लेडी टीचर मनीषा की डेथ मिस्ट्री : किताबें-कपड़े आज भी संभालकर रखे हैं, बेटी की मौत का सच जानने एक साल से लड़ रहा परिवार
भिवानी की लेडी टीचर मनीषा की मौत के एक साल बाद भी रहस्य बरकरार है। CBI जांच में 35 से ज्यादा लोगों से पूछताछ और CCTV की जांच हुई।
➤ मनीषा की मौत के एक साल बाद भी हत्या या आत्महत्या का रहस्य बरकरार
➤ CBI 35 से ज्यादा लोगों से पूछताछ और CCTV फुटेज की जांच कर चुकी
➤ 14 अगस्त को कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट, पंचकूला में चार्जशीट दाखिल होने की उम्मीद
हरियाणा के भिवानी के गांव ढाणी लक्ष्मण की 19 वर्षीय लेडी टीचर मनीषा की मौत को एक साल पूरा हो गया, लेकिन आज भी परिवार उस सवाल के जवाब का इंतजार कर रहा है कि आखिर उसकी मौत कैसे हुई। मनीषा नर्सिंग ऑफिसर बनने का सपना देख रही थी और प्ले-वे स्कूल में पढ़ाती थी। वह 11 अगस्त 2025 को लापता हुई थी और दो दिन बाद उसका शव गांव सिंघानी के खेतों में मिला था। पुलिस ने शुरुआत में मर्डर केस दर्ज किया, लेकिन 18 अगस्त को मामले को आत्महत्या बताया गया। इसके बाद विरोध बढ़ा तो तीसरी बार दिल्ली एम्स में पोस्टमॉर्टम कराया गया और जांच CBI को सौंप दी गई। अब परिवार को उम्मीद है कि CBI की जांच से मनीषा की मौत की असली वजह सामने आएगी और मामले में चार्जशीट दाखिल होगी।
मनीषा की पहली बरसी पर गुरुवार सुबह गांव के एक मंदिर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इसमें कई किसान नेता, पंचायत सदस्य, खाप के सदस्य, गांव के लोग और मनीषा के परिजन शामिल हुए। एक साल बीत जाने के बाद भी परिवार की पीड़ा कम नहीं हुई है। बेटी को याद करते हुए पिता संजय भावुक हो जाते हैं। उनके लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनकी बेटी के साथ आखिर क्या हुआ था।
पिता संजय कहते हैं, “न्यूं नहीं बेरा म्हारी छोरी के साथ क्या हुआ था, क्यूकर मरी।” बेटी की मौत की वजह जानने के लिए परिवार पिछले एक साल से लगातार संघर्ष कर रहा है। पंचायतों से लेकर पैदल मार्च और अनशन तक किए गए। परिवार CBI अधिकारियों से मिलने दिल्ली तक गया, लेकिन अब तक उस जवाब का इंतजार है, जिसके लिए यह लड़ाई शुरू की गई थी।
CBI जांच के बाद परिवार को रिपोर्ट का इंतजार
मनीषा की मौत की जांच CBI को सौंपे जाने के बाद जांच एजेंसी की टीमें अब तक चार-पांच बार गांव आ चुकी हैं। CBI ने मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ की और घटनाक्रम से जुड़े अलग-अलग पहलुओं की जांच की। बताया जा रहा है कि अब तक 35 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। इनमें मनीषा के परिवार के लोग भी शामिल हैं।
जांच के दायरे में वे दो लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने सबसे पहले मनीषा का शव देखा था। इसके अलावा उस CCTV फुटेज की भी जांच की गई, जिसमें मनीषा प्ले-वे स्कूल से नर्सिंग कॉलेज की तरफ जाती हुई दिखाई दी थी। स्कूल और कॉलेज की CCTV फुटेज भी जांच का हिस्सा बनी हैं।
मामले की जांच के दौरान CBI ने घटनाक्रम से जुड़े विभिन्न पहलुओं को खंगाला है। परिवार अब इस जांच से मिलने वाले निष्कर्ष का इंतजार कर रहा है। पिता संजय का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि आगे किस दिशा में जाना है।
पिता बोले- रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हुए तो जज के सामने जाएंगे
मनीषा के पिता संजय ने कहा कि परिवार लंबे समय से संघर्ष कर रहा था और CBI पर भी जनता का दबाव था। उनके मुताबिक, अब CBI ने कुछ चीजें निकाली हैं और वे रिपोर्ट के बारे में जानकारी लेने जाएंगे। इसके बाद रिपोर्ट को गांव की कमेटी के सामने भी रखा जाएगा।
संजय ने साफ कहा कि उन्हें रिपोर्ट से उम्मीदें हैं, लेकिन अगर उसमें कोई कमी रही तो परिवार आगे का रास्ता तय करेगा। उन्होंने कहा कि यह उनकी बेटी के न्याय की बात है। अगर परिवार CBI की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हुआ तो जज साहब के सामने अर्जी लगाकर यह बताया जाएगा कि वे रिपोर्ट को स्वीकार नहीं करते।
परिवार का कहना है कि एक साल से वे जिस जवाब की तलाश में हैं, अब CBI की रिपोर्ट से उन्हें उस दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि रिपोर्ट सामने आने के बाद ही जांच में सामने आए निष्कर्ष स्पष्ट होंगे।
बेटी की किताबें और कपड़े आज भी संभालकर रखे
मनीषा के घर में आज भी उसकी यादें उसी तरह मौजूद हैं। परिवार ने उसकी किताबें और कपड़े सुरक्षित रखे हैं। घर के एक कोने में वह छोटा सा पूजा स्थल भी है, जहां मनीषा पूजा करती थी। परिवार ने उसे भी उसी तरह संभालकर रखा है और आज भी वहां पूजा होती है।
बेटी का जिक्र आते ही पिता संजय भावुक हो जाते हैं। वह बताते हैं कि मनीषा पढ़ाई करती थी और अपने छोटे भाई-बहनों को भी पढ़ाती थी। खेत में काम के दौरान भी वह उनके साथ हाथ बंटाती थी। संजय कहते हैं कि खेत में जाने पर उन्हें बेटी की याद आती है कि किस तरह मनीषा उनके साथ काम में मदद करती थी।
मनीषा के जाने के बाद परिवार ने उसके सामान को सिर्फ चीजों के रूप में नहीं, बल्कि उसकी यादों के रूप में संभालकर रखा है। घर के उस कोने में आज भी उसकी मौजूदगी का एहसास परिवार को होता है, जहां वह रोज पूजा करती थी।
पैदल मार्च और अनशन से लेकर दिल्ली तक संघर्ष
बेटी की मौत की वजह जानने और न्याय की मांग को लेकर संजय ने पिछले एक साल में कई स्तरों पर संघर्ष किया। उन्होंने पंचायतों से लेकर पैदल मार्च और अनशन तक किए। इसके बाद CBI अधिकारियों से मिलने के लिए दिल्ली तक का दरवाजा खटखटाया।
संजय का कहना है कि बेटी को न्याय दिलाना अब उनकी जिंदगी का मकसद बन गया है। वह कहते हैं कि जब तक बेटी को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। उनके अनुसार, अगर न्याय नहीं मिला तो पूरी जिंदगी इसका मलाल रहेगा।
परिवार के लिए यह लड़ाई सिर्फ एक मामले की जांच तक सीमित नहीं है। एक साल से वे उस सवाल का जवाब चाहते हैं कि मनीषा की मौत किन परिस्थितियों में हुई और उसके साथ वास्तव में क्या हुआ था।
14 अगस्त को CBI की स्टेटस रिपोर्ट पर नजर
परिवार के मुताबिक CBI की ओर से 14 अगस्त को कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट सौंपे जाने की बात कही गई है। CBI ने दिल्ली में मर्डर की FIR दर्ज कराई थी। अब पंचकूला में CBI की विशेष कोर्ट में चार्जशीट दाखिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।
मनीषा के परिवार की नजर अब इसी रिपोर्ट पर टिकी है। परिवार का कहना है कि रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जांच किस दिशा में पहुंची है और आगे क्या कार्रवाई होगी।
मनीषा की मौत के मामले में CBI की जांच के दौरान 35 से ज्यादा लोगों से पूछताछ, CCTV फुटेज की जांच और घटनाक्रम से जुड़े लोगों से जानकारी जुटाने की बात सामने आई है। इसके बावजूद परिवार के लिए सबसे अहम सवाल अभी भी वही है कि मनीषा की मौत हत्या थी या आत्महत्या।
एक साल पहले जिस घटना ने ढाणी लक्ष्मण गांव को झकझोर दिया था, उसकी पहली बरसी पर परिवार ने मनीषा की याद में श्रद्धांजलि दी। अब उनकी उम्मीद CBI की स्टेटस रिपोर्ट और प्रस्तावित चार्जशीट पर टिकी है। परिवार का कहना है कि रिपोर्ट में अगर उन्हें न्याय की दिशा दिखाई देती है तो संघर्ष आगे बढ़ेगा, लेकिन संतुष्टि नहीं हुई तो कानूनी रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे।
Akhil Mahajan