फैटी लिवर में ब्लैक कॉफी,डॉक्टर ने बताया कितना हो सकता है फायदा

फैटी लिवर में ब्लैक कॉफी कितनी फायदेमंद हो सकती है? गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट की सलाह, कॉफी के संभावित फायदे और लिवर हेल्थ के लिए जरूरी डाइट जानें।

फैटी लिवर में ब्लैक कॉफी,डॉक्टर ने बताया कितना हो सकता है फायदा

फैटी लिवर में ब्लैक कॉफी को लेकर विशेषज्ञों ने बताया बड़ा फायदा
➤ रोजाना सीमित मात्रा में कॉफी से लिवर डिजीज और फाइब्रोसिस के जोखिम में मदद मिल सकती है
➤ डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव के साथ सब्जियां, फल, साबुत अनाज और नट्स भी जरूरी

आजकल खराब खानपान, बढ़ते वजन और बिगड़ी लाइफस्टाइल के कारण फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। कई लोगों में इसकी शुरुआत बिना किसी स्पष्ट लक्षण के होती है। जांच के दौरान लिवर एंजाइम बढ़ने या लिवर में अतिरिक्त फैट जमा होने के बाद इसका पता चलता है।

लिवर शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में शामिल है। यह भोजन से मिलने वाले पोषक तत्वों को प्रोसेस करने के साथ कई जरूरी प्रोटीन बनाने, दवाओं और अन्य पदार्थों के मेटाबॉलिज्म तथा पाचन से जुड़े कामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

ऐसे में लिवर को स्वस्थ रखने के लिए खानपान और लाइफस्टाइल पर ध्यान देना जरूरी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, कुछ लोगों के लिए सीमित मात्रा में ब्लैक कॉफी भी लिवर हेल्थ के लिहाज से फायदेमंद हो सकती है।

फैटी लिवर की समस्या क्यों बढ़ रही

फैटी लिवर को अब मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) कहा जाता है। इसमें लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है।

मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, इंसुलिन रेजिस्टेंस और खून में लिपिड का असामान्य स्तर इस समस्या के खतरे को बढ़ा सकते हैं।

अगर समय रहते समस्या की पहचान और प्रबंधन नहीं किया जाए तो कुछ लोगों में लिवर में सूजन और फाइब्रोसिस जैसी जटिलताएं भी हो सकती हैं।

ब्लैक कॉफी को लेकर क्या कहती हैं विशेषज्ञ

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. रश्मि निरंजन के अनुसार, कई अध्ययनों में कॉफी के सेवन को क्रॉनिक लिवर डिजीज, लिवर फाइब्रोसिस और सिरोसिस के कम जोखिम से जोड़ा गया है।

कॉफी को फैटी लिवर के लिए एक संभावित लाभकारी पेय माना जा सकता है, लेकिन इसे किसी बीमारी का इलाज या दवा नहीं समझना चाहिए।

स्रोत में विशेषज्ञ ने दिन में 2 से 3 कप ब्लैक कॉफी को फायदेमंद बताया है। हालांकि हर व्यक्ति के लिए कैफीन की मात्रा समान रूप से उपयुक्त नहीं होती। इसलिए किसी बीमारी, गर्भावस्था, नींद की समस्या या कैफीन से संवेदनशीलता होने पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

कॉफी में कैफीन के अलावा पॉलीफेनॉल और कई अन्य बायोएक्टिव कंपाउंड पाए जाते हैं। इनमें से कुछ में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रभाव होने की बात कही जाती है।

कॉफी लिवर के लिए कैसे मददगार हो सकती है

उपलब्ध अध्ययनों में सीमित मात्रा में कॉफी का सेवन क्रॉनिक लिवर डिजीज, फैटी लिवर और फाइब्रोसिस के जोखिम को कम करने से जुड़ा पाया गया है।

कुछ शोधों में कॉफी सेवन और लिवर एंजाइमों में सुधार के बीच भी संबंध देखा गया है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि केवल कॉफी पीने से फैटी लिवर ठीक हो जाएगा।

फैटी लिवर को नियंत्रित करने के लिए वजन प्रबंधन, नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित आहार भी महत्वपूर्ण हैं।

लिवर को स्वस्थ रखने के लिए क्या खाएं

विशेषज्ञ लिवर हेल्थ के लिए डाइट में पौष्टिक और फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करने की सलाह देते हैं।

आहार में हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें, नट्स और सीड्स शामिल किए जा सकते हैं। ये शरीर को जरूरी पोषक तत्व और फाइबर प्रदान करते हैं।

मछली और अखरोट जैसे ओमेगा-3 फैटी एसिड वाले खाद्य पदार्थ भी हृदय और मेटाबॉलिक हेल्थ के लिए फायदेमंद माने जाते हैं।

ऑलिव ऑयल और स्वस्थ वसा के स्रोतों को भी संतुलित मात्रा में डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है।

सिर्फ ब्लैक कॉफी पर निर्भर रहना ठीक नहीं

फैटी लिवर की समस्या में केवल किसी एक खाद्य पदार्थ या पेय को इलाज मानना सही नहीं है। ब्लैक कॉफी को संभावित रूप से फायदेमंद माना गया है, लेकिन यह डॉक्टर की सलाह, दवाओं, वजन नियंत्रण और लाइफस्टाइल में सुधार का विकल्प नहीं है।

अगर किसी व्यक्ति की जांच में लिवर में फैट, लिवर एंजाइम बढ़े हुए या कोई अन्य असामान्यता सामने आई है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार आगे की जांच और उपचार कराना जरूरी है।