर यानी यादव समाज और दूसरा पद अनुसूचित जाति के खाते में जा सकता है।
इसी समीकरण को ध्यान में रखते हुए पार्षदों और पार्टी नेताओं के बीच लगातार विचार-विमर्श किया गया। पार्टी नेतृत्व का प्रयास था कि सामाजिक समीकरण के साथ-साथ संगठन के भीतर भी ऐसा संतुलन बनाया जाए, जिससे चुनाव के दौरान किसी तरह की असहमति सामने न आए।
राव इंद्रजीत और राव नरबीर खेमों के बीच दिखी खींचतान
गुरुग्राम नगर निगम के इन दोनों पदों का चुनाव केवल स्थानीय निकाय की सामान्य प्रक्रिया नहीं रहा। इसके पीछे भाजपा की आंतरिक राजनीति और गुटीय समीकरण भी चर्चा में रहे। गुरुग्राम की राजनीति के दो बड़े चेहरों केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह और हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह के खेमों के बीच अपने-अपने पसंदीदा पार्षदों को इन पदों पर बैठाने को लेकर खींचतान की चर्चा रही।
दोनों खेमे महत्वपूर्ण पदों पर अपने समर्थक पार्षदों को लाने के लिए प्रयासरत बताए गए। इसी वजह से चुनाव से पहले भाजपा के भीतर उम्मीदवारों को लेकर लंबी बैठकें और चर्चाएं हुईं।
पार्टी नेतृत्व की ओर से सर्वसम्मति बनाने का प्रयास किया गया। हालांकि, अगर सहमति नहीं बनती तो पार्टी व्हिप के बावजूद बैलेट पेपर से वोटिंग की स्थिति बन सकती थी।
गुरुकमल में पहुंचे भाजपा के पार्षद
चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले भाजपा आलाकमान की ओर से सभी पार्षदों को गुरुकमल कार्यालय में बुलाया गया था। पार्टी नेताओं ने पार्षदों के साथ अलग-अलग स्तर पर चर्चा की। महिला पार्षदों समेत कई पार्षद कार्यालय पहुंचे और बैठकों का दौर चलता रहा।
बैठक खत्म होने के बाद मेयर राजरानी मल्होत्रा भी कार्यालय से बाहर निकलीं। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान पार्टी नेतृत्व की कोशिश दोनों पदों के लिए नामों पर सहमति बनाने की रही।
हाउस मीटिंग में केवल पार्षदों को प्रवेश
नगर निगम की हाउस मीटिंग को लेकर भी प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। बैठक स्थल पर केवल पार्षदों को अंदर जाने की अनुमति दी गई। अन्य लोगों को गेट के बाहर रोक दिया गया।
नगर निगम कमिश्नर प्रदीप दहिया खुद गेट पर मौजूद रहे और यह सुनिश्चित किया कि बैठक में केवल अधिकृत पार्षद ही प्रवेश कर सकें। चुनाव को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई थी।
15 सितंबर की हाईकोर्ट सुनवाई से पहले हुआ चुनाव
सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव की प्रक्रिया ऐसे समय में हुई, जब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में 15 सितंबर को सुनवाई प्रस्तावित थी। इससे ठीक एक दिन पहले प्रशासन ने 14 सितंबर को सुबह 11 बजे हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान यानी हिपा में बैठक बुलाई थी।
चुनाव को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सभी तैयारियां पूरी की गई थीं। नगर निगम की ओर से चुनाव के लिए बाकायदा रिटर्निंग ऑफिसर की नियुक्ति की गई थी।
हंगामे की आशंका के चलते सुरक्षा के कड़े इंतजाम
दोनों पदों के चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी के बीच प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति को लेकर अलर्ट रहा। नगर निगम कमिश्नर प्रदीप दहिया ने चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से कराने के लिए तैयारियां पूरी होने की बात कही थी।
मतदान केंद्र के आसपास पुलिस बल तैनात किया गया। सुरक्षा व्यवस्था को इस तरह रखा गया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी तरह का विवाद या हंगामा होने पर तत्काल स्थिति संभाली जा सके।
नए पदाधिकारियों से विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद
गुरुग्राम नगर निगम में दोनों महत्वपूर्ण पद लंबे समय से खाली होने के कारण स्थानीय स्तर पर इनके चुनाव का इंतजार किया जा रहा था। अब धर्मबीर भंगरोला के सीनियर डिप्टी मेयर और अनूप के डिप्टी मेयर चुने जाने के बाद नगर निगम को दोनों पदाधिकारी मिल गए हैं।
इन नियुक्तियों के बाद शहर से जुड़े विकास कार्यों और प्रशासनिक फैसलों को गति मिलने की उम्मीद है। वहीं, राजनीतिक नजरिए से भी यह चुनाव भाजपा के भीतर शक्ति संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब यह देखना भी अहम होगा कि दोनों नए पदाधिकारी नगर निगम के कामकाज में किस तरह की भूमिका निभाते हैं और पार्टी के भीतर अलग-अलग राजनीतिक खेमों के बीच बना संतुलन आगे किस रूप में दिखाई देता है।
Akhil Mahajan