दही या योगर्ट? सेहत के लिए क्या है ज्यादा फायदेमंद?

दही और योगर्ट में क्या अंतर है, गट हेल्थ, पाचन और वजन मैनेजमेंट के लिए कौन बेहतर विकल्प है, जानें दोनों के फायदे और सही चुनाव

दही या योगर्ट? सेहत के लिए क्या है ज्यादा फायदेमंद?

दही और योगर्ट दोनों फर्मेंटेड डेयरी फूड्स हैं

गट हेल्थ और पाचन में दोनों के हो सकते हैं फायदे

वजन मैनेजमेंट में प्लेन और कम चीनी वाला विकल्प बेहतर

आजकल लोग अपनी डाइट और सेहत को लेकर पहले से ज्यादा सजग हो गए हैं। वजन कम करने से लेकर पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने तक, लोग ऐसे खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट में शामिल करना चाहते हैं, जो स्वाद के साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद हों। दही और योगर्ट भी ऐसे ही फर्मेंटेड डेयरी फूड्स हैं, जिन्हें हेल्दी डाइट का हिस्सा माना जाता है।

हालांकि, बहुत से लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि दही और योगर्ट में आखिर क्या अंतर है और सेहत के लिहाज से दोनों में से कौन सा विकल्प ज्यादा बेहतर है। दोनों में प्रोटीन, कैल्शियम और फर्मेंटेशन से जुड़े फायदे हो सकते हैं, लेकिन इन्हें बनाने की प्रक्रिया, बैक्टीरियल कल्चर और पोषण संरचना में अंतर हो सकता है।

ऐसे में दोनों के बीच अंतर समझना जरूरी है, ताकि अपनी जरूरत के अनुसार सही विकल्प चुना जा सके।

दही और योगर्ट में क्या अंतर है?

दही आमतौर पर दूध में थोड़ी मात्रा में पुराने दही की जामन डालकर जमाया जाता है। इसमें मौजूद तत्व दूध को फर्मेंट करने का काम करते हैं। वहीं, योगर्ट आमतौर पर निर्धारित बैक्टीरियल कल्चर और नियंत्रित तापमान की मदद से तैयार किया जाता है।

इसी वजह से दही और योगर्ट के स्वाद, टेक्सचर और बैक्टीरिया की प्रोफाइल में अंतर हो सकता है। हालांकि, हर दही या योगर्ट में मौजूद प्रोबायोटिक्स की मात्रा और प्रकार एक जैसे नहीं होते।

इसलिए सिर्फ दही या योगर्ट होने के आधार पर यह तय करना सही नहीं है कि कौन सा विकल्प हर व्यक्ति के लिए ज्यादा फायदेमंद होगा।

गट हेल्थ के लिए दही या योगर्ट?

दही और योगर्ट दोनों ही फर्मेंटेड फूड्स हैं और इनमें मौजूद कुछ तत्व आंतों यानी गट के स्वास्थ्य में योगदान दे सकते हैं। हालांकि, इनके प्रोबायोटिक फायदे इस बात पर निर्भर करते हैं कि संबंधित उत्पाद में कौन से विशिष्ट बैक्टीरिया मौजूद हैं और उनकी मात्रा कितनी है।

अगर कोई व्यक्ति गट हेल्थ के लिए योगर्ट खरीद रहा है, तो पैकेट पर “live and active cultures” जैसी जानकारी देखना उपयोगी हो सकता है। इससे उत्पाद में मौजूद सक्रिय बैक्टीरियल कल्चर के बारे में जानकारी मिल सकती है।

हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि सभी योगर्ट या दही में प्रोबायोटिक्स की मात्रा और प्रकार समान नहीं होते।

पाचन के लिए दही या योगर्ट?

फर्मेंटेशन की प्रक्रिया के कारण दही और योगर्ट में मौजूद लैक्टोज की मात्रा दूध की तुलना में कम हो सकती है। इसी वजह से कुछ लोगों को ये दूध की तुलना में आसानी से पच सकते हैं।

लेकिन हर व्यक्ति की सहनशीलता अलग हो सकती है। जिन लोगों को लैक्टोज इनटॉलरेंस या डेयरी से परेशानी होती है, उनके लिए दही या योगर्ट का अनुभव अलग-अलग हो सकता है।

इसलिए केवल पाचन को ध्यान में रखकर किसी एक विकल्प को सभी लोगों के लिए बेहतर बताना सही नहीं होगा।

वजन कम करने वालों के लिए कौन बेहतर?

वजन मैनेजमेंट के दौरान सिर्फ यह देखकर दही या योगर्ट का चुनाव करना सही नहीं है कि वह दही है या योगर्ट। इस स्थिति में कैलोरी, प्रोटीन और अतिरिक्त चीनी जैसे पहलुओं पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।

सादा दही या बिना अतिरिक्त चीनी वाला प्लेन योगर्ट बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं, फ्लेवर्ड योगर्ट में अतिरिक्त चीनी और कैलोरी अधिक हो सकती है। इसलिए वजन मैनेजमेंट के दौरान उत्पाद का लेबल पढ़कर चुनाव करना उपयोगी रहता है।

दही या योगर्ट—किसे चुनें?

अगर घर का ताजा और सादा दही उपलब्ध है तो इसे हेल्दी डाइट में शामिल किया जा सकता है। दूसरी ओर, अगर बाजार से योगर्ट खरीद रहे हैं तो प्लेन, कम चीनी वाला और पर्याप्त प्रोटीन वाला विकल्प चुनना बेहतर रहेगा।

यानी सेहत के लिहाज से दही या योगर्ट में से किसी एक को हर व्यक्ति के लिए सबसे बेहतर कहना सही नहीं होगा। दोनों के अपने फायदे हो सकते हैं और चुनाव व्यक्ति की डाइट, जरूरत और सहनशीलता पर निर्भर कर सकता है।

अगर किसी व्यक्ति को किसी खास स्वास्थ्य समस्या, लैक्टोज इनटॉलरेंस या डेयरी एलर्जी की शिकायत है, तो डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह लेना बेहतर है।