सोने-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट, जानें
31 अगस्त को सोने और चांदी के दाम गिरे। चांदी ₹8,437 घटकर ₹2.35 लाख और सोना ₹4,453 गिरकर ₹1.55 लाख हुआ, 7 महीने में बड़ा बदलाव
➤ चांदी ₹8,437 गिरकर ₹2.35 लाख प्रति किलो पर आई
➤ 7 महीने में चांदी ₹1.51 लाख और सोना ₹21 हजार सस्ता
➤ सोने में आज ₹4,453 की गिरावट, 10 ग्राम 24 कैरेट ₹1.55 लाख
सोने-चांदी के दाम में आज यानी 31 अगस्त को गिरावट देखने को मिली है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम ₹4,453 गिरकर ₹1.55 लाख हो गया है। वहीं, एक किलो चांदी की कीमत ₹8,437 गिरकर ₹2.35 लाख पर आ गई है।
चांदी की कीमत में पिछले कुछ महीनों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। आंकड़ों के मुताबिक, 7 महीने में चांदी के दाम ₹1.51 लाख नीचे आ चुके हैं। सोने और चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव के बीच आज दोनों कीमती धातुओं के दाम में गिरावट दर्ज की गई।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत में तेजी के कारण सोने और चांदी में गिरावट आई है। अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट में ईरान के एक द्वीप पर हमला किया है। इसके बाद ईरान ने भी जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया।
ऑलटाइम हाई से चांदी ₹1.51 लाख नीचे
इस साल सोने और चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 31 दिसंबर 2025 को सोने के दाम ₹1.33 लाख थे। इसके बाद 29 जनवरी को सोने की कीमत बढ़कर ₹1.76 लाख के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गई थी। अब उस स्तर से सोना ₹21 हजार सस्ता हो चुका है।
इसी तरह, 31 दिसंबर 2025 को चांदी की कीमत ₹2.30 लाख थी। इसके बाद 29 जनवरी को चांदी का भाव बढ़कर ₹3.86 लाख के ऑलटाइम हाई पर पहुंच गया था। अब उस ऑलटाइम हाई से चांदी की कीमत ₹1.51 लाख नीचे आ चुकी है।
सोने-चांदी के भाव में यह उतार-चढ़ाव निवेशकों के साथ-साथ उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो गहने खरीदने की योजना बना रहे हैं।
अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग होने की 4 वजहें
सोने की कीमत हर शहर में एक जैसी नहीं होती। इसके पीछे कई स्थानीय और कारोबारी कारण होते हैं। इनमें प्रमुख रूप से ट्रांसपोर्टेशन, सिक्योरिटी, स्थानीय मांग-सप्लाई और ज्वेलर्स का पुराना स्टॉक शामिल है।
ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी का असर
एक शहर से दूसरे शहर सोना ले जाने में ईंधन और सुरक्षा खर्च जुड़ता है। दूरी बढ़ने के साथ यह खर्च भी बढ़ सकता है, जिसका असर सोने की कीमत पर पड़ता है।
खरीदारी की मात्रा भी तय करती है कीमत
दक्षिण भारत में सोने की ज्यादा खपत करीब 40% है। वहां ज्वेलर्स बड़ी मात्रा में खरीदारी करते हैं, लेकिन इसके बावजूद छूट का फायदा सीमित रहता है।
लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन की भूमिका
राज्य और शहर के ज्वेलरी एसोसिएशन स्थानीय मांग और सप्लाई को देखते हुए रेट तय करते हैं। इसी वजह से अलग-अलग शहरों में सोने की कीमत में अंतर देखने को मिल सकता है।
पुराना स्टॉक और खरीद मूल्य
ज्वेलर्स के पास मौजूद पुराने स्टॉक का खरीदी रेट भी इस बात को प्रभावित करता है कि वे ग्राहकों को सोना कितनी कीमत पर बेचेंगे।
ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 3 बातों का रखें ध्यान
सोने की कीमत में बदलाव के साथ खरीदारी करते समय उसकी शुद्धता, कीमत और मेकिंग चार्ज पर ध्यान देना जरूरी है। ग्राहक इन तीन बातों को जरूर जांचें।
सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें
हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। हॉलमार्क नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह का हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से यह पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है।
कीमत क्रॉस चेक करें
सोना खरीदने से पहले उसका सही वजन और खरीदारी वाले दिन की कीमत कई सोर्सेज से क्रॉस चेक करें। इनमें इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट भी शामिल है। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है।
मेकिंग चार्ज पर जरूर करें बातचीत
मेकिंग चार्ज वह शुल्क है, जो ज्वेलर्स सोने को गहने में तैयार करने के लिए लेते हैं। यह शुल्क फिक्स नहीं होता और ग्राहक इस पर मोलभाव कर सकते हैं। बड़ी खरीदारी होने पर ज्वेलर्स अक्सर इसे कम करने के लिए तैयार हो जाते हैं।
ग्राहक सीधे ज्वेलर्स से लेबर कॉस्ट का ब्रेकअप मांग सकते हैं। इससे मेकिंग चार्ज को समझने और बेहतर डील हासिल करने में मदद मिल सकती है।
Akhil Mahajan