मासूम शर्मा के ‘तत्वदर्शी’ पर बवाल, बाबाओं-डेरों पर निशाना साधते ही सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा के नए सॉन्ग ‘तत्वदर्शी’ पर विवाद शुरू हो गया है। गाने में बाबाओं, डेरों और पाखंडवाद पर निशाना साधा गया है।
➤ मासूम शर्मा के ‘तत्वदर्शी’ सॉन्ग ने रिलीज होते ही छेड़ी बहस
➤ हैरी लाठर बोले- किसी एक बाबा को टारगेट नहीं, गाना पाखंडवाद के खिलाफ
➤ सोशल मीडिया पर यूजर्स ने रामपाल, राम रहीम समेत कई बाबाओं का जिक्र किया
हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा एक बार फिर अपने नए सॉन्ग को लेकर चर्चा में हैं। बदमाशी कल्चर वाले गानों को लेकर पहले भी कंट्रोवर्सी में रहे मासूम शर्मा ने 26 अगस्त को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर नए सॉन्ग ‘तत्वदर्शी’ का करीब साढ़े 3 मिनट का ऑफिशियल ट्रैक जारी किया। गाने में पाखंडी बाबाओं, डेरों और पाखंडवाद पर निशाना साधा गया है। ट्रैक रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर इसे लेकर कमेंट्स वॉर शुरू हो गया। कुछ यूजर्स ने सिंगर को ट्रोल किया, वहीं कई लोगों ने गाने के समर्थन में भी प्रतिक्रिया दी।
इस गाने के लिरिक्स हरियाणवी सिंगर-कलाकार हैरी लाठर ने लिखे हैं। हैरी लाठर इससे पहले भी बाबाओं को लेकर गाने गा चुके हैं। उनके ‘सिरसा आले बाबा की चेली’ सॉन्ग पर भी खूब कंट्रोवर्सी हुई थी। इस बार लाठर ने खुद गाना गाने के बजाय अपने दोस्त मासूम शर्मा के लिए इसके लिरिक्स लिखे हैं।
दैनिक भास्कर से बातचीत में हैरी लाठर ने स्पष्ट किया कि गाना किसी एक बाबा को टारगेट करके नहीं लिखा गया है। उनका कहना है कि इसका मकसद किसी विशेष व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं, बल्कि पाखंडवाद के खिलाफ बात रखना है। इस सॉन्ग का वीडियो भी बाद में जारी किया जाएगा। हालांकि, लाठर के मुताबिक कुछ लोगों की ओर से उन्हें गाना डिलीट करने का दबाव भी बनाया जा रहा है।
गाना रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
‘तत्वदर्शी’ का ऑफिशियल ट्रैक सामने आते ही सोशल मीडिया पर यूजर्स की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आने लगीं। एक यूजर ने लिखा कि गाने में रामपाल को भी लपेट लिया गया है और अब मासूम शर्मा की खैर नहीं। वहीं एक अन्य यूजर ने सिंगर पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि दो-चार रुपए के लिए नाचने वाला मासूम बताएगा कि सही-गलत क्या है।
बहादुरगढ़ के एक यूजर ने कमेंट किया कि मासूम ने राम रहीम, आसाराम, हांसी वाले बाबा, धीरेंद्र शास्त्री से लेकर उस सरकारी शंकराचार्य तक को टारगेट कर दिया। इन प्रतिक्रियाओं के बाद गाने को लेकर सोशल मीडिया पर बहस और तेज हो गई।
लिरिक्स में पाखंडी बाबाओं और डेरों पर तीखे सवाल
गाने के एक हिस्से में पाखंडी बाबाओं और जगह-जगह बने डेरों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि बड़ी संख्या में कपटी लोग गुरु बने फिर रहे हैं और जगह-जगह डेरे खुल गए हैं। गाने में धार्मिक शिक्षा और दीक्षा के नाम पर होने वाली गतिविधियों पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। दयानंद जैसे पुरुषों की सीख को गलत तरीके से बताए जाने और कृष्ण को चोर कहने वालों पर भी सवाल उठाए गए हैं।
गाने में यह भी कहा गया है कि कई लोग तत्वदर्शी बने फिरते हैं, लेकिन उन्हें खुद तत्व का पता नहीं है।
एक अन्य हिस्से में डेरों में चढ़ावे और भक्तों की आस्था को लेकर सवाल उठाया गया है। लिरिक्स में कहा गया है कि लोग मुक्ति की तलाश में डेरों में जाते हैं, जबकि उनके घर के बच्चे भूखे सोते हैं। दूध चढ़ाने, उससे खीर बनने और उसे प्रसाद की तरह खाने का जिक्र करते हुए गाने में ऐसे लोगों पर सवाल उठाए गए हैं जो इसे अमर शरीर बनने की उम्मीद से जोड़ते हैं।
लिरिक्स में अनाथ आश्रम और वृद्धा आश्रम को भी बिजनेस की तरह चलाने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा कॉपी लेकर देशभर में घूमने और चंदा करने के जरिए अलग-अलग नाम पर धंधा करने की बात कही गई है।
गाने के एक अन्य हिस्से में कथा करने वालों पर भी निशाना साधा गया है। इसमें कहा गया है कि दूसरे लोगों के पर्चे खोले जाते हैं, जबकि खुद के पर्चे खुले पड़े हैं। लिरिक्स में यह भी कहा गया है कि जो लोग दिन-रात भक्ति में लीन रहते हैं, उनमें से कुछ ही सच्चे संन्यासी हैं, जबकि बाकी को पाखंडी बताया गया है।
हैरी लाठर ने गाने को लेकर बताईं तीन बड़ी बातें
ढाई महीने से चल रही थी तैयारी: हैरी लाठर के मुताबिक इस गाने को लेकर करीब दो-ढाई माह से तैयारी चल रही थी। पहले मासूम शर्मा का रिकॉर्डिंग के लिए समय नहीं लग पाया था। अब गाना रिकॉर्ड होने के बाद इसका ऑफिशियल ट्रैक मासूम शर्मा के सोशल मीडिया पेज पर जारी कर दिया गया। उन्होंने बताया कि यह गाना मुंबई की एक कंपनी ने बनाया है, जो कुछ समय बाद रिलीज होगा।
किसी एक बाबा को टारगेट नहीं किया: खुद गाना नहीं गाने के सवाल पर हैरी लाठर ने कहा कि यह गाना उन्होंने नहीं गाया है। उनके मुताबिक सभी साथ मिलकर काम करते हैं और जिसे जो ठीक लगता है, उसी हिसाब से काम किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह सॉन्ग मासूम शर्मा ने गाया है और इसमें किसी एक विशेष बाबा को टारगेट करने का मकसद नहीं है। उनके मुताबिक गाना हरियाणा ही नहीं, पूरे भारत में फैले पाखंडवाद के खिलाफ है और लोगों में पाखंडवाद को लेकर भ्रम दूर करने की कोशिश है।
गाना डिलीट करने का दबाव: हैरी लाठर ने वीडियो जारी कर कहा कि कुछ लोगों के फोन उनके पास आ रहे हैं और उनसे गाना डिलीट करने के लिए कहा जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि गाना डिलीट नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि यह केवल पाखंडवाद के खिलाफ है और जो लोग पाखंड नहीं फैला रहे, उनके लिए यह गाना नहीं है।
महापंचायत में नहीं पहुंचे थे मासूम शर्मा
सोशल मीडिया पर अश्लील कंटेंट, गानों में गन कल्चर, नशे और स्टेज पर अश्लील डांस के खिलाफ 25 जुलाई को महम चौबीसी के ऐतिहासिक चबूतरे पर महापंचायत हुई थी। इसमें कई हरियाणवी कलाकार, खाप प्रतिनिधि और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर पहुंचे थे। सभी ने ऐसे कंटेंट पर रोक लगाने का समर्थन किया था।
इस महापंचायत में सिंगर मासूम शर्मा बीमार होने की बात कहकर शामिल नहीं हुए थे। हालांकि, उन्होंने वीडियो जारी कर इस मुहिम का समर्थन किया था।
महापंचायत के कुछ दिन बाद ही मासूम शर्मा ने हिमाचल प्रदेश में हुए एक कार्यक्रम में अपना बैन सॉन्ग एक खटौला जेल के भीतर गाया था। गन कल्चर को बढ़ावा देने के आरोप में सरकार ने मासूम शर्मा के 19 गाने यूट्यूब से हटाए थे। सरकार ने कुल 67 गाने हटाए थे, जिनमें सबसे ज्यादा गाने मासूम शर्मा के ही थे।
‘सिरसा आला बाबा’ सॉन्ग पर भी हो चुकी है कंट्रोवर्सी
हरियाणवी सिंगर हैरी लाठर का ‘सिरसा आला बाबा’ सॉन्ग भी अपने लिरिक्स को लेकर सुर्खियों और कंट्रोवर्सी में रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस गाने के बोल “सिरसा आला बाबा सै जो लारा लार चेलियां की” हैं। गाने को लेकर सोशल मीडिया पर यूजर्स ने अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दी थीं। हैरी लाठर ने उस मामले में भी कहा था कि गाना किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाकर नहीं लिखा गया है। हैरी लाठर को मासूम शर्मा का करीबी भी बताया जाता है।
Akhil Mahajan