हर्ष और बीरबल ने ही मारी थी बीरू वाल्मीकि को गोली, लाइव वीडियो और फोटो में क्या दिखा, जरूर देखें

करनाल के बीरू वाल्मीकि हत्याकांड में पुलिस ने हर्ष-बीरबल को मुख्य शूटर बताया। एनकाउंटर के बाद लाइव वीडियो, फोटो और जांच को लेकर विवाद बढ़ा।

हर्ष और बीरबल ने ही मारी थी बीरू वाल्मीकि को गोली, लाइव वीडियो और फोटो में क्या दिखा, जरूर देखें

पुलिस के मुताबिक हर्ष और बीरबल ही बीरू वाल्मीकि हत्याकांड के मुख्य शूटर थे
हत्या के करीब 27 घंटे बाद दोनों का एनकाउंटर, अब परिवार और रोड समाज ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
लाइव वीडियो और फोटो को लेकर भी चर्चा, कुरुक्षेत्र महापंचायत में CBI जांच की मांग


हरियाणा के करनाल में बीरू वाल्मीकि हत्याकांड के बाद पूरा मामला एक के बाद एक घटनाओं से उलझता जा रहा है। पुलिस के अनुसार हर्ष और बीरबल ने ही बीरू वाल्मीकि को गोली मारी थी और दोनों इस हत्याकांड के मुख्य शूटर थे। 5 अगस्त की रात हांसी रोड पर बीरू की गोली मारकर हत्या की गई थी। इसके करीब 27 घंटे बाद पुलिस मुठभेड़ में हर्ष और बीरबल की मौत हो गई। पुलिस का कहना है कि दोनों को पकड़ने की कोशिश के दौरान उन्होंने पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके जवाब में हुई कार्रवाई में दोनों घायल हुए और बाद में उनकी मौत हो गई। अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर लाइव वीडियो और फोटो भी चर्चा में हैं। वहीं, एनकाउंटर के बाद हर्ष के परिवार और रोड समाज ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मामले की स्वतंत्र जांच की मांग शुरू कर दी है।

बीरू वाल्मीकि की हत्या के बाद परिजनों और समाज के लोगों में भारी आक्रोश था। 6 अगस्त को बीरू की पत्नी परिजनों के साथ सड़क पर बैठ गई थी और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर विरोध किया गया था। इसी दिन पुलिस ने हर्ष और बीरबल के साथ मुठभेड़ की कार्रवाई की। पुलिस के मुताबिक, दोनों बीरू हत्याकांड में शामिल थे और उन्हें पकड़ने के लिए पुलिस की टीमें लगातार कार्रवाई कर रही थीं।

बीरू को गोली मारने का आरोप हर्ष-बीरबल पर

पुलिस के अनुसार 5 अगस्त की रात करीब 9 बजे बीरू वाल्मीकि अपनी बहन के घर जा रहा था। हांसी रोड पर पहुंचने के बाद बाइक सवार बदमाशों ने उसे घेरा और सिर में गोली मार दी। बीरू की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद मामले में आरोपियों की तलाश शुरू हुई।

पुलिस जांच में हर्ष और बीरबल के नाम सामने आए। पुलिस ने दोनों को इस हत्याकांड के मुख्य शूटर बताया। इसके बाद उनकी तलाश के लिए पुलिस की टीमों ने दबिश दी और आखिरकार 6 अगस्त की रात दोनों के साथ पुलिस की मुठभेड़ हुई।

यही वह घटनाक्रम है, जिसके बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। एक तरफ पुलिस का दावा है कि दोनों बीरू की हत्या में शामिल थे, जबकि दूसरी तरफ हर्ष के परिवार का कहना है कि उसे गलत तरीके से एनकाउंटर में मारा गया।

लाइव वीडियो और फोटो को लेकर क्या दावा?

बीरू वाल्मीकि हत्याकांड से जुड़े लाइव वीडियो और फोटो को लेकर भी चर्चा तेज है। सामने आए दावों में कहा जा रहा है कि वीडियो में हर्ष की भूमिका को लेकर अहम बातें दिखाई देती हैं। वहीं कुछ तस्वीरों और वीडियो फुटेज को भी मामले से जोड़कर देखा जा रहा है।

हालांकि, किसी वीडियो या फोटो की वास्तविकता, उसमें दिखाई देने वाले व्यक्ति की पहचान और उसकी भूमिका की आधिकारिक पुष्टि जांच के आधार पर ही हो सकती है। इसलिए वीडियो और फोटो से जुड़े दावों को मामले की जांच के संदर्भ में ही देखना जरूरी है।

मामले का यह पहलू इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि हर्ष का परिवार पुलिस की ओर से दिखाई गई फुटेज पर सवाल उठा रहा है। परिवार का कहना है कि उन्हें जो बाइक की फुटेज दिखाई गई, उसमें हर्ष की पहचान स्पष्ट नहीं हो रही थी।

हर्ष के परिवार का दावा- सुबह काम पर निकला था

कुरुक्षेत्र में हुई रोड समाज की महापंचायत में हर्ष का परिवार भी पहुंचा। परिवार की ओर से कहा गया कि हर्ष सुबह काम पर जाने के लिए घर से निकला था। बाद में परिवार को उसके एनकाउंटर में मारे जाने की सूचना मिली।

हर्ष के चाचा सतबीर डाबर ने बताया कि हर्ष के माता-पिता नहीं हैं। वह अपने छोटे भाई रोहित (21) और अभिषेक (17) का सहारा था। हर्ष दिहाड़ी मजदूरी करता था।

परिवार का कहना है कि हर्ष का गांव में किसी के साथ कोई झगड़ा नहीं था। सतबीर डाबर के मुताबिक, उसकी कोई शिकायत भी घर तक नहीं आई थी और उस पर कोई केस नहीं था। वह गांव में सभी को नमस्ते करता हुआ आता-जाता था।

परिवार का आरोप है कि ऐसे युवक को एनकाउंटर में मारा जाना गलत है और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

ताऊ बोले- सिर्फ बाइक की फुटेज दिखाई

हर्ष के ताऊ बनारसी दास ने बताया कि हर्ष सुबह अपने काम पर गया था। बाद में उन्हें उसके एनकाउंटर में मारे जाने की सूचना मिली। उनका आरोप है कि डेड बॉडी लेने के लिए सिर्फ चार लोगों को अस्पताल बुलाया गया और वहां उन्हें बाइक की फुटेज दिखाई गई।

परिवार के अनुसार, पुलिस ने इसी फुटेज के आधार पर हर्ष के बीरू हत्याकांड में शामिल होने की बात कही, लेकिन परिवार को फुटेज में हर्ष की पहचान स्पष्ट नहीं लगी।

बनारसी दास ने एनकाउंटर को गलत बताते हुए सरकार से न्याय की मांग की है। उनका कहना है कि पूरे मामले की ऐसी जांच होनी चाहिए, जिससे परिवार और समाज के मन में उठ रहे सवालों का जवाब मिल सके।

‘शाम तक रिजल्ट’ वाले बयान पर भी उठा सवाल

एनकाउंटर विवाद में करनाल के BJP विधायक जगमोहन आनंद का 6 अगस्त का बयान भी लगातार चर्चा में है। रोड समाज का आरोप है कि विधायक ने बीरू के परिजनों को शाम तक ‘रिजल्ट’ देने का भरोसा दिया था। समाज का कहना है कि इसके कुछ घंटे बाद ही हर्ष और बीरबल का एनकाउंटर हो गया।

हर्ष के ताऊ बनारसी दास ने इसी क्रम को लेकर सवाल उठाया। उनका आरोप है कि विधायक ने उस दिन बीरू वाल्मीकि के परिवार को कोरे कागज पर लिखकर देने और शाम तक रिजल्ट देने की बात कही थी। इसके बाद अगली सुबह परिवार को हर्ष की मौत की खबर मिली।

परिवार ने सवाल उठाया कि क्या विधायक को पहले से पता था कि एनकाउंटर होने वाला है। हालांकि, यह हर्ष के परिवार की ओर से लगाया गया आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है

रोड समाज की महापंचायत में फूटा गुस्सा

एनकाउंटर को लेकर रोड समाज की ओर से पहले हर्ष के गांव काला माजरा में पंचायत हुई। इसके बाद करनाल की रोड धर्मशाला में बैठक हुई और फिर बुधवार को कुरुक्षेत्र में रोड़ समाज की महापंचायत बुलाई गई। महापंचायत में प्रदेशभर से समाज के लोग पहुंचे और एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच की मांग की गई।

अखिल भारतीय रोड महासभा के प्रधान बलकार पूंडरी ने कहा कि एनकाउंटर से समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने पूरे मामले की जांच CBI, हाईकोर्ट या सेशन कोर्ट के सिटिंग जज से कराने की मांग की, ताकि जांच पर किसी तरह का संदेह न रहे।

महापंचायत में तीन बड़ी मांगें

महापंचायत में समाज की ओर से तीन प्रमुख मांगें रखी गईं। पहली मांग थी कि पूरे मामले की CBI या सिटिंग जज से जांच कराई जाए। दूसरी मांग करनाल SP का ट्रांसफर करने की रखी गई। तीसरी मांग एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने की थी।

पंचायत में पुंडरी से BJP विधायक सतपाला जांबा और हरियाणा विधानसभा के स्पीकर हरविंद्र कल्याण के भाई समर कल्याण भी पहुंचे।

समाज की ओर से कहा गया कि एनकाउंटर की कार्रवाई को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं और इनका जवाब निष्पक्ष जांच से ही मिल सकता है।

विधायक का पुतला फूंका, CM आवास घेरने निकले

महापंचायत के बाद समाज के लोगों ने भाजपा विधायक जगमोहन आनंद का पुतला फूंका। इसके बाद कुछ लोग मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए निकल पड़े। हालांकि, समाज के मौजिज लोगों ने उन्हें रोक लिया और सरकार को फिलहाल मोहलत देने की बात कही।

बैठक में युवाओं ने मुख्यमंत्री आवास के घेराव की मांग की थी, लेकिन वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें समझाकर रोक दिया। बलकार पूंडरी ने कहा कि फिलहाल समाज ने सरकार को एक और मौका देने का फैसला किया है।

समाज के प्रतिनिधियों को गुरुवार को मुख्यमंत्री से मुलाकात का समय मिलने की उम्मीद है। प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री के सामने अपनी मांगें और समाज की भावनाएं रखेगा। इसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।

बीरू की हत्या से एनकाउंटर तक, 27 घंटे में बदली पूरी कहानी

पूरे घटनाक्रम को देखें तो 5 अगस्त की रात करीब 9 बजे बीरू वाल्मीकि की हत्या हुई। इसके बाद आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर परिजन और समाज सड़क पर उतरे। 6 अगस्त को बीरू की पत्नी भी परिजनों के साथ रोड पर बैठ गई। इसके बाद पुलिस ने हर्ष और बीरबल को मुठभेड़ में मार गिराया।

यानी बीरू की हत्या और दोनों आरोपियों के एनकाउंटर के बीच करीब 27 घंटे का अंतर रहा। इसी वजह से अब यह मामला सिर्फ बीरू की हत्या तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हर्ष और बीरबल के एनकाउंटर की परिस्थितियां भी जांच और बहस का विषय बन गई हैं।

पुलिस का दावा और परिवार के सवाल आमने-सामने

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा विरोधाभास पुलिस के दावे और हर्ष के परिवार के आरोपों के बीच है। पुलिस के अनुसार हर्ष और बीरबल बीरू हत्याकांड के मुख्य शूटर थे और पुलिस कार्रवाई के दौरान दोनों की मौत हुई। दूसरी ओर हर्ष का परिवार कह रहा है कि वह सुबह काम पर निकला था और उसे गलत तरीके से एनकाउंटर में मारा गया।

रोड समाज अब इसी वजह से स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है। समाज का कहना है कि जांच ऐसी एजेंसी या न्यायिक अधिकारी से होनी चाहिए, जिस पर किसी पक्ष को संदेह न हो।

बीरू वाल्मीकि की हत्या से जुड़े लाइव वीडियो और फोटो, पुलिस की ओर से सामने रखे गए साक्ष्य, हर्ष-बीरबल की कथित भूमिका और उसके बाद हुए एनकाउंटर की परिस्थितियां अब इस पूरे मामले के अहम हिस्से बन गए हैं। पुलिस का दावा है कि दोनों बीरू के हत्याकांड में शामिल थे, जबकि परिवार और समाज एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच चाहते हैं।

अब नजर मुख्यमंत्री से होने वाली मुलाकात और सरकार के अगले कदम पर है। अगर सरकार समाज की मांगों पर कोई निर्णय लेती है तो विवाद शांत होने की दिशा में जा सकता है। वहीं मांगें पूरी नहीं हुईं तो रोड समाज की ओर से आगे की रणनीति और आंदोलन का फैसला लिया जा सकता है।