हरियाणा में ‘दूध बंद’ आंदोलन खत्म: किसानों ने रोकीं दूध की गाड़ियां, 1000 लीटर दूध गुरुघरों-मंदिरों में भेजा; सरकार को 17 अक्टूबर तक का समय

हरियाणा में दूध बंद आंदोलन फिलहाल खत्म हुआ। सिरसा में किसानों ने सरकार को 17 अक्टूबर तक समय दिया। दूध खरीद रेट और फैट आधारित कीमत बढ़ाने की मांग जारी है।

हरियाणा में ‘दूध बंद’ आंदोलन खत्म: किसानों ने रोकीं दूध की गाड़ियां, 1000 लीटर दूध गुरुघरों-मंदिरों में भेजा; सरकार को 17 अक्टूबर तक का समय

➤ सिरसा वीटा प्लांट पर बैठक के बाद आंदोलन फिलहाल स्थगित, सरकार को 17 अक्टूबर तक का समय
➤ कंगनपुर में 1000 लीटर से ज्यादा दूध इकट्ठा कर ग्रामीणों, गुरुघरों और मंदिरों तक भेजा गया
➤ दूध के खरीद रेट और फैट के अनुसार कीमत बढ़ाने की मांग, 17 अक्टूबर को फिर होगी बैठक


हरियाणा में दूध के खरीद रेट बढ़ाने की मांग को लेकर चल रहा ‘दूध बंद’ आंदोलन शनिवार को फिलहाल खत्म कर दिया गया। सिरसा के वीटा मिल्क प्लांट पर सुबह करीब 11 बजे किसानों और पशुपालकों की बैठक हुई, जिसमें आंदोलन को आगे जारी नहीं रखने और सरकार को 17 अक्टूबर तक का समय देने का फैसला लिया गया। किसान नेताओं का कहना है कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और लोगों ने आंदोलन में सहयोग किया। नेताओं के अनुसार सरकार और प्रशासन की ओर से उनकी मांगों पर अपेक्षित फैसला नहीं होने के कारण अब 17 अक्टूबर तक इंतजार किया जाएगा। यदि इस अवधि में दूध के रेट को फैट के अनुसार बढ़ाने पर फैसला नहीं हुआ तो आगे की रणनीति तय की जाएगी। इसी को लेकर 17 अक्टूबर को सिरसा की जाट धर्मशाला में दोबारा बैठक बुलाई गई है।

आंदोलन के दौरान किसानों और पशुपालकों ने सिरसा स्थित वीटा मिल्क प्लांट के बाहर धरना दिया था। प्रदर्शनकारियों ने दूध की सप्लाई लेकर आने और प्लांट से बाहर जाने वाले वाहनों को गेट पर रोकने का प्रयास किया। आंदोलन का मुख्य मुद्दा दूध के खरीद भाव में बढ़ोतरी और अलग-अलग क्षेत्रों में दूध खरीद की दरों में समानता से जुड़ा रहा। पशुपालकों का कहना है कि पशुओं के चारे, खल, बिनौले और देखभाल की लागत बढ़ रही है, इसलिए दूध का खरीद मूल्य भी लागत के अनुरूप होना चाहिए।

किसान नेताओं जसवीर भाटी, हंसराज, हरप्रीत और सुरजीत ने बताया कि आंदोलन के दौरान किसानों और पशुपालकों को लोगों का सहयोग मिला। उनका कहना है कि फिलहाल आंदोलन को स्थगित किया गया है, लेकिन मांगों को लेकर संघर्ष खत्म नहीं हुआ है। 17 अक्टूबर को होने वाली बैठक में सरकार की ओर से हुई कार्रवाई और बातचीत की स्थिति के आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा।

कंगनपुर में 1000 लीटर से ज्यादा दूध इकट्ठा किया गया

आंदोलन के दौरान शुक्रवार को सिरसा के कंगनपुर रोड पर भी स्थिति काफी चर्चा में रही। कंगनपुर निवासी डेयरी संचालक प्रतीक बिश्नोई के अनुसार, बड़ी संख्या में लोग इलाके में एकत्र हुए। इस दौरान रास्ते से गुजर रहे डेयरी संचालकों और दूधियों से दूध के ड्रम और कैन ले लिए गए। इसके बाद करीब 1000 लीटर से ज्यादा दूध एकत्र हुआ।

एकत्र किए गए दूध का कुछ हिस्सा जरूरतमंद लोगों और ग्रामीणों में बांटा गया। कई बच्चे और युवा अपने डिब्बे लेकर दूध लेने के लिए मौके पर पहुंचे। कुछ लोगों को मौके पर ही दूध पिलाया गया। इसके बाद बचा हुआ दूध कंगनपुर के गुरुघर और मंदिर के अलावा चिल्ला साहिब गुरुद्वारा, सिरसा भेजा गया।

दूध को धार्मिक स्थलों तक पहुंचाने के लिए गुरुघर की गाड़ी भी मौके पर बुलाई गई। दूध से भरे कैन और ड्रम गाड़ी में रखकर चिल्ला साहिब गुरुद्वारा भेजे गए। इस दौरान अलग-अलग स्थानों पर विवाद और हंगामे की स्थिति भी बनी, जिसके बाद पुलिस को मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालनी पड़ी।

चिल्ला साहिब गुरुद्वारा प्रबंधन ने किसानों के साथ सहयोग की बात कही

चिल्ला साहिब गुरुद्वारा के प्रबंधक बाबा जगतार सिंह ने बताया कि गुरुघर में संगत की ओर से काफी मात्रा में दूध दिया जाता है। लोग दूध देकर चले जाते हैं या अपनी गाड़ियों में दूध लेकर गुरुघर तक पहुंचाते हैं। इस दूध का इस्तेमाल लंगर की व्यवस्था में किया जाता है।

उन्होंने बताया कि कोरोना काल और किसान आंदोलन के दौरान भी चिल्ला साहिब गुरुद्वारा की ओर से दूध और लंगर की सेवा भेजी गई थी। उन्होंने किसानों और पशुपालकों के साथ सहयोग की बात कही। उनके अनुसार गुरुघर की गाड़ियां कंगनपुर और रानियां रोड की ओर भी जाती हैं और इस दौरान संगत की ओर से दूध मिलता रहता है।

कंगनपुर गुरुघर में नहीं लगता लंगर

कंगनपुर गुरुघर के प्रधान पुष्पेंदर सिंह ने बताया कि गुरुघर में लंगर नहीं लगता है। गांव से जो दूध एकत्र किया जाता है, उसे चिल्ला साहिब गुरुद्वारा भेज दिया जाता है। उन्होंने बताया कि शुरुआत से ही गुरुघर में संगत की ओर से आने वाले दूध को चिल्ला साहिब गुरुद्वारा भेजने की व्यवस्था रही है।

इस वजह से आंदोलन के दौरान कंगनपुर में एकत्र किए गए दूध को भी चिल्ला साहिब गुरुद्वारा भेजा गया। कुछ दूध ग्रामीणों और जरूरतमंद लोगों में भी वितरित किया गया।

रानियां चिलिंग सेंटर में दूध की सप्लाई कम हुई

आंदोलन का असर रानियां स्थित वीटा चिलिंग सेंटर की दूध की आवक पर भी दिखाई दिया। चिलिंग सेंटर में करीब 15 हजार लीटर स्टोरेज क्षमता है। यहां आसपास के गांवों, डेयरी संचालकों और दूधियों से दूध पहुंचता है, जिसे चिलिंग सेंटर में स्टोर किया जाता है।

चिलिंग सेंटर के स्टाफ के अनुसार संत नगर, जीवन नगर, मोहम्मदपुरिया और बालासर जैसे क्षेत्रों से दूध की सप्लाई कम हुई है। फिलहाल यहां रोजाना औसतन करीब 4100 से 4200 लीटर दूध पहुंच रहा है।

सामान्य स्थिति में दूध की आवक इससे अधिक रहती है। आंदोलन के दौरान गांवों से दूध की सप्लाई कम होने के कारण चिलिंग सेंटर तक पहुंचने वाली मात्रा पर असर पड़ा है।

दूध के खरीद भाव में बढ़ोतरी की मुख्य मांग

पशुपालकों और किसानों की मुख्य मांग दूध के खरीद भाव में बढ़ोतरी और फैट के आधार पर उचित दर तय करने की है। आंदोलन से पहले हुई बैठकों में पशुपालकों ने कहा था कि पशुओं के पालन-पोषण पर लगातार खर्च बढ़ रहा है। चारा, खल, बिनौला और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच दूध का मौजूदा खरीद भाव उनके लिए चुनौती बना हुआ है।

पशुपालकों ने अलग-अलग वीटा प्लांटों में खरीद दरों के अंतर का मुद्दा भी उठाया है। उनकी मांग है कि पूरे प्रदेश में दूध खरीद की समान व्यवस्था लागू हो और फैट के आधार पर उचित दर निर्धारित की जाए।

आंदोलन से पहले 1 से 3 अक्टूबर तक दूध की सप्लाई बंद रखने का आह्वान किया गया था। सिरसा में वीटा प्लांट के बाहर किसानों और पशुपालकों ने धरना देकर दूध की गाड़ियों की आवाजाही रोकने का प्रयास किया। अन्य क्षेत्रों में आंदोलन का असर अलग-अलग रहा और कई जगह दूध की सामान्य आपूर्ति भी जारी रही।

अब शनिवार की बैठक के बाद आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। किसानों ने सरकार को 17 अक्टूबर तक का समय दिया है। इसी दिन सिरसा की जाट धर्मशाला में होने वाली बैठक में आगे की रणनीति पर चर्चा होगी। फिलहाल किसानों और पशुपालकों की नजर सरकार की ओर से दूध के खरीद भाव और फैट आधारित दरों को लेकर उठाए जाने वाले कदम पर है।