रोज फल खाने से डायबिटीज?साबुत फल बेहतर या जूस? जानें डायटीशियन की राय

रोज फल खाने से आमतौर पर डायबिटीज नहीं होती। जानें साबुत फल, जूस और ड्राई फ्रूट्स में क्या अंतर है और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

रोज फल खाने से डायबिटीज?साबुत फल बेहतर या जूस? जानें डायटीशियन की राय

रोज फल खाना आम तौर पर डायबिटीज का कारण नहीं माना जाता
साबुत फल जूस से बेहतर, जबकि ड्राई फ्रूट्स और ज्यादा मात्रा में फल खाने में सावधानी जरूरी
डायबिटीज का खतरा किसी एक फल से नहीं, पूरी डाइट और जीवनशैली से भी जुड़ा होता है

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को अपना खान-पान ठीक रखने की सलाह देते हैं। डाइट में ऐसी चीजों की मात्रा अधिक से अधिक रखना जरूरी है, जिससे जरूरी पोषक तत्वों की आसानी से पूर्ति हो सके। इसके लिए रंग-बिरंगी सब्जियां, नट्स और सीड्स के साथ मौसमी फल खाना आपके लिए काफी लाभकारी हो सकता है।

फलों में प्राकृतिक शुगर के साथ फाइबर, विटामिन, मिनरल और कई दूसरे पोषक तत्व होते हैं। अमरूद और कीवी जैसे फलों को डायबिटीज से लेकर इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने तक में फायदेमंद पाया गया है। इसके बावजूद फलों को लेकर अक्सर लोगों के मन में एक बड़ा सवाल रहता है कि कहीं इन्हें खाने से शुगर बढ़ने का खतरा तो नहीं है।

आमतौर पर ज्यादातर फलों का स्वाद मीठा होता है। यही वजह है कि लोगों में फलों को लेकर डायबिटीज के खतरे का डर बना रहता है। हालांकि, फल सिर्फ अपनी मिठास के लिए नहीं जाने जाते, बल्कि इनमें कई जरूरी पोषक तत्व भी होते हैं। ऐसे में फल खाने और डायबिटीज के बीच संबंध को समझना जरूरी है।

फलों में होती है प्राकृतिक मिठास, लेकिन पूरा फल सिर्फ शुगर नहीं

आहार विशेषज्ञ पारुल चौहान कहती हैं कि फलों में फ्रुक्टोज समेत प्राकृतिक शुगर होती है, लेकिन पूरा फल सिर्फ शुगर नहीं होता। इसमें फाइबर, पानी और दूसरे पोषक तत्व भी होते हैं।

फाइबर पाचन को धीमा करता है और इससे पूरे फल का ग्लूकोज प्रभाव आम तौर पर नुकसानदायक नहीं होता है। इसी वजह से केवल उसमें मौजूद शुगर को देखकर फल को डायबिटीज बढ़ाने वाला मानना सही नहीं है।

यहां ऐडेड शुगर और प्राकृतिक शुगर के बीच अंतर समझना भी जरूरी है। दोनों अलग चीज हैं। प्राकृतिक शुगर को सेहत के लिए हानिकारक नहीं माना जाता है।

यानी सिर्फ इस वजह से कि किसी फल का स्वाद मीठा है, उसे डायबिटीज के डर से पूरी तरह डाइट से बाहर करना सही नहीं माना जाता। फल में मौजूद फाइबर और दूसरे पोषक तत्व भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

फल को जूस बनाकर पीने से कम हो सकता है पोषण

डायटीशियन के मुताबिक, फल खाने से आमतौर पर शुगर बढ़ने का खतरा नहीं होता है। असली गलती फल को जूस बनाकर पीने से हो सकती है। जूस बनाने पर फल का फाइबर कम हो जाता है। जूस में फलों का गूदा निकल जाता है, जिसमें फाइबर की अधिकतर मात्रा पाई जाती है।

इसी वजह से साबुत फल खाना जूस पीने से बेहतर विकल्प माना जाता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन भी पूरे साबुत फल को जूस के मुकाबले प्राथमिकता देने की सलाह देता है।

फल को उसके पूरे रूप में खाने से फाइबर समेत उसके दूसरे पोषक तत्व मिलते हैं। वहीं जूस बनाते समय फल की संरचना बदल जाती है और फाइबर की मात्रा कम हो जाती है। इसलिए रोजाना फल खाने वालों के लिए यह अंतर समझना जरूरी है।

पैकेज्ड फ्रूट ड्रिंक से क्यों रहना चाहिए सावधान?

पैकेज्ड फ्रूट ड्रिंक को लेकर और ज्यादा सावधानी जरूरी है। इनमें ऐडेड शुगर की मात्रा अधिक हो सकती है, जिससे शुगर लेवल बढ़ने का जोखिम हो सकता है।

इसलिए फल खाने और फल से तैयार मीठे पेय लेने को एक जैसा नहीं माना जा सकता। साबुत फल और जूस या पैकेज्ड फ्रूट ड्रिंक के बीच पोषण और शुगर के लिहाज से अंतर होता है।

ड्राई फ्रूट्स में मात्रा का रखें खास ध्यान

आहार विशेषज्ञों के अनुसार मौसमी फल सेहत के लिए ज्यादा अच्छे होते हैं। इसकी जगह किशमिश, खजूर और सूखे अंजीर जैसे ड्राई फ्रूट खाना शुगर लेवल को तेजी से बढ़ाने वाला हो सकता है।

फलों को सुखाकर खाने से उसकी संरचना और शुगर की मात्रा पर प्रभाव पड़ता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ डायबिटीज में ड्राई फ्रूट्स का चयन सावधानी से करने की सलाह देते हैं।

इसका मतलब यह नहीं है कि हर तरह के फल या ड्राई फ्रूट को पूरी तरह बंद कर देना चाहिए। बल्कि इनकी मात्रा और डाइट में इनके इस्तेमाल पर ध्यान देना जरूरी है।

डायबिटीज में फल खाएं या नहीं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर डायबिटीज का डर है तो फल बंद करना समाधान नहीं है। हमेशा साबुत फल खाएं और ऐसे फलों का चयन करें जिनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। जूस और मीठे शेक से बचें। किशमिश-अंजीर जैसे सूखे फल की मात्रा भी कम रखें।

फलों के साथ ही वजन, व्यायाम और पूरी डाइट पर ध्यान देना भी बहुत जरूरी है। केवल किसी एक खाद्य पदार्थ को डायबिटीज के खतरे के लिए जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।

डायबिटीज का खतरा किसी एक फल से तय नहीं होता। इंसुलिन रेजिस्टेंस, वजन बढ़ना, उम्र, फैमिली हिस्ट्री और शारीरिक गतिविधियां भी आपके शुगर लेवल को प्रभावित करने वाली हो सकती हैं। इस पर भी गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए।

आम, केला और अंगूर को पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं

फलों को लेकर सबसे बड़ी चिंता अक्सर उनके मीठे स्वाद को लेकर होती है। लेकिन आम, केला या अंगूर को पूरी तरह बंद करने के बजाय मात्रा, कुल डाइट और जीवनशैली पर ध्यान देना जरूरी है।

रोज फल खाना आम तौर पर डायबिटीज का कारण नहीं माना जाता। साबुत फल जूस से बेहतर विकल्प है, जबकि सूखे फल और बहुत ज्यादा मात्रा में फल खाने पर सावधानी जरूरी है।

इसलिए फल खाने को लेकर अनावश्यक डर रखने के बजाय यह समझना जरूरी है कि किस रूप में और कितनी मात्रा में फल खाया जा रहा है। साबुत फल, संतुलित डाइट और स्वस्थ जीवनशैली पर ध्यान देना ज्यादा महत्वपूर्ण है।